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जेल लोक अदालत : विचाराधीन बंदियों को राहत
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भोंडसी जिला कारागार में छह बंदियों की रिहाई, कानूनी जागरूकता पर जोर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, गुरुग्राम की ओर से जिला कारागार, भोंडसी में जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष वाणी गोपाल शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार किया गया। कारागार का निरीक्षण करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव राकेश कादियान ने बताया कि जेल अदालत का उद्देश्य विचाराधीन बंदियों के मामलों का शीघ्र निपटारा करना है, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
इस दौरान छह विचाराधीन बंदियों को रिहा किया गया। कादियान ने बताया कि एक केस 2018 का भी था जिसमें दो बंदी थे, जिनका केस अंडरगोन किया गया। उन्होंने जेल का निरीक्षण भी किया और बंदियों को विधिक सहायता, अधिवक्ता की सुविधा और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
कादियान ने बताया कि बंदी एक साधारण प्रार्थना-पत्र के माध्यम से विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त अधिवक्ता की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बंदी परिवार से पैमाइश मुलाकात, महिला बंदियों की समस्याएं, चिकित्सीय सुविधा, साक्षरता, खेलकूद, स्वच्छता, रहन-सहन, खान-पान व अन्य कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए जेल प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि आपातकालीन राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 पर कॉल कर घर बैठे मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, जेल स्टाफ, पैनल अधिवक्ता व विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अन्य अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण, गुरुग्राम की ओर से जिला कारागार, भोंडसी में जेल लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन हरियाणा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण एवं अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष वाणी गोपाल शर्मा के दिशा-निर्देशानुसार किया गया। कारागार का निरीक्षण करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव राकेश कादियान ने बताया कि जेल अदालत का उद्देश्य विचाराधीन बंदियों के मामलों का शीघ्र निपटारा करना है, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
इस दौरान छह विचाराधीन बंदियों को रिहा किया गया। कादियान ने बताया कि एक केस 2018 का भी था जिसमें दो बंदी थे, जिनका केस अंडरगोन किया गया। उन्होंने जेल का निरीक्षण भी किया और बंदियों को विधिक सहायता, अधिवक्ता की सुविधा और कानूनी अधिकारों के बारे में जानकारी दी।
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कादियान ने बताया कि बंदी एक साधारण प्रार्थना-पत्र के माध्यम से विधिक सेवा प्राधिकरण से मुफ्त अधिवक्ता की सेवाएं प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने बंदी परिवार से पैमाइश मुलाकात, महिला बंदियों की समस्याएं, चिकित्सीय सुविधा, साक्षरता, खेलकूद, स्वच्छता, रहन-सहन, खान-पान व अन्य कानूनी समस्याओं के समाधान के लिए जेल प्रशासन को दिशा-निर्देश दिए।
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उन्होंने कहा कि आपातकालीन राष्ट्रीय कानूनी सहायता हेल्पलाइन 15100 पर कॉल कर घर बैठे मुफ्त कानूनी सहायता प्राप्त की जा सकती है। इस अवसर पर जेल अधीक्षक, उप अधीक्षक, जेल स्टाफ, पैनल अधिवक्ता व विधिक सेवा प्राधिकरण से जुड़े अन्य अधिकारी व अधिवक्ता मौजूद रहे।