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जेई और एसडीओ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
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गुरुग्राम। पार्षदों का फर्जी संतुष्टि पत्र लगाकर नगर निगम में ढाई करोड़ के गबन का प्रयास के मामले में सदर थाना पुलिस ने एक ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, जबकि एसडीओ और जेई की अग्रिम जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। आरोपी अब उच्च न्यायालय में अग्रिम जमानत के लिए अपील करेंगे।
करीब डेढ़ माह पहले गृह राज्यमंत्री अनिल विज ने नगर निगम कार्यालय का निरीक्षण किया था। जहां पर ढाई करोड़ रुपये का गलत भुगतान कराने के प्रयास का मामला उनके संज्ञान में आया था। उसके बाद उनके आदेश पर सदर थाना पुलिस ने दो कार्यकारी इंजीनियर, एक एसडीओ, एक जेई के साथ तीन ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
पुलिस को निगामयुक्त की ओर से उन्हें बताया गया कि दो कार्यकारी अभियंता, एक एसडीओ व एक जेई ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। पुलिस को अब तक की जांच में पता चला है कि पार्षदों के हस्ताक्षर कंप्यूटर से उठाकर बनाए गए हैं। जांच चल रही है कि आरोपी फर्जी बिल कैसे तैयार किया है।
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आरोप है कि कार्यकारी अभियंता पंकज सैनी, गोपाल कलावत, एसडीओ विक्की कुमार, जेई विनोद कुमार और नगर निगम के ठेकेदार दिलावर सिंह, राजकुमार और ठेकेदार पवन की करतूत के बारे में छह माह पहले ही खुलासा हो गया था। नगर निगम के अधिकारी उसे दबाना चाहते हैं। गृहमंत्री की ओर से की गई कार्रवाई के बाद उन्हें इसकी जानकारी दी गई। जिस पर इनके खिलाफ सदर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस के अनुसार इस मामले में ठेकेदार पवन बल्हारा को गिरफ्तार कर दो दिन की पुलिस रिमांड लेकर अदालत में पेश किया गया। जहां पर अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल भेज दिया है। एसडीओ विक्की कुमार व जेई विनोद ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी डाली थी। जिसे सुनाई के बाद अदालत ने खारिज कर दी है।
एसएचओ सदर ने बताया कि नगर निगम में गलत तरीके ढाई करोड़ के गबन का प्रयास करने के मामले में एक ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। जेई व एसडीओ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। पुलिस को फरार चल रहे आरोपियों की तलाश है।
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करीब डेढ़ माह पहले गृह राज्यमंत्री अनिल विज ने नगर निगम कार्यालय का निरीक्षण किया था। जहां पर ढाई करोड़ रुपये का गलत भुगतान कराने के प्रयास का मामला उनके संज्ञान में आया था। उसके बाद उनके आदेश पर सदर थाना पुलिस ने दो कार्यकारी इंजीनियर, एक एसडीओ, एक जेई के साथ तीन ठेकेदारों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया।
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पुलिस को निगामयुक्त की ओर से उन्हें बताया गया कि दो कार्यकारी अभियंता, एक एसडीओ व एक जेई ड्यूटी पर नहीं आ रहे हैं। पुलिस को अब तक की जांच में पता चला है कि पार्षदों के हस्ताक्षर कंप्यूटर से उठाकर बनाए गए हैं। जांच चल रही है कि आरोपी फर्जी बिल कैसे तैयार किया है।
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आरोप है कि कार्यकारी अभियंता पंकज सैनी, गोपाल कलावत, एसडीओ विक्की कुमार, जेई विनोद कुमार और नगर निगम के ठेकेदार दिलावर सिंह, राजकुमार और ठेकेदार पवन की करतूत के बारे में छह माह पहले ही खुलासा हो गया था। नगर निगम के अधिकारी उसे दबाना चाहते हैं। गृहमंत्री की ओर से की गई कार्रवाई के बाद उन्हें इसकी जानकारी दी गई। जिस पर इनके खिलाफ सदर थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज हुआ है।
पुलिस के अनुसार इस मामले में ठेकेदार पवन बल्हारा को गिरफ्तार कर दो दिन की पुलिस रिमांड लेकर अदालत में पेश किया गया। जहां पर अदालत ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भोंडसी जेल भेज दिया है। एसडीओ विक्की कुमार व जेई विनोद ने जिला अदालत में अग्रिम जमानत की अर्जी डाली थी। जिसे सुनाई के बाद अदालत ने खारिज कर दी है।
एसएचओ सदर ने बताया कि नगर निगम में गलत तरीके ढाई करोड़ के गबन का प्रयास करने के मामले में एक ठेकेदार को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। जेई व एसडीओ की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। पुलिस को फरार चल रहे आरोपियों की तलाश है।