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Gurugram News: जिले की 250 एकड़ जमीन पर जंगल विकसित करेगा एनएचएआई
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-कोर्ट के आदेश पर एनएचएआई को लगाने हैं 2.15 लाख पौधे
-गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण में काटे गए थे बीस हजार पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण के दौरान काटे गए करीब बीस हजार पेड़ों की एवज में एनएचएआई गुरुग्राम में अब एक जंगल विकसित करने जा रहा है। इस जंगल में एनएचएआई को नियमानुसार दो लाख से ज्यादा पौधे लगाने हैं। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है। एनएचएआई ने गुरुग्राम और रेवाड़ी के वन विभाग को पत्र लिखकर जमीन मुहैया कराने की बात कही है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर धीरज सिंह ने बताया कि गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण को लेकर वर्ष 2021 में ही एनएचएआई ने वन विभाग से अनुमति ली थी। वन विभाग ने इस हाईवे के दौरान काटे गए 20 हजार पेड़ों की एवज में पंचकूला में मोरनी हिल्स को हरा-भरा करने की बात कही थी। इस पर पर्यावरणविद् वैशाली राणा और उनकी टीम के साथियों ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था।
एनजीटी ने आदेश दिया था कि नवनिर्मित किए गए हाईवे की दस किलोमीटर की परीधि में ही पेड़ लगाने होंगे। इस पर एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने एनएचएआई और पर्यावरणविदों से हरियाली विकसित करने का प्लान मांगा था। इस पर पर्यावरणविदों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो प्रस्ताव दाखिल किए गए थे।
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इनमें से एक के अनुसार मुसैदपुर, गढ़ी नत्थे खां, पलारी और महचाना गांव में पंचायत की 257 एकड़ खाली जमीन में जंगल विकसित करने की बात दी गई थी। दूसरे प्रस्ताव में बताया गया था कि नए एक्सप्रेसवे से 22 से 58 किलोमीटर की दूरी तक गुरुग्राम, सोहना, तावड़ू, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ की जमीन पर जंगल विकसित किया जा सकता है। इसी जंगल को विकसित करने के लिए अब जमीन की तलाश की जा रही है।
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-गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण में काटे गए थे बीस हजार पेड़
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण के दौरान काटे गए करीब बीस हजार पेड़ों की एवज में एनएचएआई गुरुग्राम में अब एक जंगल विकसित करने जा रहा है। इस जंगल में एनएचएआई को नियमानुसार दो लाख से ज्यादा पौधे लगाने हैं। इसके लिए जमीन की तलाश शुरू हो गई है। एनएचएआई ने गुरुग्राम और रेवाड़ी के वन विभाग को पत्र लिखकर जमीन मुहैया कराने की बात कही है।
एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर धीरज सिंह ने बताया कि गुरुग्राम-पटौदी-रेवाड़ी हाईवे के निर्माण को लेकर वर्ष 2021 में ही एनएचएआई ने वन विभाग से अनुमति ली थी। वन विभाग ने इस हाईवे के दौरान काटे गए 20 हजार पेड़ों की एवज में पंचकूला में मोरनी हिल्स को हरा-भरा करने की बात कही थी। इस पर पर्यावरणविद् वैशाली राणा और उनकी टीम के साथियों ने एनजीटी का दरवाजा खटखटाया था।
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एनजीटी ने आदेश दिया था कि नवनिर्मित किए गए हाईवे की दस किलोमीटर की परीधि में ही पेड़ लगाने होंगे। इस पर एनएचएआई ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने एनएचएआई और पर्यावरणविदों से हरियाली विकसित करने का प्लान मांगा था। इस पर पर्यावरणविदों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दो प्रस्ताव दाखिल किए गए थे।
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इनमें से एक के अनुसार मुसैदपुर, गढ़ी नत्थे खां, पलारी और महचाना गांव में पंचायत की 257 एकड़ खाली जमीन में जंगल विकसित करने की बात दी गई थी। दूसरे प्रस्ताव में बताया गया था कि नए एक्सप्रेसवे से 22 से 58 किलोमीटर की दूरी तक गुरुग्राम, सोहना, तावड़ू, रेवाड़ी और महेंद्रगढ़ की जमीन पर जंगल विकसित किया जा सकता है। इसी जंगल को विकसित करने के लिए अब जमीन की तलाश की जा रही है।