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Gurugram News: जलभराव पर मंत्री ने सिंचाई विभाग पर लगाए गंभीर आरोप, विजिलेंस जांच की मांग

Sat, 19 Sep 2026 12:29 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 19 Sep 2026 12:29 AM IST
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Minister levels serious allegations against the Irrigation Department regarding waterlogging; demands a vigilance inquiry.
सीएम को लिखा पत्र, विभाग पर प्राकृतिक बरसाती नालों की अनदेखी और अतिक्रमण नहीं हटाने का आरोप
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने गुरुग्राम में मानसून के दौरान हुए जलभराव को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा है। उन्होंने सिंचाई विभाग पर गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए तत्काल विजिलेंस जांच की मांग की है। मंत्री ने कहा कि विभाग की गैर-जिम्मेदाराना कार्यप्रणाली के कारण शहर के बड़े हिस्से में जलभराव हुआ, जिससे सरकार की छवि धूमिल हुई है।
2 सितंबर 2026 को गुरुग्राम में जलभराव की समस्या को लेकर एक बैठक हुई थी। इस बैठक में जीएमडीए, नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद थे। शहरी विकास सलाहकार और पूर्व मुख्य सचिव डीएस देसी से चर्चा के दौरान यह जानकारी सामने आई कि गुरुग्राम के प्राकृतिक बरसाती नालों और जल निकासी के रास्तों को अतिक्रमण मुक्त रखने की जिम्मेदारी सिंचाई विभाग की है। अधिकारियों ने बताया कि सिंचाई विभाग में पिछले सात वर्षों से एक ही अधिकारी, सहायक अभियंता और फिर अधीक्षक अभियंता के पद पर तैनात रहे, जो हाल ही में सेवानिवृत्त हुए हैं।
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अतिक्रमण पर कार्रवाई का अभाव
बैठक में अधिकारियों ने बताया था कि सिंचाई विभाग के पास प्राकृतिक मुख्य नालों और ड्रेन का भू-स्वामित्व है। पिछले सात वर्षों में विभाग ने कैनल ड्रेनेज एक्ट के तहत विभिन्न बिल्डरों को सैकड़ों नोटिस जारी किए। हालांकि, इन नोटिसों के बावजूद विभाग ने कब्जों को हटाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि वर्षों से तैनात अधिकारी ने भ्रष्टाचार कर इन नोटिसों को दबाने का कार्य किया। मुख्य ड्रेन का प्रबंधन कैनल एक्ट के तहत सिंचाई विभाग के पास होता है, चाहे वे नगर निगम क्षेत्र के अंदर हों या बाहर।
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सफाई बजट और जांच की मांग
राव इंद्रजीत सिंह के अनुसार, सिंचाई विभाग द्वारा पिछले सात वर्षों में ड्रेन की सफाई के लिए कोई बजट खर्च नहीं किया गया। इसके फलस्वरूप शहर के बड़े क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने इस गैर-जिम्मेदाराना और आपराधिक लापरवाही को सरकार की छवि धूमिल करने वाला बताया। मंत्री ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस पूरे मामले की तत्काल विजिलेंस जांच के आदेश दिए जाएं ताकि आरोपियों को कानून के अनुसार दंडित किया जा सके। गुरुग्राम में जलभराव को लेकर वह पहले भी अधिकारियों की जवाबदेही और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों को बहाल करने की जरूरत उठा चुके हैं। इस मानसून में कई बार जलभराव से लोगों को परेशानी उठानी पड़ी थी।
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