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मरीज का शव देने से अस्पताल का इनकार, सीएमओ को दी शिकायत
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गुरुग्राम। इलाज के दौरान मौत होने के बाद नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव देने के बदले 9 लाख रुपये की मांग करने का मामला सामने आया है। मृतक के परिजन अस्पताल प्रबंधन को 16.52 लाख रुपये में से करीब सवा 7 लाख रुपये जमा करा चुके थे। परिजनों ने मामले की शिकायत जब सिविल सर्जन से की तो अस्पताल प्रबंधन ने मौत के 7 घंटे बाद आनन-फानन में शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन इलाज के दौरान ना तो दिए गए उपचार की जानकारी दे रहा था और न ही बिल की जानकारी दी जा रही थी। इलाज के दौरान प्रबंधन केवल उनसे रुपयों की मांग करता रहा।
पहले सत्यम अस्पताल में किया था भर्ती :
पटौदी निवासी मृतक के चचेरे भाई प्रदीप ने बताया कि पटौदी निवासी 38 वर्षीय मनोज पेशे से ऑटो चालक थे। मनोज को डेढ़ माह पहले पेट में दर्द के साथ ही पाचन क्रिया में समस्या होने लगी। इसके बाद परिजन उनको 8 मार्च को डीएलएफ फेज-1 स्थित सत्यम अस्पताल ले गए। जहां मरीज को आंतों में सूजन होने की बात कहकर भर्ती कर लिया गया। अस्पताल ने परिजनों को महज 45 हजार रुपये में इलाज कर ठीक कर देने का आश्वासन देकर मरीज को 8 मार्च को भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती गई। अंत में सत्यम अस्पताल ने 20 मार्च को आईसीयू में भर्ती कराने की बात कहकर इलाज से हाथ खड़े कर दिए। इस दौरान अस्पताल का बिल 2 लाख से ज्यादा का बन चुका था।
अस्पताल कर रहा 9 लाख 32 हजार रुपये की मांग :
सत्यम अस्पताल द्वारा इलाज को लेकर जवाब दिए जाने पर परिजन मरीज को लेकर डीएलएफ फेज-3 स्थित नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल पहुंचे, जहां 20 मार्च को मरीज को भर्ती किया गया। इलाज के दौरान मरीज की आंत में सूजन व उसके बाद पूरे शरीर में संक्रमण की बात सामने आई। परिजनों के मुताबिक एक माह तक नारायणा अस्पताल के आईसीयू में मरीज का इलाज चलने के बाद 21 अप्रैल सुबह 11:30 बजे मरीज की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक वह इलाज के नाम पर अस्पताल के 7 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान कर चुके थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उनसे 9 लाख 32 हजार रुपये और जमा कराने पर ही मृतक का शव देने की बात कही। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के सामने बहुत आरजू मिन्नतें की, लेकिन अस्पताल ने शव देने से साफ इनकार कर दिया।
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अस्पताल का पक्ष :
नारायणा अस्पताल पैसों के लिए किसी भी परिजन को परेशान नहीं करता है। हमें जैसे ही पता चला कि मृतक के परिजनों के पास पैसे नहीं हैं तो हमने पूरा बकाया करीब 9 लाख रुपये माफ करते हुए परिजनों को शव सौंप दिया। यहां तक कि परिजनों ने इलाज का पूरा खर्च देने के बाद ही शव लेने का अंडरटेकिंग भी दिया था, बावजूद हमने बिना पैसा लिए परिजनों को शव सौंप दिया।
- कमांडर नवनीत बाली, क्षेत्रीय निदेशक, नारायणा अस्पताल समूह
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पहले सत्यम अस्पताल में किया था भर्ती :
पटौदी निवासी मृतक के चचेरे भाई प्रदीप ने बताया कि पटौदी निवासी 38 वर्षीय मनोज पेशे से ऑटो चालक थे। मनोज को डेढ़ माह पहले पेट में दर्द के साथ ही पाचन क्रिया में समस्या होने लगी। इसके बाद परिजन उनको 8 मार्च को डीएलएफ फेज-1 स्थित सत्यम अस्पताल ले गए। जहां मरीज को आंतों में सूजन होने की बात कहकर भर्ती कर लिया गया। अस्पताल ने परिजनों को महज 45 हजार रुपये में इलाज कर ठीक कर देने का आश्वासन देकर मरीज को 8 मार्च को भर्ती कर लिया। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान मरीज की हालत दिन-प्रतिदिन बिगड़ती गई। अंत में सत्यम अस्पताल ने 20 मार्च को आईसीयू में भर्ती कराने की बात कहकर इलाज से हाथ खड़े कर दिए। इस दौरान अस्पताल का बिल 2 लाख से ज्यादा का बन चुका था।
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अस्पताल कर रहा 9 लाख 32 हजार रुपये की मांग :
सत्यम अस्पताल द्वारा इलाज को लेकर जवाब दिए जाने पर परिजन मरीज को लेकर डीएलएफ फेज-3 स्थित नारायणा सुपरस्पेशिलिटी अस्पताल पहुंचे, जहां 20 मार्च को मरीज को भर्ती किया गया। इलाज के दौरान मरीज की आंत में सूजन व उसके बाद पूरे शरीर में संक्रमण की बात सामने आई। परिजनों के मुताबिक एक माह तक नारायणा अस्पताल के आईसीयू में मरीज का इलाज चलने के बाद 21 अप्रैल सुबह 11:30 बजे मरीज की मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक वह इलाज के नाम पर अस्पताल के 7 लाख 20 हजार रुपये का भुगतान कर चुके थे, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उनसे 9 लाख 32 हजार रुपये और जमा कराने पर ही मृतक का शव देने की बात कही। मृतक के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन के सामने बहुत आरजू मिन्नतें की, लेकिन अस्पताल ने शव देने से साफ इनकार कर दिया।
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अस्पताल का पक्ष :
नारायणा अस्पताल पैसों के लिए किसी भी परिजन को परेशान नहीं करता है। हमें जैसे ही पता चला कि मृतक के परिजनों के पास पैसे नहीं हैं तो हमने पूरा बकाया करीब 9 लाख रुपये माफ करते हुए परिजनों को शव सौंप दिया। यहां तक कि परिजनों ने इलाज का पूरा खर्च देने के बाद ही शव लेने का अंडरटेकिंग भी दिया था, बावजूद हमने बिना पैसा लिए परिजनों को शव सौंप दिया।
- कमांडर नवनीत बाली, क्षेत्रीय निदेशक, नारायणा अस्पताल समूह