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Gurugram: पॉलिथीन मुक्त समाज के लिए ममता अग्रवाल ने शुरू किया थ्री आर का फंडा, जरूरतमंद महिलाओं को मिला रोजगार
Fri, 14 Apr 2023 06:50 PM IST
आकाश दुबे
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Published by: आकाश दुबे
Updated Fri, 14 Apr 2023 06:50 PM IST
सार
ममता अग्रवाल ने थ्री आर को बढ़ाव देने के लिए सनसिटी समेत शहर की आधा दर्जन सोसाइटियों में एक चैरिटेबल बॉक्स लगवाया है, जहां कोई भी व्यक्ति अपना नहीं प्रयोग में आने वाला कोई भी सामान रख सकता है।
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चैरिटी बॉक्स के साथ ममता अग्रवाल (बाएं से दूसरी )
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
गुरुग्राम के सेक्टर 54 स्थित सनसिटी में रहने वाली ममता अग्रवाल ने पॉलिथीन मुक्त समाज के लिए एक नई तरकीब निकाली है। पिछले कुछ वर्षों से वे कपड़े के थैले का अभियान चला रहीं थीं। वे लोगों से उनकी पुरानी साड़ियां और अन्य कपड़े जिनका इस्तेमाल वे नहीं कर रहे, उसे ले लेती थीं। पहले व्यक्तिगत स्तर पर वंचित परिवारों की महिलाओं को इस अभियान जोड़कर उसके थैले सिलवाती थीं और उन थैलों को लोगों को बांटती थीं।
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इसके बाद एक और संगठन के साथ जुड़कर दिल्ली के नजफगढ़ इलाके में सोशल विजन इंडिया के साथ एक सेंटर शुरू किया, जिसमें लोगों से प्राप्त कपड़ों से थैले संगठित रूप से सिले जाने लगे, जिन्हें पॉलिथीन बैग का इस्तेमाल रोकने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। इस सेंटर में जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार भी मिल गया। विभिन्न सोसाइटियों में उन्होंने कपड़े के थैले का बैग बैंक शुरू करवाया। पिछले दिनों 30 मार्च को गुरुग्राम नगर निगम की ओर स्वच्छोत्सव 2023 में कैंपेन के लिए ममता अग्रवाल के लीनेस क्लब संपूर्णा को निगम के संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार ने सम्मानित किया है।
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एक किलो प्लास्टिक के बदले एक किलो चावल
गुरुग्राम की कई सोसाइटियों में ममता अग्रवाल के कपड़े के थैले वाले अभियान को समर्थन मिला है। करीब दो महीने पहले उन्होंने पॉलिथीन मुक्त समाज बनाने के लिए एक नया तरीका अपनाया। उन्होंने इसमें कूड़ा बीनने वाले परिवारों, घरेलू कामगार परिवारों और अन्य जरूरतमंद परिवारों की महिलाओं और बच्चों को जोड़ा है। वह उनके द्वारा जगह-जगह से एकत्र किया हुआ प्लास्टिक लेती हैं। इसमें पॉलिथीन, प्लॉस्टिक की तमाम चीजें होती है, जो वे एकत्र कर सकते हैं।
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एक किलो प्लास्टिक के बदले में वह उन्हें एक किलो चावल देती हैं। वह बताती हैं कि यह चावल वह राशन की दुकानों से खरीदती हैं। इस प्लास्टिक को वह एक रीसायकल करने वाली एजेंसी मैक्स रीसायकलर ले जाती हैं, इन्हें वे रीसायकल कर रहे हैं। ममता बताती हैं कि वंचित परिवारों के लिए चावल बहुत जरूरी है और इस तरह प्लास्टिक नाले या कूड़े में जाने बजाय रीसायकल होकर एक नया रूप ले लेता है। वे रीसायकल, रियूज और रिफ्यूज के थ्री आर के फंडे को बढ़ावा दे रही हैं।
सोसाइटियों के बाहर लगाया चैरिटेबल बॉक्स
ममता अग्रवाल ने थ्री आर को बढ़ाव देने के लिए सनसिटी समेत शहर की आधा दर्जन सोसाइटियों में एक चैरिटेबल बॉक्स लगवाया है, जहां कोई भी व्यक्ति अपना नहीं प्रयोग में आने वाला कोई भी सामान रख सकता है। इसमें इलेक्ट्रॉनिक गैजेट से लेकर किचन अप्लायंस, कपड़े, खिलौने, किताबें, जूते कुछ भी हो सकता है। उनकी टीम इन चीजों को इस्तेमाल के लायक बनाकर उसे जरूरतमंद लोगों को दे रही है। यह एक ऐसा अभियान है, जिसमें चीजों का पूरा प्रयोग हो जाता है। जिनके पास अतिरिक्त चीजें हैं और वे उसे कचरे में फेंकने वाले हैं, इसका पुनःप्रयोग हो सकेगा। उसकी गुणवत्ता का संपूर्ण प्रयोग हो सकेगा और यह कचरा कम करने और पर्यावरण को बचाने का रियूज का फंडा है।