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भ्रष्टाचार से अर्जित कमाई आतंकी फंडिंग का मुख्य स्रोत : डॉ. जितेंद्र
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जी-20 सम्मेलन में आए प्रतिनिधियों के साथ केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह
जी-20 शिखर सम्मेलन की भ्रष्टाचार विरोधी कार्य समूह की बैठक में केंद्रीय मंत्री ने कहा
बोले जी-20 सम्मेलन की अध्यक्षता करना भारत के लिए गर्व की बात
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भ्रष्टाचार से अर्जित की गई आय आतंकी फंडिंग का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा इस तरह के धन का इस्तेमाल युवाओं को नशे का आदी बनाने, लोकतंत्र को कमजोर करने, मानव तस्करी, हथियारों की खरीद फरोख्त करने जैसी गतिविधियों में किया जाता है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत के लिए ऐसा तंत्र चाहते हैं, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए जीरो टोलरेंस नीति हो। यह बात केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक, लोक शिकायत राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही।
वह बुधवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के तहत आयोजित भ्रष्टाचार विरोधी कार्य समूह की पहली बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। होटल लीला एंबियंस में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कई बार आर्थिक अपराधी देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर चले जाते हैं। भारत ने इस संबंध में एक विशेष कानून भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम-2018 बनाया है। भ्रष्टाचारी व्यक्ति अपराध से अर्जित आय को ठिकाने लगाने का तरीका ढूंढते हैं, यह पैसा उस देश के नागरिकों का है। यह वह पैसा है, जिसका इस्तेमाल गलत कार्यों में किया जाता है। यह आतंकी फंडिंग के प्रमुख स्रोतों में से एक है।
उन्होंने कहा कि इनसे निपटने के लिए अलग-अलग कानूनी, प्रक्रिया और ढांचे हैं। हालांकि, वैश्विक समुदाय को जी-20 देशों के बीच सूचनाओं के सक्रिय आदान-प्रदान के माध्यम से संपत्ति की वसूली के लिए और भी तेज़ी से कार्य करने की आवश्यकता है। देश और विदेश दोनों जगह अगर अपराध से हुई कमाई या संपत्ति को तुरंत ही जब्त करने की व्यवस्था मजबूत हो तो अपराधी अपने देश लौटने को मजबूर होगा। ऐसा होने से प्रभावी जांच और जल्द सुनवाई में मदद मिलेगी।
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केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि बेहतर समन्वय, न्यायिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाने और मामलों को समय पर निपटाए जाने के लिए द्विपक्षीय समन्वय की जगह बहुपक्षीय कार्रवाई की जरूरत है। यह अधिक जटिल है। साथ ही भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों में उनकी संपत्ति वसूली के काम में बाधा पैदा करता है।
बैंकों ने 272 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेला
मंत्री ने कहा कि वित्तीय व बैंकिंग धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच कानूनी प्रावधान के तहत की गई। इन मामलों में हाई नेटवर्थ वाले लोग शामिल थे, जिनकी अपराध से कमाई लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक थी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने संपन्न व्यक्तियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कारण लगभग 272 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेला है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद ऐसे बैंकों को लगभग 180 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति हस्तांतरित की है।
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बोले जी-20 सम्मेलन की अध्यक्षता करना भारत के लिए गर्व की बात
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। भ्रष्टाचार से अर्जित की गई आय आतंकी फंडिंग का प्रमुख स्रोत है। इसके अलावा इस तरह के धन का इस्तेमाल युवाओं को नशे का आदी बनाने, लोकतंत्र को कमजोर करने, मानव तस्करी, हथियारों की खरीद फरोख्त करने जैसी गतिविधियों में किया जाता है। इसको देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विकसित भारत के लिए ऐसा तंत्र चाहते हैं, जिसमें भ्रष्टाचार के लिए जीरो टोलरेंस नीति हो। यह बात केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा कार्मिक, लोक शिकायत राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कही।
वह बुधवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के तहत आयोजित भ्रष्टाचार विरोधी कार्य समूह की पहली बैठक के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। होटल लीला एंबियंस में हुए इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कई बार आर्थिक अपराधी देश के अधिकार क्षेत्र से बाहर चले जाते हैं। भारत ने इस संबंध में एक विशेष कानून भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम-2018 बनाया है। भ्रष्टाचारी व्यक्ति अपराध से अर्जित आय को ठिकाने लगाने का तरीका ढूंढते हैं, यह पैसा उस देश के नागरिकों का है। यह वह पैसा है, जिसका इस्तेमाल गलत कार्यों में किया जाता है। यह आतंकी फंडिंग के प्रमुख स्रोतों में से एक है।
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उन्होंने कहा कि इनसे निपटने के लिए अलग-अलग कानूनी, प्रक्रिया और ढांचे हैं। हालांकि, वैश्विक समुदाय को जी-20 देशों के बीच सूचनाओं के सक्रिय आदान-प्रदान के माध्यम से संपत्ति की वसूली के लिए और भी तेज़ी से कार्य करने की आवश्यकता है। देश और विदेश दोनों जगह अगर अपराध से हुई कमाई या संपत्ति को तुरंत ही जब्त करने की व्यवस्था मजबूत हो तो अपराधी अपने देश लौटने को मजबूर होगा। ऐसा होने से प्रभावी जांच और जल्द सुनवाई में मदद मिलेगी।
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केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि बेहतर समन्वय, न्यायिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित बनाने और मामलों को समय पर निपटाए जाने के लिए द्विपक्षीय समन्वय की जगह बहुपक्षीय कार्रवाई की जरूरत है। यह अधिक जटिल है। साथ ही भगोड़े आर्थिक अपराधियों के मामलों में उनकी संपत्ति वसूली के काम में बाधा पैदा करता है।
बैंकों ने 272 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेला
मंत्री ने कहा कि वित्तीय व बैंकिंग धोखाधड़ी के कई मामले सामने आए हैं, जिनकी जांच कानूनी प्रावधान के तहत की गई। इन मामलों में हाई नेटवर्थ वाले लोग शामिल थे, जिनकी अपराध से कमाई लगभग एक अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक थी। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने संपन्न व्यक्तियों द्वारा की गई धोखाधड़ी के कारण लगभग 272 अरब अमेरिकी डॉलर का नुकसान झेला है। प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद ऐसे बैंकों को लगभग 180 अरब अमेरिकी डॉलर की संपत्ति हस्तांतरित की है।