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संज्ञान लेने से पहले नहीं मिल सकती गैर-भरोसेमंद दस्तावेजों की सूची : कोर्ट
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अनिल भल्ला मामले में याचिका खारिज
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने अनिल भल्ला और अन्य आरोपियों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच के दौरान एकत्र किए गए गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची मांगने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि ऐसे दस्तावेज आरोप तय होने के चरण में ही उपलब्ध कराए जा सकते हैं, न कि संज्ञान लेने से पहले। यह आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत ने दिया।
आरोपियों ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के लिए इन दस्तावेज की सूची प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची न मिलने से उन्हें अपना बचाव तैयार करने में गंभीर बाधा आएगी। आरोपियों के वकील ने सरला गुप्ता और कुशल कुमार अग्रवाल मामलों में उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है।
ईडी के विशेष लोक अभियोजक अतुल अग्रवाल ने बताया कि गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की प्रतियां आरोप तय होने के बाद ही दी जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन शिकायत और भरोसेमंद दस्तावेज पहले ही आरोपियों को दिए जा चुके हैं। ईडी ने तर्क दिया कि कुशल कुमार अग्रवाल मामले में उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान लेने के चरण में गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची के अधिकार पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम की एक विशेष अदालत ने अनिल भल्ला और अन्य आरोपियों द्वारा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से जांच के दौरान एकत्र किए गए गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची मांगने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि ऐसे दस्तावेज आरोप तय होने के चरण में ही उपलब्ध कराए जा सकते हैं, न कि संज्ञान लेने से पहले। यह आदेश धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत ने दिया।
आरोपियों ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उन्हें निष्पक्ष सुनवाई के लिए इन दस्तावेज की सूची प्राप्त करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची न मिलने से उन्हें अपना बचाव तैयार करने में गंभीर बाधा आएगी। आरोपियों के वकील ने सरला गुप्ता और कुशल कुमार अग्रवाल मामलों में उच्चतम न्यायालय के फैसलों का हवाला दिया। प्रवर्तन निदेशालय ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि यह कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है।
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ईडी के विशेष लोक अभियोजक अतुल अग्रवाल ने बताया कि गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की प्रतियां आरोप तय होने के बाद ही दी जाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अभियोजन शिकायत और भरोसेमंद दस्तावेज पहले ही आरोपियों को दिए जा चुके हैं। ईडी ने तर्क दिया कि कुशल कुमार अग्रवाल मामले में उच्चतम न्यायालय ने संज्ञान लेने के चरण में गैर-भरोसेमंद दस्तावेज की सूची के अधिकार पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुनाया।
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