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Gurugram News: जलभराव पर मानवाधिकार आयोग सख्त, गुरुग्राम का होगा व्यापक तकनीकी ऑडिट
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आयोग ने अगस्त 2026 की रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की
अगली सुनवाई 15 दिसंबर, 2026 को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम में बार-बार होने वाले गंभीर जलभराव, यातायात व्यवस्था ठप होने, आवश्यक सेवाओं में व्यवधान और स्कूली बच्चों सहित नागरिकों को होने वाली कठिनाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक तकनीकी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।
आयोग ने अगस्त 2026 की समाचार रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने कहा कि यह स्थिति केवल भारी वर्षा के कारण उत्पन्न अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि यह गुरुग्राम के कई क्षेत्रों में शहरी बाढ़ और अपर्याप्त नागरिक बुनियादी ढांचे की बार-बार की समस्या को दर्शाती है। 24 अगस्त 2026 को हुई लगभग 75 मिलीमीटर बारिश के कारण सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड, एनएच-48, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और पुराने गुरुग्राम सहित शहर के कई हिस्सों में व्यापक जलभराव हुआ।
इस जलभराव के कारण न केवल यातायात व्यवस्था बाधित हुई, बल्कि स्कूली बच्चों को भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्कूल बसें घंटों फंसी रहीं और बच्चों को सामान्य छुट्टी के समय के कई घंटे बाद तक घर पहुंचने में परेशानी हुई। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुग्राम जैसे प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्र का नागरिक बुनियादी ढांचा इसकी जनसंख्या और गतिविधियों के अनुरूप होना चाहिए।
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सड़क ढांचे का एकीकृत आकलन जरूरी
आयोग ने इफ्को चौक के पास सर्विस रोड के एक हिस्से के धंसने और भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन से जुड़े नुकसान या रिसाव की रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया। आयोग ने कहा कि बारिश के पानी की निकासी, सीवरेज नेटवर्क, जलापूर्ति पाइप लाइन, भूमिगत यूटिलिटी और सड़क ढांचे का एकीकृत आकलन जरूरी है। इसके अलावा प्रमुख जलापूर्ति पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद कई सेक्टरों में पानी की आपूर्ति बाधित होने की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया गया।
99 जलभराव वाले स्थानों की होगी जांच
आयोग ने प्राकृतिक नालों, पारंपरिक जलमार्गों, तालाबों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का वैज्ञानिक मानचित्रण कराने के निर्देश दिए हैं। स्थायी और बार-बार जलभराव वाले स्थानों की पहचान की जाएगी, जिसमें अधिकारियों द्वारा चिन्हित 99 स्थान भी शामिल हैं। प्रत्येक स्थान पर जलभराव के कारणों के साथ नालों, कल्वर्ट, पंपिंग स्टेशन और आउटफॉल की क्षमता का आकलन किया जाएगा। आयोग ने गुरुग्राम के लिए एकीकृत सिटी-वाइड सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर रिवैंपिंग प्लान तैयार करने पर भी जोर दिया है।
आयोग द्वारा निर्देशित उपाय
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गुरुग्राम के उपायुक्त, नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से शहर की वर्षा जल निकासी प्रणाली और संबंधित नागरिक बुनियादी ढांचे का विस्तृत तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें मौजूदा नेटवर्क की क्षमता, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान, जलभराव वाले स्थानों के कारण, नालियों, कल्वर्टों, पंपिंग स्टेशनों की स्थिति, और भूमिगत पाइप लाइनों की संवेदनशीलता का आकलन शामिल होगा। सभी प्राकृतिक और इंजीनियर्ड जल निकासी चैनलों का