{"_id":"6197ac885d10ed0f6075c7d6","slug":"namazi-did-not-come-to-the-gurudwara-due-to-the-festival-of-gurus-the-promise-of-next-time-gurgaon-news-noi616692628","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुरुद्वारे में गुरु पर्व के चलते नहीं आए नमाजी, अगली बार का वादा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुरुद्वारे में गुरु पर्व के चलते नहीं आए नमाजी, अगली बार का वादा
विज्ञापन
गुरुग्राम। सदर बाजार और सेक्टर-39 स्थित गुरुद्वारों में शुक्रवार को गुरुपर्व के चलते नमाजी नहीं आए। संगत अधिक होने के कारण समुदाय को कष्ट न देने का हवाला देते हुए अगले जुमे से यहां आने का वादा किया गया है। गुरुद्वारा कमेटी का भी कहना है कि उनके लिए गुरुद्वारे के द्वार हमेशा खुले हुए हैं। वह भी हमारी तरह ही एक ईश्वरवाद में विश्वास करते हैं। गुरुपर्व पर गुरुद्वारा सदर बाजार में गुरुद्वारा कमेटी की ओर से प्रवक्ता दया सिंह ने बताया कि इस बार गुरुपर्व के चलते मुस्लिमों ने खुद ही यहां नमाज पढ़ने के लिए न आने की बात कही है। अगले जुमे से गुरुद्वारे में उनके लिए स्वागत है। गुरुद्वारे में नमाज की पेशकश का सिख समुदाय में ही हो रहे विरोध पर उन्होंने कहा कि कुछ लोग तो विरोध करते ही हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय भी सिख समुदाय की तरह एक ईश्वरवाद में विश्वास करता है, इसलिए गुरुद्वारे में नमाज होने में कोई हर्ज नहीं है।
गुरुद्वारे के बेसमेंट की जगह को नमाज के लिए देने से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम समुदाय ने 1984 में दंगों के समय सिखों की बहुत मदद की थी, उनकी जान व माल की रक्षा की थी, इसलिए उनसे समाज को सद्भावना है। वहीं विभाजन के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आए पंजाब के सिखों को आज भी देश में रिफ्यूजी कहा जाता है, यह बहुत बुरा लगता है। गुरुद्वारे में नमाज अदा करने की पेशकश करने वाले गुरुद्वारा कमेटी प्रधान शेर दिल सिंह से शुक्रवार को नागरिक एकता मंच का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की। पेशकश के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं उनकी तरह समाज के लिए अन्य लोगों को भी आगे आने के लिए अपील की। वहीं, विरोध के चलते सेक्टर-18 के पार्क में इस बार भी नमाजी नहीं आए। हालांकि मौके पर विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क सभी लोगों के लिए होता है, यह नमाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। चिह्नित स्थल सहहौल मोड़ पर ही समुदाय के लोग नमाज पढ़ें।
विज्ञापन
गुरुद्वारे के बेसमेंट की जगह को नमाज के लिए देने से किसी को कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए। मुस्लिम समुदाय ने 1984 में दंगों के समय सिखों की बहुत मदद की थी, उनकी जान व माल की रक्षा की थी, इसलिए उनसे समाज को सद्भावना है। वहीं विभाजन के बाद पाकिस्तान के हिस्से में आए पंजाब के सिखों को आज भी देश में रिफ्यूजी कहा जाता है, यह बहुत बुरा लगता है। गुरुद्वारे में नमाज अदा करने की पेशकश करने वाले गुरुद्वारा कमेटी प्रधान शेर दिल सिंह से शुक्रवार को नागरिक एकता मंच का एक प्रतिनिधि मंडल ने मुलाकात की। पेशकश के लिए उन्हें धन्यवाद ज्ञापित किया। वहीं उनकी तरह समाज के लिए अन्य लोगों को भी आगे आने के लिए अपील की। वहीं, विरोध के चलते सेक्टर-18 के पार्क में इस बार भी नमाजी नहीं आए। हालांकि मौके पर विवाद की स्थिति से निपटने के लिए पुलिस बल तैनात रहा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पार्क सभी लोगों के लिए होता है, यह नमाज के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। चिह्नित स्थल सहहौल मोड़ पर ही समुदाय के लोग नमाज पढ़ें।
विज्ञापन