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अरावली में पांच हजार से अधिक अवैध फार्म हाउस
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गुरुग्राम ( कुमार प्रवीण)। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों की अवहेलना कर फरीदाबाद की अरावली में बसाए गए खोरी गांव के मकानों को ढहाने के सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों ने अरावली में हो रहे अवैध निर्माण के मामले को एक बार फिर हवा दे दी है। सवाल उठता है कि खोरी गांव के गरीबों को बेघर करने के साथ ही क्या ऐसे अमीरों पर नकेल कसी जाएगी जो अरावली को अपनी आरामगाह बना रहे हैं?
गुरुग्राम की बात करें तो यहां करीब 5000 अवैध फार्म, मकान, कमर्शियल बिल्डिंगों के साथ-साथ कई नामी स्कूल भी बने हुए हैं। जिन पर शासन-प्रशासन के साथ सुप्रीम कोर्ट की शायद निगाह नहीं गई है। यहां फैली अरावली में ऐसे फार्म हाउस चारों ओर देखे जा सकते हैं जो सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। अरावली का बड़ा हिस्सा रईसजादों और भू माफियाओं के काले कारनामों की कहानी बयां कर रहा है। गुरुग्राम में अरावली का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में है। यहां फरीदाबाद और मेवात से भी ज्यादा अवैध निर्माण हुआ है और हो रहा है। ये सबसे अधिक सोहना क्षेत्र में है। संवाद
यहां से शुरू हुई फार्म हाउस निर्माण की कहानी
1980 में यहां अंसल बिल्डर ने अंसल रिट्रीट नाम से 1200 एकड़ में करीब 700 फार्म हाउस विकसित करने का प्लान बनाया था। इसी बीच यहां सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के पक्के निर्माण पर पाबंदी लगा दी। इसके लिए बाकायदा नोटिफिकेशन भी जारी किया गया। लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो पाया। यहां नए अमीर बने प्रॉपर्टी डीलरों ने मोटे मुनाफे के लिए प्रॉपर्टी के निवेशकों को झांसे में लेना शुरू कर दिया।
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इसके बाद देखते ही देखते यहां अवैध फार्म हाउस निर्माण का धंधा फलने फूलने लगा। जो आज करीब 5000 से अधिक फार्म हाउस निर्माण तक जा पहुंचा है। गुरुग्राम की अरावली में अवैध निर्माण का धंधा फरीदाबाद और मेवात से कहीं बड़ा है।
सर्वे में 500 से अधिक फार्म हाउस अवैध
अरावली के अस्तित्व को बचाने के दिखावे में जुटे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के सर्वे में ही बताया गया कि यहां 500 से अधिक अवैध फार्म विकसित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों पर इसी साल जनवरी में इन्हें तोड़ने की योजना बनाई, लेकिन योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई। जनवरी मे हुई बैठक में तत्कालीन डीसी ने दो से तीन महीने में अवैध निर्माण तोड़ने का दावा किया।
तोड़फोड़ अभियान के लिए बाकायदा एक बैठक भी हुई जिसमें कंट्री एंड टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट, नगर निगम, वन विभाग, डीआरओ, मीनिस्ट्री ऑफ एन्वायरमेंट एंड फॉरेस्ट, पॉल्यूूशन डिपार्टमेंट के साथ सोहना नगर परिषद के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।
बेशकीमती वन संपदा का हो रहा दोहन
रसूखदार अरावली में धड़ल्ले से निर्माण कर रहे हैं। उन्हें न खाकी का खौफ है न कानून का डर। उनकी खैर खबर लेने वाला कोई नजर नहीं। अरावली का सीना छलनी कर बेशकीमती वन संपदा का धड़ल्ले से दोहन हो रहा। यहां आलीशान फार्म हाउस बनाए जा रहे हैं। अगर अरावली में किसी भी तरह का निर्माण गैरकानूनी है तो अमीरजादों पर मेहरबानी क्यों? किसकी मिली भगत से रसूखदारों को वन संपदा के दोहन की छूट दी जा रही है? ऐेसे ही कई सवाल अपने उत्तर ढूंढ रहे हैं।
अरावली के दोहन मात्र से हो रही करोड़ों रुपये की कमाई
