Gurugram: फ्लैट के नाम पर एक करोड़ की ठगी का शिकार हुए दंपति, 12 साल से बैंक की ईएमआई कर रहे जमा
गुरुग्राम में फ्लैट के नाम पर बिल्डर द्वारा एक दंपति से करीब एक करोड़ रुपये की ठगी करने का मामला सामने आया है। दंपति ने फ्लैट की बुकिंग वर्ष 2012 में की थी और इसके बाद से वह लगातार बैंक में ईएमआई जमा कर रहे हैं। आरोप है कि बिल्डर ने फ्लैट को किसी दूसरे शख्स को बेच दिया है।
विस्तार
हरियाणा के गुरुग्राम जिसे साइबर सिटी के नाम से भी जाना जाता है, वहां से ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने लोगों को प्रॉपर्टी खरीदने से पहले 10 बार सोचने पर मजबूर कर दिया है। यहां एक दंपति के साथ फ्लैट के नाम पर बिल्डर ने करीब एक करोड़ की ठगी की है। पीड़ित दंपति को इसकी जानकारी करीब 12 साल बाद हुई, जब वो अपने फ्लैट का मालिकाना हक लेने पहुंचे। जब वो वहां पहुंचे तो उन्होंने देखा उनके फ्लैट में तो एक अन्य परिवार रह रहा है। इसके बाद उन्होंने इस संबंध में जानकारी एकत्र की तो पता चला कि बिल्डर ने इस संपत्ति को किसी और को बेच दिया है।
22 लोगों को आरोपी बनाकर न्याय के लिए गुहार
इसके बाद पीड़ित बिल्डर के दिल्ली स्थित मुख्यालय पर पहुंचे और जब उन्हें संतोषजनक उत्तर नहीं मिला तो उन्होंने इसकी शिकायत बाराखंभा पुलिस स्टेशन दिल्ली में करने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया और इसके लिए वो तीन महीने तक परेशान होते रहे। इसके बाद पीडि़त ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाना उचित समझा और बिल्डर, बैंक के कर्मचारियों व उसके फ्लैट को खरीदने वाले व्यक्ति समेत 22 लोगों को आरोपी बनाकर न्याय के लिए गुहार लगाई।
जयंत गुप्ता व सुजाता गुप्ता हुए इसके शिकार
नोएडा के रहने वाले जयंत गुप्ता व सुजाता गुप्ता ने अपने साथ हुई इस ठगी की जानकारी देते हुए बताया कि बीपीटीपी बिल्डर के गुरुग्राम के द्वारका एकसप्रेस-वे के पास सेक्टर 37-डी में टेरा नामक प्रोजेक्ट में चार बीएचके का फ्लैट एक करोड़ के बैंक लोन पर लिया था। इस फ्लैट की बुकिंग वर्ष 2012 में की थी और इसके बाद से वह लगातार बैंक में ईएमआई जमा कर रहे हैं। इसके साथ ही यह प्रोजेक्ट वर्ष 2015-16 में पूरा होना था और फ्लैट की पजेशन मिलनी थी, लेकिन प्रोजेक्ट समय से पूरा नहीं हुआ और न ही उन्हें पजेशन मिला। इसके बाद भी वे लगातार अपना फ्लैट मिलने का इंतजार कर रहे थे और नोएडा में किराए से रहते रहे। इस दौरान भी उन्होंने निजी बैंक में अपनी फ्लैट की किश्तें लगातार जमा कीं। इसके बाद जुलाई 2024 में जब वो अपने फ्लैट की पजेशन लेने पहुंचे तो फ्लैट में डॉ. पंकज वर्मा नाम के शख्स का परिवार रहता मिला। उन्होंने उसे जानकारी दी कि फ्लैट की मालिक डॉ. संध्या से किराए पर लिया हुआ है। इसके वे बाद बिल्डर और बैंक के अधिकारियों से मिले। लेकिन वो किसी भी प्रकार का संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके।
मालिकाना हक छोड़ने के लिए मिल रही हैं धमकियां
इतना ही नहीं अब इस दंपति को संपत्ति पर अपना मालिकाना हक छोड़ने के लिए धमकियां मिल रही हैं। बिल्डर का कहना है कि जमा की गई राशि और कुछ अन्य राशि लेकर फ्लैट को भूल जाइए। पीड़ित ने बताया कि उन्हें इस फ्लैट के नाम पर करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इतना ही नहीं पजेशन नहीं मिलने के कारण उन्हें महंगे किराए पर रहना पड़ रहा है। जिससे आर्थिक व मानसिक परेशानी झेलनी पड़ रही है।
जिन लोगों को आरोपी बनाया गया है वो इस प्रकार हैं
फ्लैट के नाम पर ठगी किए जाने के मामले में पीड़ित जयंत गुप्ता ने बीपीटीपी लिमिटेड, कंट्रीवाइड प्रमोटर्स प्राइवेट लिमिटेड, एचडीएफसी लिमिटेड, प्रणव मट्टा, सीएम शर्मा, जलराज सिंह, रोहित मोहन, काबुल चावला, सुधांशु त्रिपाठी, अनुपम बंसल, मेघा बजाज, अमित जैदका, डॉ. संध्या रे, डॉ. पंकज वर्मा, प्रेरणा वर्मा, सुभाष चंद्र सेतिया, चित्रा मैनन, केकी एम मिस्त्री, शशिधर जगमोहन, कैजाद भरुचा, श्रीनिवासन, मनिक मलिक व हरिंद्र ढिल्लो द्वारा यह धोखाधड़ी करने के लिए जिम्मेदार माना है। हालांकि, इस मामले में पुलिस का कहना है कि अभी जांच चल रही है।