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Gurugram News: महिलाओं की सुरक्षा पर नजर, इकट्ठा किए जाएंगे असुरक्षित जगहों के आंकड़े
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निगम ने सेफ्टी सर्वे करने वाली एजेंसी सेफ्टीपिन के साथ किया था करार
फोटो
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थानों को लेकर नगर निगम सेफ्टी ऑडिट करेगा। आंकड़ें इकट्ठा कर उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए बीते महीने निगम ने महिलाओं के लिए सुरक्षित और असुरक्षित जगहों का डेटा इकट्ठा कर सर्वे करने वाले संगठन ‘सेफ्टीपिन’ के साथ समझौता किया था। इसके तहत कंपनी पूरे निगम क्षेत्र का डेटा निगम को उपलब्ध कराएगा। इसके बाद उन जगहों की व्यवस्थाओं को ठीक करने पर काम किया जाएगा।
मेट्रो स्टेशनों के बाहर, बस स्टैंड, पार्क, फुटपाथ आदि जगहों पर कई बार महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। कई जगहों पर रात के वक्त स्ट्रीट लाइटें न जलने के कारण ने अराजक तत्वों का शिकार हो जाती हैं। सेफ्टी ऑडिट होने के बाद इन जगहों की व्यवस्थाओं को ठीक किया जाएगा।
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निर्भया कांड के बाद शुरू हुआ था ‘सेफ्टीपिन’
सेफ्टी सर्वे करने वाली एजेंसी सेफ्टीपिन की शुरुआत 2012 के निर्भया कांड के बाद हुई थी। 16 दिसंबर 2012 को हुए इस दर्दनाक सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। संगठन की सीईओ डॉ. कल्पना विश्वनाथ ने पुलिस और अन्य एजेंसियोंं को सुरक्षित सड़कों, गलियों, पार्कों के आकड़ें एकत्र कर सौंपने के लिए सेफ्टीपिन शुरू किया था। इसके एप के जरिए शहर के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा को लेकर सेफ्टी सूचकांक दर्ज होता है। इस एप का प्रयोग कर लोग भी अपने इलाके की स्थिति दर्ज करते हैं। करीब दो लाख लोगों ने इस एप में अपनी बात रखी है। यह आंकड़ा पुलिस, प्रशासन और अन्य सेवा प्रदान करने वाले संगठनों के साथ साझा किए जाते हैं।
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सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं आदि के कुछ आंकड़े एकत्र कर लिए गए हैं। इसे निगम को भेजा जा रहा है। पूरे निगम क्षेत्र का सेफ्टी ऑडिट होगा। निश्चित रूप से इससे महिलाओं की सुरक्षा, सुविधाएं बेहतर होंगी।
-कल्पना विश्वनाथ, सीईओ, सेफ्टीपिन
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शहर में महिलाओं के लिए असुरक्षित स्थानों को लेकर नगर निगम सेफ्टी ऑडिट करेगा। आंकड़ें इकट्ठा कर उस पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए बीते महीने निगम ने महिलाओं के लिए सुरक्षित और असुरक्षित जगहों का डेटा इकट्ठा कर सर्वे करने वाले संगठन ‘सेफ्टीपिन’ के साथ समझौता किया था। इसके तहत कंपनी पूरे निगम क्षेत्र का डेटा निगम को उपलब्ध कराएगा। इसके बाद उन जगहों की व्यवस्थाओं को ठीक करने पर काम किया जाएगा।
मेट्रो स्टेशनों के बाहर, बस स्टैंड, पार्क, फुटपाथ आदि जगहों पर कई बार महिलाएं खुद को असुरक्षित महसूस करती हैं। कई जगहों पर रात के वक्त स्ट्रीट लाइटें न जलने के कारण ने अराजक तत्वों का शिकार हो जाती हैं। सेफ्टी ऑडिट होने के बाद इन जगहों की व्यवस्थाओं को ठीक किया जाएगा।
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निर्भया कांड के बाद शुरू हुआ था ‘सेफ्टीपिन’
सेफ्टी सर्वे करने वाली एजेंसी सेफ्टीपिन की शुरुआत 2012 के निर्भया कांड के बाद हुई थी। 16 दिसंबर 2012 को हुए इस दर्दनाक सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद सड़कों पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठे। संगठन की सीईओ डॉ. कल्पना विश्वनाथ ने पुलिस और अन्य एजेंसियोंं को सुरक्षित सड़कों, गलियों, पार्कों के आकड़ें एकत्र कर सौंपने के लिए सेफ्टीपिन शुरू किया था। इसके एप के जरिए शहर के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षा को लेकर सेफ्टी सूचकांक दर्ज होता है। इस एप का प्रयोग कर लोग भी अपने इलाके की स्थिति दर्ज करते हैं। करीब दो लाख लोगों ने इस एप में अपनी बात रखी है। यह आंकड़ा पुलिस, प्रशासन और अन्य सेवा प्रदान करने वाले संगठनों के साथ साझा किए जाते हैं।
सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा, सार्वजनिक सुविधाओं आदि के कुछ आंकड़े एकत्र कर लिए गए हैं। इसे निगम को भेजा जा रहा है। पूरे निगम क्षेत्र का सेफ्टी ऑडिट होगा। निश्चित रूप से इससे महिलाओं की सुरक्षा, सुविधाएं बेहतर होंगी।
-कल्पना विश्वनाथ, सीईओ, सेफ्टीपिन