{"_id":"69de3f89b817b0b444007bd0","slug":"increase-in-wage-rate-is-a-challenge-for-msmes-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-84918-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: मजदूरी दर में वृद्धि एमएसएमई के लिए चुनौती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: मजदूरी दर में वृद्धि एमएसएमई के लिए चुनौती
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को लिखा पत्र
गुरुग्राम। गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (जीआईए) ने हरियाणा सरकार की ओर से अप्रैल 2026 से प्रस्तावित न्यूनतम मजदूरी में भारी वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में एसोसिएशन ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर इस विषय की गंभीरता की ओर ध्यान दिलाया है। एसोसिएशन के अनुसार, अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लगभग 11,257 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 15,220 रुपये प्रति माह किया जाना उद्योग जगत, विशेषकर सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई ) क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
जीआईए के अध्यक्ष सुमित राव ने कहा कि यह लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि है, जिससे प्रति कर्मचारी करीब 4,000 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ेगा। वर्तमान में कच्चे माल की लागत, बिजली दरों, परिवहन व्यय और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है, ऐसे में इस प्रकार की एकमुश्त मजदूरी वृद्धि उद्योगों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। निवर्तमान अध्यक्ष जेएन मंगला ने कहा कि मजदूरी वृद्धि का प्रभाव केवल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक देयताओं में वृद्धि के कारण प्रति कर्मचारी कुल लागत में लगभग 50-55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। सीमित मार्जिन पर काम करने वाले एमएसएमई पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा इस निर्णय से कई उद्योगों के बंद होने या अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे हरियाणा में रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। जीआईए ने पड़ोसी राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराकंड की न्यूनतम मजदूरी दरों की तुलना करते हुए बताया कि हरियाणा की लागू दरें उनसे काफी अधिक हैं, जिससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। जीआईए ने सरकार से मजदूरी दर में 10-15 प्रतिशत वृद्धि करने का सुझाव दिया है। संवाद
विज्ञापन
गुरुग्राम। गुड़गांव इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (जीआईए) ने हरियाणा सरकार की ओर से अप्रैल 2026 से प्रस्तावित न्यूनतम मजदूरी में भारी वृद्धि पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। इस संबंध में एसोसिएशन ने हरियाणा सरकार को पत्र लिखकर इस विषय की गंभीरता की ओर ध्यान दिलाया है। एसोसिएशन के अनुसार, अकुशल श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी को लगभग 11,257 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 15,220 रुपये प्रति माह किया जाना उद्योग जगत, विशेषकर सूक्ष्म, लघु व मध्यम उद्योग (एमएसएमई ) क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
जीआईए के अध्यक्ष सुमित राव ने कहा कि यह लगभग 35 प्रतिशत की वृद्धि है, जिससे प्रति कर्मचारी करीब 4,000 रुपये प्रति माह का अतिरिक्त वित्तीय भार बढ़ेगा। वर्तमान में कच्चे माल की लागत, बिजली दरों, परिवहन व्यय और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है, ऐसे में इस प्रकार की एकमुश्त मजदूरी वृद्धि उद्योगों की स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। निवर्तमान अध्यक्ष जेएन मंगला ने कहा कि मजदूरी वृद्धि का प्रभाव केवल वेतन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ईपीएफ, ईएसआई, बोनस, लीव इनकैशमेंट, ग्रेच्युटी और अन्य वैधानिक देयताओं में वृद्धि के कारण प्रति कर्मचारी कुल लागत में लगभग 50-55 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है। सीमित मार्जिन पर काम करने वाले एमएसएमई पर इसका बुरा प्रभाव पड़ेगा इस निर्णय से कई उद्योगों के बंद होने या अन्य राज्यों में स्थानांतरित होने की संभावना भी उत्पन्न हो सकती है, जिससे हरियाणा में रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। जीआईए ने पड़ोसी राज्यों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराकंड की न्यूनतम मजदूरी दरों की तुलना करते हुए बताया कि हरियाणा की लागू दरें उनसे काफी अधिक हैं, जिससे राज्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। जीआईए ने सरकार से मजदूरी दर में 10-15 प्रतिशत वृद्धि करने का सुझाव दिया है। संवाद
विज्ञापन