जीआईएस धारित मानचित्र तैयार किया जाएगा और अतिक्रमण की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। भारी वर्षा के दौरान स्कूल परिवहन के संबंध में जारी एसओपी के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें स्कूल बसों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट और बच्चों को निकालने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल शामिल होंगे। जल निकासी प्रणाली के प्रत्येक घटक की योजना, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार विभागों व एजेंसियों की पहचान की जाएगी। इस मामले की तकनीकी जटिलता को देखते हुए किसी प्रतिष्ठित संस्थान से स्वतंत्र तकनीकी आकलन प्राप्त करने पर विचार किया जाएगा।
ऑडिट में विशेष रूप से निम्नलिखित की पहचान की जाएगी
- मौजूदा संपूर्ण वर्षा जल निकासी नेटवर्क तथा उसकी जल वहन क्षमता।
- सभी प्राकृतिक नालों, पारंपरिक जलमार्गों, तालाबों, निचले क्षेत्रों, बाढ़ मार्गों तथा प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान, जिनमें वे मार्ग भी शामिल होंगे, जिन्हें परिवर्तित, संकरा, अवरुद्ध अथवा ढक दिया गया है।
- सभी स्थायी/बार-बार जलभराव वाले स्थानों की पहचान, जिनमें अधिकारियों द्वारा कथित रूप से चिन्हित 99 स्थान भी शामिल हैं।
- प्रत्येक चिन्हित स्थान पर जलभराव के कारणों की पहचान।
- मौजूदा नालियों, कल्वर्टों, पंपिंग स्टेशनों तथा आउटफॉल्स की स्थिति एवं क्षमता।
- वे स्थान जहां वर्षा जल निकासी एवं सीवरेज व्यवस्था आपस में जुड़ी हुई हो सकती है अथवा रिसाव व बैकफ्लो से प्रभावित हो सकती है।
- भूमिगत जलापूर्ति, सीवरेज तथा अन्य उपयोगिता पाइप लाइनों की स्थिति एवं उनकी संवेदनशीलता।
- सड़क की ऊंचाई, ढलान, कैरिज्वे ड्रेनेज, अंडरपास तथा जलभराव को बढ़ाने वाले अथवा उससे प्रभावित होने वाले अन्य ढांचों का आकलन।
- ऐसे स्थान जहां मौजूदा जल निकासी व्यवस्था में विस्तार, पुनर्निर्माण, प्रतिस्थापन अथवा नई जल निकासी अवसंरचना के निर्माण की आवश्यकता है।
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अगली सुनवाई 15 दिसंबर, 2026 को होगी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने गुरुग्राम में बार-बार होने वाले गंभीर जलभराव, यातायात व्यवस्था ठप होने, आवश्यक सेवाओं में व्यवधान और स्कूली बच्चों सहित नागरिकों को होने वाली कठिनाइयों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आयोग ने इस समस्या के समाधान के लिए व्यापक तकनीकी ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर, 2026 को निर्धारित की गई है।
आयोग ने अगस्त 2026 की समाचार रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई की। जस्टिस ललित बत्रा की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने कहा कि यह स्थिति केवल भारी वर्षा के कारण उत्पन्न अस्थायी समस्या नहीं है, बल्कि यह गुरुग्राम के कई क्षेत्रों में शहरी बाढ़ और अपर्याप्त नागरिक बुनियादी ढांचे की बार-बार की समस्या को दर्शाती है। 24 अगस्त 2026 को हुई लगभग 75 मिलीमीटर बारिश के कारण सुभाष चौक, राजीव चौक, नरसिंहपुर, इफको चौक, सोहना रोड, शीतला माता रोड, एनएच-48, दिल्ली-गुरुग्राम एक्सप्रेसवे और पुराने गुरुग्राम सहित शहर के कई हिस्सों में व्यापक जलभराव हुआ।
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इस जलभराव के कारण न केवल यातायात व्यवस्था बाधित हुई, बल्कि स्कूली बच्चों को भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कई स्कूल बसें घंटों फंसी रहीं और बच्चों को सामान्य छुट्टी के समय के कई घंटे बाद तक घर पहुंचने में परेशानी हुई। एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। आयोग ने इस बात पर जोर दिया कि गुरुग्राम जैसे प्रमुख शहरी और आर्थिक केंद्र का नागरिक बुनियादी ढांचा इसकी जनसंख्या और गतिविधियों के अनुरूप होना चाहिए।
