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गुरुग्राम: पांच साल में ही कैसे असुरक्षित हो गई ग्रीन व्यू सोसायटी? एनबीसीसी ने सबके सामने स्वीकारा हम हैं इसके दोषी
Fri, 18 Feb 2022 01:51 AM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
अमर उजाला नेटवर्क, गुरुग्राम
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 18 Feb 2022 01:51 AM IST
सार
ग्रीन व्यू सोसायटी के आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जी मोहंती कहते हैं कि उन्हें एनबीसीसी की बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि कभी तो विशेषज्ञों की रिपोर्ट को इस अंदाज में प्रस्तुत किया गया था कि इमारत सुरक्षित है और थोड़ी सी मरम्मत की जरूरत है।
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ग्रीन व्यू सोसायटी गुरुग्राम
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पांच साल में ही सेक्टर 37 डी स्थित एनबीसीसी की ग्रीन व्यू सोसायटी रहने के लिए असुरक्षित कैसे हो गई, यह बात यहां के रहने वालों को समझ नहीं आ रही है। एनबीसीसी के अधिकारी भी जिला उपायुक्त के साथ हुई सोसायटी के लोगों की संयुक्त बैठक में घटिया निर्माण होने के कारणों को पूरी तरह स्पष्ट नहीं कर सके।
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ग्रीन व्यू सोसायटी के आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष जी मोहंती कहते हैं कि उन्हें एनबीसीसी की बातों पर भरोसा नहीं है, क्योंकि कभी तो विशेषज्ञों की रिपोर्ट को इस अंदाज में प्रस्तुत किया गया था कि इमारत सुरक्षित है और थोड़ी सी मरम्मत की जरूरत है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट का हवाला एनबीसीसी दे रही है, जिसमें इमारत को असुरक्षित बताते हुए रातों रात खाली करने का आदेश जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि इमारतों का लगातार क्षरण हो रहा है। लगातार प्लास्टर गिर रहा है। कंक्रीट धीरे-धीरे टूट कर गिर रही है। सरिया बाहर निकल आए हैं। यह क्रम लगातार चल रहा है।
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उन्होंने कहा कि बुधवार को उपायुक्त की बैठक में एनबीसीसी के सीएमडी पीके गुप्ता के खुद स्वीकार किया कि फ्लैट्स एनबीसीसी ने बनवाए हैं तो वह दोषी हैं। वह कह रहे थे कि शुरू में वह हैरान थे कि ऐसा क्यों हो रहा है। इसके लिए क्लोराइड के पानी से जंग (कोरोजन) लगने की बात कह रहे थे, लेकिन यह काम तो उन्हीं की देखरेख में हुआ था। इसके बाद भी यह कैसे हो गया? इसको वह स्पष्ट नहीं कर सके।
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एनबीसीसी ग्रीन व्यू सोसायटी के अब तक के प्रोजेक्ट
- 2010 में प्रोजेक्ट लांच हुआ, 7 टावरों में कुल 784 फ्लैट, 2 ऑफिसर्स बंग्लो, 140 ईडब्ल्यूएस
- 2017 से कब्जा मिलना शुरू। अब तक 252 फ्लैट बिके हैं। 30 रेजिडेंट फ्लैट मालिक हैं। 40 किराएदार हैं। 100 ईडब्ल्यूएस यूनिट में लोग रह रहे हैं
- 2019 में इमारतों में जगह जगह प्लास्टर गिरने और दरारें आने की समस्या हुई। रेजिडेंट्स ने संरचनात्मक जांच के लिए नगर और आवास मंत्रालय को लिखा
- 2020 सितंबर में एनबीसीसी ने आईआईटी दिल्ली से संरचनात्मक जांच के लिए आग्रह किया
- 2021 अक्तूबर में एनबीसीसी ने यहां के रेजिडेंट्स को परिसर खाली करने के लिए पहला नोटिस दिया, जिससे 15 दिन में मरम्मत का काम कराया जा सके
- 2021 नवंबर में आईआईटी दिल्ली ने अपनी रिपोर्ट दी। इसमें इमारतों को रहने के लिए असुरक्षित बताते हुए परिसर के फ्लैटों को दो महीने के अंदर पूरी तरह खाली करवाने की सलाह दी
- 2021 नवंबर में ही एनबीसीसी ने दूसरा और तीसरा नोटिस रेजिडेंट्स को दिया, इसमें फ्लैटों को खाली करने के लिए कहा गया7
- 2022 फरवरी को जिला उपायुक्त ने 1 मार्च तक सभी फ्लैटों को खाली करने का आदेश दिया।