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Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Hard-earned money was defrauded from all over the country, money came into open bank accounts in Gurugram.

Gurugram News: देश भर से ठगी गई खून-पसीने की कमाई, गुरुग्राम में खुले बैंक खातों में रकम आई

Fri, 01 Mar 2024 12:31 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Fri, 01 Mar 2024 12:31 AM IST
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Hard-earned money was defrauded from all over the country, money came into open bank accounts in Gurugram.
साइबर ठगों से निजी बैंक के सहायक प्रबधंक और उप प्रबंधकों की मिलीभगत का मामला
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अब तक दो हजार से ज्याद खुलवा चुके हैं खाते, 80 से ज्यादा खातों में आई ठगी की रकम

अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मिनी जामताड़ा बनते जा रहे नूंह के साबइर ठगों ने देश भर से लोगों की खून पसीने की कमाई को ठगा। करोडों में की गई ठगी की इस रकम को साइबर ठगों ने जिन खातों में ट्रांसफर कराया था, उनमें से ज्यादातर गुरुग्राम स्थित निजी क्षेत्र के बैंकों में खुले थे। खास बात यह है कि जिन लोगों के नाम से इन बैंक खातों को खोला गया था, उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं है। विगत दिनों पुलिस द्वारा एक साइबर ठग समेत एमजी रोड स्थित कोटक महिंद्रा बैंक के तीन अधिकारियों को गिरफ्तार किए जाने के बाद इस घटना से पर्दा अब उठने लगा है।
निजी क्षेत्र के बैंक प्रबंधकों द्वारा साइबर ठगों से मिलाए गए हाथ के मामले में पुलिस को काफी अहम सुराग हाथ लगे हैं। आरोपियों द्वारा अब तक करीब दो हजार खातों के खुलवाए जाने की बात सामने आई है। इनमें से 80 से ज्यादा ऐसे खाते मिले हैं, जिनमें ठगी की रकम का ट्रांसफर होना पाया गया है। इन खातों को आरोपी नूंह के साइबर ठगों को बीस-बीस हजार रुपये में बेच दिया जाता था। बैंक प्रबंधकों और साइबर ठगों के बीच कड़ी का काम करने वाला हयात नामक आरोपी भी इन तीनों बैंक अधिकारियों के साथ ही पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है।
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आठ माह पहले ही ज्वाइन किया था कोटेक महिंद्रा बैंक:
पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपी कोटेक महिंद्रा बैंक के सहायक प्रबंधक मोहित राठी और दोनों उप प्रबंधक महेश कुमार व विश्वकर्मा मौर्या कोटेक महिंद्रा बैंक में करीब आठ माह पहले ही आए थे। इससे पहले महेश नियो बैंक, विश्वकर्मा मौर्या स्माल फाइनेंस बैंक और मोहित एक्सिस बैंक में काम करता था। इसके बाद तीनों ने एक के बाद एक एमजी रोड स्थित कोटेक महिंद्रा की बैंक शाखा में नौकरी कर ली।
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कई अन्य बैंकों के खातों की भी हो रही जांच:
पुलिस की माने तो चारों आरोपी पहले से ही एक दूसरे से परिचित हैं। नूंह में रहने वाले ठग हयात से उनकी जानकारी करीब एक साल से है। उस समय आरोपी तीनों बैंक अधिकारी अलग-अलग बैंक शाखाओं में कार्यरत थे। पुलिस का मानना है कि आरोपियों ने कोटेक महिंद्रा बैंक के अलावा अन्य बैंकों में भी ऐसे ही फर्जी बैंक एकाउंट खुलवाए होंगे।
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ठगी की रकम के लिए निशाने पर रहता था श्रमिक वर्ग:
ऑनलाइन ठगी की रकम को ट्रांसफर कराने के लिए इन आरोपियों की नजर में हमेशा ही श्रमिक वर्ग के लोग रहते थे। ऐसे लोगों को भरोसे में लेकर इन खातों को खोला जाता था। फिर उनकी चेकबुक, डेबिटकार्ड संबंधी किट आरोपी बैंक प्रबंधकों ने अपने प्रभाव से अपने ही पास रख लेते थे। ज्यादातर मामलों में श्रमिकों को बाद में यह बता दिया गया कि उनके कागजों में कमी पाए जाने के कारण एकाउंट नहीं खोला जा सका है। इसके बाद इन बैंक खातों को नूंह के साइबर ठगों के हाथों बेच दिया जाता था।

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रिमांड हुई खत्म, भेजे गए जेल
आरोपियों को पूछताछ के लिए रिमांड पर लिया गया था। उनकी रिमांड अवधि खत्म होने पर जेल भेज दिया गया है। आरोपियों का साइबर ठगों से सीधा कनेक्शन मिला है। उनके द्वारा खुलवाए गए खाते साइबर ठगों को बीस-बीस हजार रुपये में बेचे गए। करीब 80 बैंक एकाउंट में ठगी की रकम ट्रांसफर कराई गई और फिर डेबिट कार्ड के माध्यम से निकाली गई। मामले की पड़ताल अभी जारी है। साइबर ठगों का एक बड़े गिरोह का खुलासा होने की उम्मीद है। - सिद्धार्थ जैन, डीसीपी साउथ।
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