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लंपी वायरस.. 25000 पशुओं का टीकाकरण इस हफ्ते से

Mon, 22 Aug 2022 09:51 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 22 Aug 2022 09:51 PM IST
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LUMPY VIRUS
गुरुग्राम। लंपी वायरस से गाय और अन्य दुधारू पशुओं को बचाने के लिए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। अब तक 8100 पशुओं को बचाव का टीका लगाया जा चुका है। इस सप्ताह 25 हजार टीके और आएंगे। इसके बाद जिले की पंजीकृत 16 गोशालाओं में गायों का टीकाकरण शुरू होगा।
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पशुपालकों को जागरूक करने के लिए 25 टीमें लगाई गई हैं। सोमवार को जिला उपायुक्त निशांत कुमार यादव की अध्यक्षता में लघु सचिवालय में गोशाला संचालकों के साथ बैठक हुई। इसमें उन्हें बीमारी से बचाव के उपाय बताए गए। उपायुक्त ने कहा कि जिले में धारा-144 लगाते हुए किसी भी प्रकार के पशु मेले के आयोजन पर प्रतिबंध है। दूसरे राज्यों अथवा पड़ोसी जिलों से पशुओं का आवागमन बंद कर दिया गया है। लंपी एक वायरल बीमारी है, जो गायों में ज्यादा फैलती है। यह बीमारी पशुओं से मनुष्यों में नहीं फैलती।
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पशुपालन विभाग की उपनिदेशक डॉ. पुनीता गहलोत ने कहा कि वो 15 से 20 दिनों तक सावधानी बरतें। गोशाला में साफ सफाई रखें। सभी गोशालाओं की फोगिंग कराई जाएगी। यदि इस बीमारी से संक्रमित पशु की मृत्यु हो जाती है तो उसे कम से कम 10 फुट गहरे गड्ढे में दफनाया जाए। नगर निगम गुरुग्राम तथा नगर निगम मानेसर के साथ जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी से कहा कि किसी पशु की मृत्यु होने पर सुरक्षित स्थान पर ही उसे दफन करें।
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बैठक में नगराधीश दर्शन यादव, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नरेंद्र सारवान, नगर निगम, सिविल सर्जन कार्यालय सहित कई अन्य विभागों के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।
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बाक्स:
सावधानी ही बचाव
- संक्रमित पशु की देखभाल करने वाले हाथों को सैनिटाइज करें
संक्रमित पशु मिलने पर पांच किमी के दायरे को इन्फेक्टेड जोन घोषित कर दिया जाएगा
- इन्फेक्टेड जोन में रिंग वैक्सीनेशन यानी बाहर से अंदर की ओर आते हुए टीकाकरण होगा।
- प्रदेश में अब तक 30000 गाय इस वायरस से संक्रमित हुई हैं, जिनमें से 211 की मौत हुई है।
- संक्रमित पशु को ज्यादा से ज्यादा तरल चीजें ही खिलाएं। उसका दूध निकालते रहें।
- संक्रमित पशु का दूध अच्छी तरह से उबाल कर प्रयोग करें, बछड़े को ऐसा दूध ना पिलाएं।
- संक्रमित पशु को जोहड़ में न लेकर जाएं, इससे दूसरे पशुओं में संक्रमण का खतरा।
- बीमारी के लक्षण या किसी पशु की मृत्यु होने पर पशुपालन विभाग को सूचना दें।
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