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प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर पा रहे तो वापस करो जमीन
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
Updated Fri, 06 May 2016 03:16 PM IST
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा में जमीन आवंटन के एवज में बकाया जमा न कर पाने वाले आवंटियों को कर्ज से मुक्ति का एक मौका मिल सकता है। दोनों प्राधिकरण ‘एग्जिट पॉलिसी’ के जरिए आवंटियों को जितना पैसा जमा किया है, उतनी जमीन लेकर बाकी वापस करने का विकल्प देने पर विचार कर रहे हैं। प्रस्ताव यहां से जा चुका है। शासन में विचाराधीन है।
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दरअसल, नोएडा-ग्रेटर नोएडा में आवंटियों पर 20 हजार करोड़ रुपये बकाया है। मूल रकम के साथ ही ब्याज भी इसमें शामिल है। ज्यादातर रकम बिल्डरों पर बाकी है। बिल्डरों ने प्राधिकरणों से बड़ा प्लॉट ले लिया।
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कुछ बिल्डरों ने तीन-तीन सेक्टर ही अपने नाम करवा लिए। यूनिटेक के नाम आवंटित तीन सेक्टर-96, 97 व 98 इसका उदाहरण है। इनमें ज्यादातर आवासीय और व्यावसायिक जमीनें हैं। बिल्डर अब उसे विकसित नहीं कर पा रहे।
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छोटे से हिस्से को बना लिया, बाकी खाली पड़ा है। मंदी के कारण नए प्रोजेक्ट के लिए खरीदार भी कम ही मिल रहे हैं। एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे में लगा देने के कारण बिल्डरों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो गई है। उधर, बकाया किस्त जमा न करने पर ब्याज का बोझ भी बढ़ रहा है।
इस समस्या से निपटने के लिए दोनों प्राधिकरणों ने ‘एग्जिट पॉलिसी’ का एक ही प्रस्ताव तैयार कर प्रमुख सचिव उद्योग के पास भेजा है। सूत्र बताते हैं कि इस प्रस्ताव पर पहले दौर की बैठक भी हो चुकी है। हालांकि अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है। दूसरी बैठक जल्द ही संभावित है।
प्रस्ताव के मुताबिक, आवंटियों से जितना पैसा प्राधिकरणों को मिल चुका है, उसमें से करीब 10 फीसदी कटौती कर बाकी 90 फीसदी जमीन के हिसाब से जमीन आवंटी को दे दी जाएगी।
यह पॉलिसी सिर्फ बिल्डरों के लिए नहीं, बल्कि सभी आवंटियों के लिए होगी। साथ ही प्राधिकरण वही जमीन वापस लेंगे, जिस पर किसी तरह के प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं हुए हैं। यानी उसमें थर्ड पार्टी शामिल न हो।
सभी के लिए फायदेमंद
जानकार मानते हैं कि अगर शासन से इस पर हरी झंडी मिल गई तो बिल्डर, प्राधिकरण और खरीदार, तीनों के लिए राहत की बात होगी। जितना पैसा जमा है, उतनी जमीन लेकर बाकी वापस कर सकेगा, जिससे बिल्डर पर कर्ज खत्म हो जाएगा। प्राधिकरणों को नए आवंटनों के लिए जमीन मिल जाएगी। बड़े आवंटी न मिले तो छोटे आवंटियों को बेच सकेंगे। इससे फंड की कमी दूर हो जाएगी, दोनों शहरों की बड़ी परियोजनाओं को रोकना नहीं पड़ेगा। वहीं, इन दोनों शहरों में निवेश करने के इच्छुक लोगों को भी और मौका मिल सकेगा।
खरीदारों के दबाव से बनी पॉलिसी
पिछले करीब एक माह से नोएडा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में फ्लैट खरीदार बिल्डरों के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। सीएम से लेकर पीएम तक मामले पहुंच चुके हैं। संसद में भी बात गूंज चुकी है कि बिल़्डर मनमानी कर रहे हैं और खरीदारों को पजेशन नहीं मिल पा रहा है।
किराया और बैंक का कर्ज दोनों देने पड़ रहे हैं। बिल्डरों ने जितनी जमीन चाही, उतनी ले ली, लेकिन प्रॉपर्टी बाजार में छाई मंदी के कारण प्रोजेक्ट पूरे नहीं हो सके। इसका एक कारण यह भी रहा कि डिमांड से ज्यादा बाजार में फ्लैटों का उपलब्ध होना है।
प्राधिकरण के पास हो जाएगा लैंड बैंक
नोएडा के पास लैंड बैंक नाममात्र का ही बचा है। अगर जमीन वापस हो जाती है, तो प्राधिकरण मौजूदा दर पर बेच सकेगा। नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने का मौका मिलेगा। मेट्रो, एलिवेटेड रोड, अंडरपास समेत प्रोजेक्ट के लिए पैसा भी प्राधिकरण को मिल सकेगा।
जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को प्लॉट भी देने हैं। माना जा रहा है कि यदि जमीन वापस मिली, तो एक बार फिर प्राधिकरण की रफ्तार तेज हो जाएगी।जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया फिलहाल नोएडा-ग्रेटर नोएडा में नहीं हो पा रही है।