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Gurugram News: हरेरा ने एलन बिल्डर को दिया दुकान देने का आदेश
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शिकायतकर्ता ने सेक्टर-84 स्थित एलन मिरेकल परियोजना में बुक कराई थी दुकान
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने एलन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है सेक्टर-84 स्थित एलन मिरेकल परियोजना में शिकायतकर्ता को वाणिज्यिक दुकान उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए।
आजाद नगर कुरुक्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता मंदीप व सुमन लता ने एलन मिरेकल परियोजना में यूनिट संख्या जी-062 दुकान अक्तूबर 2017 में बुक कराई थी। इस यूनिट की बिक्री मूल्य 60 लाख रुपये में तय हुई थी। उन्होंने ने 58 लाख रुपये का भुगतान किया है। दोनों ने दुकान को स्पेशल फिक्स्ड रिटर्न पेमेंट प्लान के तहत बुक किया था। इसमें 30 सितंबर 2018 की समय-सीमा खत्म होने के बाद पक्का रिटर्न देने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिल्डर ने यह कहकर रुपये देने से मना कर दिया कि दुकान का फिजिकल पजेशन लेते समय उनका पक्का रिटर्न एडजस्ट कर दिया जाएगा।
आरोप है कि बिल्डर ने शिकायतकर्ताओं की पूर्व सहमति के बिना मनमाने और गैरकानूनी तरीके से दुकान का क्षेत्रफल 360 वर्ग फीट से घटाकर 347 वर्ग फीट कर दिया है और 10,25,905 रुपये की मांग भी की। हरेरा ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील को सुना। शर्तों के मुताबिक ओरिजिनल अलॉटी को हर महीने 13,913/- (लागू होने वाले टैक्स काटकर) की फिक्स्ड रकम देने का वादा किया था। प्राधिकरण के अनुसान पजेशन में देरी के चार्ज का कोई मामला नहीं बनता। हरेरा ने बिल्डर को 21 फरवरी 2019 के एग्रीमेंट के हिसाब से पजेशन देने, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज के पेमेंट पर यूनिट की रजिस्ट्री कराने निर्देश दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने एलन बिल्डकॉन प्राइवेट लिमिटेड को आदेश दिया है सेक्टर-84 स्थित एलन मिरेकल परियोजना में शिकायतकर्ता को वाणिज्यिक दुकान उपलब्ध कराई जाए। इसके लिए कोई अतिरिक्त शुल्क न लिया जाए।
आजाद नगर कुरुक्षेत्र निवासी शिकायतकर्ता मंदीप व सुमन लता ने एलन मिरेकल परियोजना में यूनिट संख्या जी-062 दुकान अक्तूबर 2017 में बुक कराई थी। इस यूनिट की बिक्री मूल्य 60 लाख रुपये में तय हुई थी। उन्होंने ने 58 लाख रुपये का भुगतान किया है। दोनों ने दुकान को स्पेशल फिक्स्ड रिटर्न पेमेंट प्लान के तहत बुक किया था। इसमें 30 सितंबर 2018 की समय-सीमा खत्म होने के बाद पक्का रिटर्न देने का वादा किया था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। बिल्डर ने यह कहकर रुपये देने से मना कर दिया कि दुकान का फिजिकल पजेशन लेते समय उनका पक्का रिटर्न एडजस्ट कर दिया जाएगा।
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आरोप है कि बिल्डर ने शिकायतकर्ताओं की पूर्व सहमति के बिना मनमाने और गैरकानूनी तरीके से दुकान का क्षेत्रफल 360 वर्ग फीट से घटाकर 347 वर्ग फीट कर दिया है और 10,25,905 रुपये की मांग भी की। हरेरा ने दोनों पक्षों के वकीलों की दलील को सुना। शर्तों के मुताबिक ओरिजिनल अलॉटी को हर महीने 13,913/- (लागू होने वाले टैक्स काटकर) की फिक्स्ड रकम देने का वादा किया था। प्राधिकरण के अनुसान पजेशन में देरी के चार्ज का कोई मामला नहीं बनता। हरेरा ने बिल्डर को 21 फरवरी 2019 के एग्रीमेंट के हिसाब से पजेशन देने, स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज के पेमेंट पर यूनिट की रजिस्ट्री कराने निर्देश दिया है।
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