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सड़क ढांचे का एकीकृत आकलन जरूरी
आयोग ने इफ्को चौक के पास सर्विस रोड के एक हिस्से के धंसने और भूमिगत सीवरेज पाइप लाइन से जुड़े नुकसान या रिसाव की रिपोर्ट को भी गंभीरता से लिया। आयोग ने कहा कि बारिश के पानी की निकासी, सीवरेज नेटवर्क, जलापूर्ति पाइप लाइन, भूमिगत यूटिलिटी और सड़क ढांचे का एकीकृत आकलन जरूरी है। इसके अलावा प्रमुख जलापूर्ति पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने के बाद कई सेक्टरों में पानी की आपूर्ति बाधित होने की रिपोर्ट का भी संज्ञान लिया गया।
99 जलभराव वाले स्थानों की होगी जांच
आयोग ने प्राकृतिक नालों, पारंपरिक जलमार्गों, तालाबों और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का वैज्ञानिक मानचित्रण कराने के निर्देश दिए हैं। स्थायी और बार-बार जलभराव वाले स्थानों की पहचान की जाएगी, जिसमें अधिकारियों द्वारा चिन्हित 99 स्थान भी शामिल हैं। प्रत्येक स्थान पर जलभराव के कारणों के साथ नालों, कल्वर्ट, पंपिंग स्टेशन और आउटफॉल की क्षमता का आकलन किया जाएगा। आयोग ने गुरुग्राम के लिए एकीकृत सिटी-वाइड सिविक इंफ्रास्ट्रक्चर रिवैंपिंग प्लान तैयार करने पर भी जोर दिया है।
आयोग द्वारा निर्देशित उपाय
गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, गुरुग्राम के उपायुक्त, नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त और अन्य संबंधित विभागों के समन्वय से शहर की वर्षा जल निकासी प्रणाली और संबंधित नागरिक बुनियादी ढांचे का विस्तृत तकनीकी ऑडिट कराया जाएगा। इसमें मौजूदा नेटवर्क की क्षमता, प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान, जलभराव वाले स्थानों के कारण, नालियों, कल्वर्टों, पंपिंग स्टेशनों की स्थिति, और भूमिगत पाइप लाइनों की संवेदनशीलता का आकलन शामिल होगा। सभी प्राकृतिक और इंजीनियर्ड जल निकासी चैनलों का जीआईएस धारित मानचित्र तैयार किया जाएगा और अतिक्रमण की पहचान कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। भारी वर्षा के दौरान स्कूल परिवहन के संबंध में जारी एसओपी के क्रियान्वयन पर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिसमें स्कूल बसों की रियल-टाइम ट्रैकिंग, सुरक्षित होल्डिंग प्वाइंट और बच्चों को निकालने के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल शामिल होंगे। जल निकासी प्रणाली के प्रत्येक घटक की योजना, निर्माण, संचालन और रखरखाव के लिए जिम्मेदार विभागों व एजेंसियों की पहचान की जाएगी। इस मामले की तकनीकी जटिलता को देखते हुए किसी प्रतिष्ठित संस्थान से स्वतंत्र तकनीकी आकलन प्राप्त करने पर विचार किया जाएगा।
ऑडिट में विशेष रूप से निम्नलिखित की पहचान की जाएगी
- मौजूदा संपूर्ण वर्षा जल निकासी नेटवर्क तथा उसकी जल वहन क्षमता।
- सभी प्राकृतिक नालों, पारंपरिक जलमार्गों, तालाबों, निचले क्षेत्रों, बाढ़ मार्गों तथा प्राकृतिक जल निकासी मार्गों की पहचान, जिनमें वे मार्ग भी शामिल होंगे, जिन्हें परिवर्तित, संकरा, अवरुद्ध अथवा ढक दिया गया है।
- सभी स्थायी/बार-बार जलभराव वाले स्थानों की पहचान, जिनमें अधिकारियों द्वारा कथित रूप से चिन्हित 99 स्थान भी शामिल हैं।
- प्रत्येक चिन्हित स्थान पर जलभराव के कारणों की पहचान।
- मौजूदा नालियों, कल्वर्टों, पंपिंग स्टेशनों तथा आउटफॉल्स की स्थिति एवं क्षमता।
- वे स्थान जहां वर्षा जल निकासी एवं सीवरेज व्यवस्था आपस में जुड़ी हुई हो सकती है अथवा रिसाव व बैकफ्लो से प्रभावित हो सकती है।
- भूमिगत जलापूर्ति, सीवरेज तथा अन्य उपयोगिता पाइप लाइनों की स्थिति एवं उनकी संवेदनशीलता।
- सड़क की ऊंचाई, ढलान, कैरिज्वे ड्रेनेज, अंडरपास तथा जलभराव को बढ़ाने वाले अथवा उससे प्रभावित होने वाले अन्य ढांचों का आकलन।
- ऐसे स्थान जहां मौजूदा जल निकासी व्यवस्था में विस्तार, पुनर्निर्माण, प्रतिस्थापन अथवा नई जल निकासी अवसंरचना के निर्माण की आवश्यकता है।