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चार साल में कैसे जर्जर हो गई एनबीसीसी ग्रीन व्यू की इमारतें
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गुरुग्राम। सेक्टर-37सी स्थित एनबीसीसी ग्रीन व्यू सोसाइटी में इमारतों के जर्जर होने की रिपोर्ट दिखाकर निवासियों से रखरखाव करने तक फ्लैटों को खाली करने का नोटिस देने के बाद यहां के निवासी बिल्डर व संबंधित विभागों से सवाल कर रहे हैं। उनका कहना है कि आखिर इमारतें चार साल में ही कैसे जर्जर हो गईं। अगर निर्माण कार्यों में मानक पूरे नहीं थे तो यहां टावरों और फ्लैट को ऑक्यूपेशन सर्टीफिकेट ( ओसी) कैसे मिलते चले गए।
एनबीसीसी के बिल्डर द्वारा 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस में सेक्टर-37डी के एनबीसीसी ग्रीन व्यू में रह रहे सभी 100 सामान्य व 100 ईडब्लयूएस परिवारों को अपने फ्लैटों को खाली करने के लिए कहा जा चुका है। सोसाइटी की इमारतों के घटिया निर्माण की जांच आईआईटी दिल्ली से कराई गई है, जिसमें पता चला है कि यह इमारतें रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में यहां कोई हादसा हो इससे पहले निवासियों को इसे छोड़ देना ही बेहतर है।
अब यहां रह रहे लोगों का यह सवाल है कि 2017 में बनी इस सोसाइटी की इमारतें चार साल में ही जर्जर कैसे हो गईं। डिस्ट्रिक्ट टाउन एंड प्लानिंग ( डीटीपी) विभाग ने यहां चल रहे निर्माण कार्यों की उस समय जांच क्यों नहीं की। क्या जल्दबाजी में ओसी जारी कर दी गई। निवासी इसे लेकर डीटीपी विभाग को पत्र लिख रहे हैं। वहीं फ्लैट्स खाली करनो की स्थिति में बिल्डर से खरीद की रकम ब्याज सहित लौटाने की मांग भी कर रहे हैं।
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नोटिस रद करने पर अड़े लोग
सोसाइटी के लोग बिल्डर द्वारा फ्लैट खाली कराने के लिए 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस को रद कराने को लेकर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो फिर 15 प्रतिशत ब्याज के साथ फ्लैटों की खरीद रकम और लोगों द्वारा अपने फ्लैटों में कराई गई इंटीरियर डिजाइनिंग की लागत लौटाई जाए। वहीं, फ्लैट खाली करके निवासियों को जो परेशानी व प्रताड़ना झेलनी पड़े उसकी भरपाई की जाए।
निवासियों की ओर से शिकायत मिलते ही सोसाइटी में निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी। प्रत्येक निवासी को परेशान होने से बचाया जाएगा।
- संजीव मान, सीनियर टाउन प्लानर
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एनबीसीसी के बिल्डर द्वारा 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस में सेक्टर-37डी के एनबीसीसी ग्रीन व्यू में रह रहे सभी 100 सामान्य व 100 ईडब्लयूएस परिवारों को अपने फ्लैटों को खाली करने के लिए कहा जा चुका है। सोसाइटी की इमारतों के घटिया निर्माण की जांच आईआईटी दिल्ली से कराई गई है, जिसमें पता चला है कि यह इमारतें रहने लायक नहीं हैं। ऐसे में यहां कोई हादसा हो इससे पहले निवासियों को इसे छोड़ देना ही बेहतर है।
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अब यहां रह रहे लोगों का यह सवाल है कि 2017 में बनी इस सोसाइटी की इमारतें चार साल में ही जर्जर कैसे हो गईं। डिस्ट्रिक्ट टाउन एंड प्लानिंग ( डीटीपी) विभाग ने यहां चल रहे निर्माण कार्यों की उस समय जांच क्यों नहीं की। क्या जल्दबाजी में ओसी जारी कर दी गई। निवासी इसे लेकर डीटीपी विभाग को पत्र लिख रहे हैं। वहीं फ्लैट्स खाली करनो की स्थिति में बिल्डर से खरीद की रकम ब्याज सहित लौटाने की मांग भी कर रहे हैं।
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नोटिस रद करने पर अड़े लोग
सोसाइटी के लोग बिल्डर द्वारा फ्लैट खाली कराने के लिए 13 अक्तूबर को जारी किए गए नोटिस को रद कराने को लेकर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि अगर ऐसा नहीं हो सकता तो फिर 15 प्रतिशत ब्याज के साथ फ्लैटों की खरीद रकम और लोगों द्वारा अपने फ्लैटों में कराई गई इंटीरियर डिजाइनिंग की लागत लौटाई जाए। वहीं, फ्लैट खाली करके निवासियों को जो परेशानी व प्रताड़ना झेलनी पड़े उसकी भरपाई की जाए।
निवासियों की ओर से शिकायत मिलते ही सोसाइटी में निर्माण कार्यों की जांच की जाएगी। प्रत्येक निवासी को परेशान होने से बचाया जाएगा।
- संजीव मान, सीनियर टाउन प्लानर