अवैध निर्माण के साथ ही यहां अरावली के दोहन का खेल भी खेला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हरियाणा के खनन लंबे समय से बंद है। अवैध फार्म हाउस विकसित करने वाले भू माफिया माइनिंग से करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं। अरावली से निकलने वाले पत्थरों को वह निर्माण में इस्तेमाल करने के साथ उनकी तस्करी भी कर रहे हैं। एक रोड बनाने में ही अरावली से निकले पत्थर करोड़ों रुपये का मुनाफा दे जाते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह अरावली का दोहन कर करोड़ों-अरबों रुपये की काली कमाई की जा रही है।
कोरोना काल बना वरदान
अरावली में अवैध फार्म हाउस विकसित करने वालों के लिए कोरोना काल वरदान साबित हुआ। शासन-प्रशासन जब अपना पूरा ध्यान कोरोना से लड़ने पर केंद्रित कर रहा था तब भू माफिया यहां आराम से अवैध निर्माण में जुटे थे। ना तो निगरानी के लिए कोई अधिकारी पहुंच रहा था और तोड़फोड़ के लिए प्रशासन समय निकाल पा रहा था। ऐसे में दो से तीन मंजिला अवैध फार्म हाउस खड़े कर दिए गए। इसके साथ ही सरकारी स्तर पर बरती कई उदासीनता और इच्छाशक्ति की कमी भी इनके निर्माण में सहायक बन रही है।
इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण की भरमार
वैसे तो पूरी अरावली में कहीं न कहीं अवैध निर्माण की गतिविधियां की जा रही हैं लेकिन कासन, मानेसर, नौरंगपुर, राठीवास, सकतपुर, गैरतपुर बांस, रायसीना, बंधवाड़ी, ग्वाल पहाड़ी, सोहना, रिठौज और दमदमा में ही करीब 5000 अवैध फार्म हाउस निर्माण का अंदाजा लगाया जा रहा है।
मजबूरी गिना पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
अरावली में अवैध निर्माण रोकने के जिम्मेदार भी अपनी मजबूरी गिना पल्ला ही झाड़ते नजर आते हैं। सोहना नगर परिषद के अधिकारी सुशील ठाकरान के मुताबिक दो महीने पहले अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ अभियान चलाने की योजना थी। लेकिन कोरोना के चलते वो नहीं चलाया जा सका। क्षेत्र में जो अवैध निर्माण किया गया है या चल रहा है, उसे चिन्हित कर नोटिस दिया है। ऐसे 40 अवैध निर्माणों को रोकने और तोड़ने का नोटिस दिया जा चुका है। कोरोना के कारण अधिकारियों की व्यस्तता से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं मिल पा रहा था, इसलिए अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो सकी।
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गुरुग्राम की बात करें तो यहां करीब 5000 अवैध फार्म, मकान, कमर्शियल बिल्डिंगों के साथ-साथ कई नामी स्कूल भी बने हुए हैं। जिन पर शासन-प्रशासन के साथ सुप्रीम कोर्ट की शायद निगाह नहीं गई है। यहां फैली अरावली में ऐसे फार्म हाउस चारों ओर देखे जा सकते हैं जो सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के आदेशों को ठेंगा दिखा रहे हैं। अरावली का बड़ा हिस्सा रईसजादों और भू माफियाओं के काले कारनामों की कहानी बयां कर रहा है। गुरुग्राम में अरावली का अस्तित्व पूरी तरह खतरे में है। यहां फरीदाबाद और मेवात से भी ज्यादा अवैध निर्माण हुआ है और हो रहा है। ये सबसे अधिक सोहना क्षेत्र में है। संवाद
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यहां से शुरू हुई फार्म हाउस निर्माण की कहानी
1980 में यहां अंसल बिल्डर ने अंसल रिट्रीट नाम से 1200 एकड़ में करीब 700 फार्म हाउस विकसित करने का प्लान बनाया था। इसी बीच यहां सुप्रीम कोर्ट ने किसी भी तरह के पक्के निर्माण पर पाबंदी लगा दी। इसके लिए बाकायदा नोटिफिकेशन भी जारी किया गया। लेकिन यहां इसका पालन नहीं हो पाया। यहां नए अमीर बने प्रॉपर्टी डीलरों ने मोटे मुनाफे के लिए प्रॉपर्टी के निवेशकों को झांसे में लेना शुरू कर दिया।
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इसके बाद देखते ही देखते यहां अवैध फार्म हाउस निर्माण का धंधा फलने फूलने लगा। जो आज करीब 5000 से अधिक फार्म हाउस निर्माण तक जा पहुंचा है। गुरुग्राम की अरावली में अवैध निर्माण का धंधा फरीदाबाद और मेवात से कहीं बड़ा है।
