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Gurugram News: अरावली के जंगल में विकसित होंगे घास के मैदान
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- शाकाहारी जानवरों के लिए नहीं होगी भोजन की कमी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली वन क्षेत्र में हरियाली घटने से शाकाहारी जानवरों के लिए भोजन का संकट पैदा हो गया है। इससे जानवर भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र का रुख करते है, जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच झड़प का खतरा बढ़ जाता है।
इसे देखते हुए वन विभाग ने अरावली वन क्षेत्र में घास लगाने की तैयारी कर ली है, जिससे जानवर जंगल में ही रहे। इस योजना के अंतर्गत अरावली वन क्षेत्र में कम हरियाली वाले इलाकों की पहचान की जाएगी। क्षेत्र चिन्हित होने के बाद घास लगाने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी।
बीते दो दशक में बढ़े शहरीकरण के कारण अरावली वन क्षेत्र का क्षरण हुआ है। इसके परिणाम स्वरूप शाकाहारी वन्यजीवों के लिए खाद्य संकट खड़ा हो गया है। भोजन की इस कमी के चलते वन्यजीव मुश्किल का सामना कर रहे है। यही कारण है कि वन विभाग ने जंगल में घास लगाने की योजना बनाई है।
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इस योजना के अंतर्गत गुरुग्राम जिले के साथ ही फरीदाबाद व नूंह क्षेत्र में भी घास विकसित करने की तैयारी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस योजना पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जंगल में हरियाली बढ़ने से जानवरों की संख्या में भी वृद्धी होगी। इस योजना को बीते दो दशक में शहरीकरण के कारण जंगल को हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे अरावली वन क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में भी सुधार होगा।
संभागीय वन अधिकारी राजीव तेजियान ने बताया कि अरावली में उपजे खाद्य संकट से जंगल की खाद्य श्रृंखला(फूड चेन) प्रभावित हो रही थी। इससे जंगल का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है। इसके अलावा भोजन की तलाश में जानवरों के जंगल से बाहर की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही थी। यही कारण इस योजना को लाया जा रहा है। बजट के पैसे मिलते की काम शुरु कर दिया जाएगा।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। अरावली वन क्षेत्र में हरियाली घटने से शाकाहारी जानवरों के लिए भोजन का संकट पैदा हो गया है। इससे जानवर भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र का रुख करते है, जिससे वन्यजीवों और इंसानों के बीच झड़प का खतरा बढ़ जाता है।
इसे देखते हुए वन विभाग ने अरावली वन क्षेत्र में घास लगाने की तैयारी कर ली है, जिससे जानवर जंगल में ही रहे। इस योजना के अंतर्गत अरावली वन क्षेत्र में कम हरियाली वाले इलाकों की पहचान की जाएगी। क्षेत्र चिन्हित होने के बाद घास लगाने की प्रक्रिया शुरु कर दी जाएगी।
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बीते दो दशक में बढ़े शहरीकरण के कारण अरावली वन क्षेत्र का क्षरण हुआ है। इसके परिणाम स्वरूप शाकाहारी वन्यजीवों के लिए खाद्य संकट खड़ा हो गया है। भोजन की इस कमी के चलते वन्यजीव मुश्किल का सामना कर रहे है। यही कारण है कि वन विभाग ने जंगल में घास लगाने की योजना बनाई है।
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इस योजना के अंतर्गत गुरुग्राम जिले के साथ ही फरीदाबाद व नूंह क्षेत्र में भी घास विकसित करने की तैयारी है। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस योजना पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जंगल में हरियाली बढ़ने से जानवरों की संख्या में भी वृद्धी होगी। इस योजना को बीते दो दशक में शहरीकरण के कारण जंगल को हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर भी देखा जा रहा है। इससे अरावली वन क्षेत्र के पारिस्थितिकी तंत्र में भी सुधार होगा।
संभागीय वन अधिकारी राजीव तेजियान ने बताया कि अरावली में उपजे खाद्य संकट से जंगल की खाद्य श्रृंखला(फूड चेन) प्रभावित हो रही थी। इससे जंगल का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ रहा है। इसके अलावा भोजन की तलाश में जानवरों के जंगल से बाहर की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी जा रही थी। यही कारण इस योजना को लाया जा रहा है। बजट के पैसे मिलते की काम शुरु कर दिया जाएगा।