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राजीव चौक पर चार घंटे में ही नया प्रयोग विफल
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गुरुग्राम। शहर के राजीव चौक पर दुर्घटनाएं रोकने व सुचारु यातायात के लिए एक एनजीओ और पुलिस का नया प्रयोग सिरे नहीं चढ़ पाया। महज चार घंटे में ही नया प्रयोग विफल हो गया। वाहन चालकों की सहूलियत के लिए यातायात पुलिस को चौक पर पहले की व्यवस्था ही यथावत करनी पड़ी। तब कहीं जाकर चौक पर एकदम से बढ़े यातायात का दबाव कम हुआ और दोनों तरफ लगी वाहनों की लंबी कतारों से राहत मिली।
पहले से तय कार्यक्रम अनुसार, ट्रैक्स एनजीओ के साथ मिलकर यातायात पुलिस ने राजीव और कन्हैई चौक पर यातायात संचालन के लिए शनिवार को नया प्रयोग शुरू किया। नए प्रयोग के लिए बनाए ले-आउट (डिजाइन) को देखकर सुबह ही अहसास हो गया था कि यह प्रयोग सफल होने वाला नहीं, लेकिन एनजीओ अधिकारी लगातार इसके सफल होने का दावा करते रहे।
सुबह से चौक के चारों और वाहन सरक-सरक कर गुजरने लगे। कई बार दिल्ली से जयपुर की ओर आने वाले वाहनों की राजीव चौक से दिल्ली की ओर लंबी कतारें भी लगीं। सोहना रोड पर भी यही हाल रहा। बावजूद इसके एनजीओ और यातायात पुलिस के अधिकारी प्रयोग के सफल होने का इंतजार करते रहे। दोपहर करीब 2:40 बजे हाईवे के दोनों ओर (दिल्ली और सोहना की तरफ) एक से डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। कई एंबुलेंस और जरूरी वाहन भी जाम में फंसे रहे। इसी दौरान चौक से राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का काफिल गुजरना था। काफिले के सायरन की आवाज सुनकर ट्रैफिक पुलिस ने स्थिति संभाली और एकदम से व्यवस्था को पहले ही तरह यथायथ कर दिया, तब जाकर चौक पर यातायात सुचारु हो पाया।
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एक साल के भीतर 16 लोग गंवा चुके हैं जान
ट्रैक्स एनजीओ के निदेशक अनुराग कुलश्रेष्ठ के अनुसार, राजीव चौक दुर्घटना के लिहाज से ब्लैक स्पॉट है। यहां एक साल के भीतर हुई दुर्घटनाओं में 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, 22 को अंग भंग की क्षति झेलनी पड़ी है। यहां एक साथ छह तरफ का यातायात एक दूसरे से टकराता है। यातायात संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है इसलिए यातायात संचालन के लिए इस तरह का ले-आउट बनाया जा रहा है, जिससे यातायात सीधे टकराव की स्थिति में न रहे। कुछ लेन को बंद कर घुमाव देकर ट्रैफिक संचालन का डिजाइन तैयार किया गया था, लेकिन यह कारगर नहीं हो पाया। अब नया डिजाइन बनाया जाएगा।
फिलहाल केवल प्रयोग किया जा रहा है। इसमें यही जांच कर रहे हैं कि कौन से ले-आउट से यातायात संचालन कितना सफल होता है। कहीं न कहीं डिजाइन में तकनीकी खामी रही है, जिस कारण प्रयोग सफल नहीं हो पाया। वाहनों के साथ पैदल यात्रियों को सुरक्षित सफर करने के लिए नए सिरे से प्रयोग करेंगे। निश्चित ही हम अपने मिशन में कामयाब होंगे। इसे असफलता नहीं कहा जा सकता, यह तो केवल प्रयोग मात्र था। अब कुछ और बदलाव करेंगे।
-रविंद्र तोमर, डीसीपी, ट्रैफिक
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पहले से तय कार्यक्रम अनुसार, ट्रैक्स एनजीओ के साथ मिलकर यातायात पुलिस ने राजीव और कन्हैई चौक पर यातायात संचालन के लिए शनिवार को नया प्रयोग शुरू किया। नए प्रयोग के लिए बनाए ले-आउट (डिजाइन) को देखकर सुबह ही अहसास हो गया था कि यह प्रयोग सफल होने वाला नहीं, लेकिन एनजीओ अधिकारी लगातार इसके सफल होने का दावा करते रहे।
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सुबह से चौक के चारों और वाहन सरक-सरक कर गुजरने लगे। कई बार दिल्ली से जयपुर की ओर आने वाले वाहनों की राजीव चौक से दिल्ली की ओर लंबी कतारें भी लगीं। सोहना रोड पर भी यही हाल रहा। बावजूद इसके एनजीओ और यातायात पुलिस के अधिकारी प्रयोग के सफल होने का इंतजार करते रहे। दोपहर करीब 2:40 बजे हाईवे के दोनों ओर (दिल्ली और सोहना की तरफ) एक से डेढ़ किलोमीटर लंबी लाइन लग गई। कई एंबुलेंस और जरूरी वाहन भी जाम में फंसे रहे। इसी दौरान चौक से राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय का काफिल गुजरना था। काफिले के सायरन की आवाज सुनकर ट्रैफिक पुलिस ने स्थिति संभाली और एकदम से व्यवस्था को पहले ही तरह यथायथ कर दिया, तब जाकर चौक पर यातायात सुचारु हो पाया।
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एक साल के भीतर 16 लोग गंवा चुके हैं जान
ट्रैक्स एनजीओ के निदेशक अनुराग कुलश्रेष्ठ के अनुसार, राजीव चौक दुर्घटना के लिहाज से ब्लैक स्पॉट है। यहां एक साल के भीतर हुई दुर्घटनाओं में 16 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, 22 को अंग भंग की क्षति झेलनी पड़ी है। यहां एक साथ छह तरफ का यातायात एक दूसरे से टकराता है। यातायात संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ती है इसलिए यातायात संचालन के लिए इस तरह का ले-आउट बनाया जा रहा है, जिससे यातायात सीधे टकराव की स्थिति में न रहे। कुछ लेन को बंद कर घुमाव देकर ट्रैफिक संचालन का डिजाइन तैयार किया गया था, लेकिन यह कारगर नहीं हो पाया। अब नया डिजाइन बनाया जाएगा।
फिलहाल केवल प्रयोग किया जा रहा है। इसमें यही जांच कर रहे हैं कि कौन से ले-आउट से यातायात संचालन कितना सफल होता है। कहीं न कहीं डिजाइन में तकनीकी खामी रही है, जिस कारण प्रयोग सफल नहीं हो पाया। वाहनों के साथ पैदल यात्रियों को सुरक्षित सफर करने के लिए नए सिरे से प्रयोग करेंगे। निश्चित ही हम अपने मिशन में कामयाब होंगे। इसे असफलता नहीं कहा जा सकता, यह तो केवल प्रयोग मात्र था। अब कुछ और बदलाव करेंगे।
-रविंद्र तोमर, डीसीपी, ट्रैफिक