Iskcon: सोहना रोड पर इस्कॉन गुरुग्राम मंदिर उद्घाटन के लिए है तैयार, भव्य समारोह 26 से 27 नवंबर तक
Iskcon: मंदिर के अध्यक्ष रामभद्र दास ने कहा, "मंदिर समाज के विभिन्न वर्गों को, किस प्रकार सदा खुश रहा जाए, यह ज्ञान प्रदान करेगा और परंपरा, ज्ञान और मस्ती का एक अनूठा मिश्रण सिद्ध होगा।"
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोहना रोड पर बादशाहपुर के पास इस्कॉन गुरुग्राम मंदिर के उद्घाटन की जबरदस्त तैयारियां हो रही हैं। हरियाणा के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे। उत्सव 26 नवंबर को शाम 6:00 बजे नेत्रोन्मीलन दर्शन (विग्रहों के नेत्र खोलने का समारोह) से शुरू होगा और 27 को प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव और महा-अभिषेक के साथ जारी रहेगा, जो प्रसाद-भंडारा के साथ समाप्त होगा।
मंदिर के अध्यक्ष रामभद्र दास ने कहा, "मंदिर समाज के विभिन्न वर्गों को, किस प्रकार सदा खुश रहा जाए, यह ज्ञान प्रदान करेगा और परंपरा, ज्ञान और मस्ती का एक अनूठा मिश्रण सिद्ध होगा।" उन्होंने बताा कि इस्कॉन जीबीसी के नेताओं, परम पूज्य गोपाल कृष्ण गोस्वामी, परम पूज्य लोकनाथ स्वामी और यूएस से परम पूज्य भक्ति ब्रिंग गोविंदा स्वामी की उपस्थिति भी इस समारोह में होगी।
उन्होंने बताया कि मंदिर में इस अवसर पर श्री श्री राधा दामोदर नाम से पुकारे जाने वाले सुंदर राधा-कृष्ण विग्रहों की शुभ स्थापना भी होगी। दो दिवसीय इस कार्यक्रम में लगभग 30,000 से ज्यादा श्रद्धालुयों की उपस्थिति होगी। इस अवसर पर कीर्तन मेला नामक एक विशेष कीर्तन उत्सव भी आयोजित किया जा रहा है और दुनियाभर से प्रसिद्ध इस्कॉन कीर्तन गायक शामिल हो रहे हैं, जिसमें व्रजवधुस बैंड के गौर मणि दासी भी शामिल हैं।
यह परिसर 2015 में एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, आचार्य सुदर्शन महाराज द्वारा इस्कॉन को दान किया गया था। वे इस्कॉन द्वारा विश्व स्तर पर वैदिक संस्कृति को साझा करने के अभूतपूर्व उपलब्धि से प्रेरित थे। परिसर तो तीन वर्षों की अवधि में पुनर्निर्मित किया गया है। अब एक महल जैसा दिखने वाला भवन, जो अद्भुत राजस्थानी वास्तुकला के साथ सुस्सजित है, निर्मित हुआ है। ये इसे गुरुग्राम शहर के लिए एक अद्वितीय सांस्कृतिक आकर्षण बनाता है।
मंदिर में जयपुर से विशेष रूप से आमंत्रित कारीगरों द्वारा हाथ से बनाई गई सुंदर राजस्थानी और नाथद्वारा पेंटिंग हैं। साथ ही, फर्श को मकराना के मार्बल से बनाया गया है, जो ताजमहल में इस्तेमाल किया गया था। मंदिर में सागौन की लकड़ी के दरवाजों पर बहुत विस्तृत काम किया गया है, जो जोधपुर, राजस्थान में बनाए गए हैं। यह मंदिर दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 30 मिनट की ड्राइव पर स्थित है।
वहीं मंदिर खुलने के बाद बच्चों से लेकर बड़ों तक के साथ-साथ कॉर्पोरेट कर्मचारियों, और समाज के सभी वर्गों के लिए तनाव-प्रबंधन, माइंडफुलनेस, रिश्तों और ध्यान पर सेमिनार और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। साथ ही, दैनिक आधार पर जरूरतमंदों को मुफ्त भोजन प्रसाद वितरण की सुविधाएं भी अधिक विस्तारित होंगी।