सर्वे में 500 से अधिक फार्म हाउस अवैध
अरावली के अस्तित्व को बचाने के दिखावे में जुटे टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के सर्वे में ही बताया गया कि यहां 500 से अधिक अवैध फार्म विकसित किए जा चुके हैं। प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के निर्देशों पर इसी साल जनवरी में इन्हें तोड़ने की योजना बनाई, लेकिन योजना कागजों में ही सिमट कर रह गई। जनवरी मे हुई बैठक में तत्कालीन डीसी ने दो से तीन महीने में अवैध निर्माण तोड़ने का दावा किया।
तोड़फोड़ अभियान के लिए बाकायदा एक बैठक भी हुई जिसमें कंट्री एंड टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट, नगर निगम, वन विभाग, डीआरओ, मीनिस्ट्री ऑफ एन्वायरमेंट एंड फॉरेस्ट, पॉल्यूूशन डिपार्टमेंट के साथ सोहना नगर परिषद के अधिकारियों ने हिस्सा लिया था।
बेशकीमती वन संपदा का हो रहा दोहन
रसूखदार अरावली में धड़ल्ले से निर्माण कर रहे हैं। उन्हें न खाकी का खौफ है न कानून का डर। उनकी खैर खबर लेने वाला कोई नजर नहीं। अरावली का सीना छलनी कर बेशकीमती वन संपदा का धड़ल्ले से दोहन हो रहा। यहां आलीशान फार्म हाउस बनाए जा रहे हैं। अगर अरावली में किसी भी तरह का निर्माण गैरकानूनी है तो अमीरजादों पर मेहरबानी क्यों? किसकी मिली भगत से रसूखदारों को वन संपदा के दोहन की छूट दी जा रही है? ऐेसे ही कई सवाल अपने उत्तर ढूंढ रहे हैं।
अरावली के दोहन मात्र से हो रही करोड़ों रुपये की कमाई
अवैध निर्माण के साथ ही यहां अरावली के दोहन का खेल भी खेला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश से हरियाणा के खनन लंबे समय से बंद है। अवैध फार्म हाउस विकसित करने वाले भू माफिया माइनिंग से करोड़ों का मुनाफा कमा रहे हैं। अरावली से निकलने वाले पत्थरों को वह निर्माण में इस्तेमाल करने के साथ उनकी तस्करी भी कर रहे हैं। एक रोड बनाने में ही अरावली से निकले पत्थर करोड़ों रुपये का मुनाफा दे जाते हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह अरावली का दोहन कर करोड़ों-अरबों रुपये की काली कमाई की जा रही है।
कोरोना काल बना वरदान
अरावली में अवैध फार्म हाउस विकसित करने वालों के लिए कोरोना काल वरदान साबित हुआ। शासन-प्रशासन जब अपना पूरा ध्यान कोरोना से लड़ने पर केंद्रित कर रहा था तब भू माफिया यहां आराम से अवैध निर्माण में जुटे थे। ना तो निगरानी के लिए कोई अधिकारी पहुंच रहा था और तोड़फोड़ के लिए प्रशासन समय निकाल पा रहा था। ऐसे में दो से तीन मंजिला अवैध फार्म हाउस खड़े कर दिए गए। इसके साथ ही सरकारी स्तर पर बरती कई उदासीनता और इच्छाशक्ति की कमी भी इनके निर्माण में सहायक बन रही है।
इन क्षेत्रों में अवैध निर्माण की भरमार
वैसे तो पूरी अरावली में कहीं न कहीं अवैध निर्माण की गतिविधियां की जा रही हैं लेकिन कासन, मानेसर, नौरंगपुर, राठीवास, सकतपुर, गैरतपुर बांस, रायसीना, बंधवाड़ी, ग्वाल पहाड़ी, सोहना, रिठौज और दमदमा में ही करीब 5000 अवैध फार्म हाउस निर्माण का अंदाजा लगाया जा रहा है।
मजबूरी गिना पल्ला झाड़ रहे जिम्मेदार
अरावली में अवैध निर्माण रोकने के जिम्मेदार भी अपनी मजबूरी गिना पल्ला ही झाड़ते नजर आते हैं। सोहना नगर परिषद के अधिकारी सुशील ठाकरान के मुताबिक दो महीने पहले अवैध निर्माण के खिलाफ तोड़फोड़ अभियान चलाने की योजना थी। लेकिन कोरोना के चलते वो नहीं चलाया जा सका। क्षेत्र में जो अवैध निर्माण किया गया है या चल रहा है, उसे चिन्हित कर नोटिस दिया है। ऐसे 40 अवैध निर्माणों को रोकने और तोड़ने का नोटिस दिया जा चुका है। कोरोना के कारण अधिकारियों की व्यस्तता से ड्यूटी मजिस्ट्रेट नहीं मिल पा रहा था, इसलिए अवैध निर्माण के खिलाफ कार्यवाही नहीं हो सकी।