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Gurugram News: जामिया मिल्लिया के सहयोग से सुधारा जाएगा डीएलएफ का भूजल स्तर

Tue, 12 Dec 2023 11:58 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 12 Dec 2023 11:58 PM IST
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Ground water level of DLF will be improved with the help of Jamia Millia
प्रो. गौहर महमूद से किया करार, गुरुग्राम में भूजल स्तर पर कर चुके हैं शोध
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। डीएलएफ के चारों फेज की करीब 1500 एकड़ जमीन में भूजल स्तर को बढ़ाने में जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का सिविल इंजीरियरिंग विभाग सहयोग करेगा। इससे हर गर्मी में पानी की किल्लत से जूझने वाले डीएलएफ इलाके के निवासियों को जल संकट से राहत मिलेगी।
डीएलएफ इलाके में पानी की जरूरत का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा ट्यूबवेल से निकाला जाता है। शुरुआत में इनके ट्यूबवेल से 16000 किलो लीटर पानी निकल आता था। अब यह मात्रा करीब एक चौथाई यानी 4000 किलो लीटर रह गई है। इसकी वजह भूजल स्तर में गिरावट है। दो दशक पहले इस इलाके में करीब 60 फीट नीचे पानी था अब यह 180 फीट नीचे चला गया है। भूजल स्तर बढ़ने से ट्यूबवेल से ज्यादा पानी आ सकेगा। डीएलएफ की कॉलोनियों में बारिश के मौसम में जल भराव भी कई जगह होता है।
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जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. गौहर महमूद से भूजल स्तर बढ़ाने के लिए डीएलएफ ने एक करार किया है। प्रो. गौहर महमूद ने वर्ष 2006-07 में गुरुग्राम में रेनवाटर हार्वेस्टिंग की जरूरत, भूजल स्तर पर एक शोध किया था। जिसे तत्कालीन नगर निगम ने गुरुग्राम के भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए करवाया था।
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जामिया परिसर में वर्ष 2003 में किया था सफल प्रयोग
विश्वविद्यालय के सिविल इंजीनियरिंग विभाग ने रेनवाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का ऐसा पहला प्रयोग कैंपस में भूजल संरक्षण के लिए किया था। यह एक शोध था जिसमें बारिश के पहले और बारिश के बाद भूजल स्तर की जांच की व्यवस्था थी। इस तरीके को नई तकनीक से अपटूडेट भी किया गया। लखनऊ, मुरादाबाद, गाजियाबाद विकास प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण आदि ने कई शहरों में जामिया के प्रयोग की सहायता ली है।
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दो तरीकों का करेंगे प्रयोग
प्रो. महमूद ने बताया कि डीएलएफ के उन इलाकों को चिन्हित करेंगे जहां ज्यादा पानी जमा होता है। पूरे डीएलएफ में बारिश के समय कई जगह जलभराव की स्थिति होती है। वे इसके लिए चार इंच जमीन की खुदाई से तैयार माइक्रोइंजेक्शन वेल तैयार करेंगे। यह वेल सड़क के किनारे भी बनाया जा सकता है। दूसरी तकनीक कांसेंट्रिक रिंग सिस्टम है। यह करीब डेढ़ मीटर की परिधि और तीन मीटर की गहराई में एक जल भराव वाले ग्रीन बेल्ट और अन्य इलाकों में बनाया जाएगा। इसमें बारिश के पानी को जमाकर एक कुआं और ट्यूबवेल बनाकर पानी को जमीन में डालने की व्यवस्था होगी।

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वर्जन
बारिश के पानी को संरक्षित करने के लिए माइक्रो इंजेक्शन वेल और कांसेंट्रिक रिंग सिस्टम के साथ रूफ टाॅप रेन हार्वेस्टिंग की भी मदद ली जाएगी। इन प्रयोगों से भूजल इतना बढ़ेगा कि डीएलएफ के ट्यूबवेल से आठ से दस हजार किलो लीटर पानी आ सकेगा। इससे वहां पानी की किल्लत खत्म होगी और भूजल स्तर भी बढ़ेगा। - प्रो. गौहर महमूद, सिविल इंजीनियरिंग विभाग, जामिया मिल्लिया इस्लामिया
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