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गुरुग्राम: अरावली में तोड़फोड़ की कार्रवाई निगम को सौंपने की तैयारी, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तय होगी रणनीति
Tue, 28 Sep 2021 01:51 PM IST
प्राची प्रियम
कुमार प्रवीण, गुरुग्राम
कुमार प्रवीण, गुरुग्राम
Published by: प्राची प्रियम
Updated Tue, 28 Sep 2021 01:51 PM IST
सार
अगले सप्ताह अरावली में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ शुरू होने वाली है। इसके लिए वन विभाग फरीदाबाद की तर्ज पर गुरुग्राम अरावली में कार्रवाई पर विचार कर रहा है। हालांकि चार तारीख को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा, जिसके बाद आगे की रणनीति बनेगी।
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अरावली रेंज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अरावली में तोड़फोड़ की पूरी कार्रवाई नगर निगम को सौंपने की तैयारी की जा रही है। माना जा रहा है कि अरावली का अधिकांश हिस्सा निगम की अधिकारिक संपत्ति है। ऐसे में वन विभाग योजना बना रहा है कि क्यों न पूरी अरावली में तोड़फोड़ की तमाम कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर निगम को ही सौंप दी जाए।
फरीदाबाद की अरावली में नगर निगम ही तोड़फोड़ की जिम्मेदारी संभाल रहा है। यही कारण है कि वन विभाग गुरुग्राम में भी तोड़फोड़ की कार्रवाई निगम के ही हवाले करना चाहता है। निगम के पास अपना तोड़फोड़ दस्ता है, एक पूरी की पूरी विंग है।
इसी को लेकर वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने सोमवार को देर तक गहन मंथन किया, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। वन अधिकारी चार अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय और निर्देश के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि चार अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट का एक अहम निर्देश आना है।
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वैसे तो पूरी योजना पर मंथन कर लिया गया, लेकिन किसी भी तरह का अंतिम फैसला बैठक में नहीं किया जा सका है। उम्मीद जताई जा रही है कि शीर्ष कोर्ट अधिकारिक तौर पर नगर निगम या संबंधित एजेंसी को अरावली में तोड़फोड़ की जिम्मेदारी का निर्देश दे सकती है। बताया जाता है कि तोड़फोड़ से पहले अवैध कब्जों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी वन विभाग की ही रहेगी लेकिन वन विभाग पौधरोपण और वन क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीन के अवैध कब्जे चिन्हित करेगा।
बाकी के अवैध कब्जे नगर निगम खुद चिन्हित करेगा। वन विभाग के इस योजना पर अंतिम फैसले के बाद अगले सप्ताह अरावली में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ कार्रवाई होगी।
जल्द सुनवाई का ड्राफ्ट तैयार
इस बीच निचली अदालत में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई को लेकर वन विभाग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। बताया जाता है कि अधिकांश मामलों की सुनवाई दसवें महीने में है। वन विभाग चाहता है कि इन पर जल्द से जल्द सुनवाई पूरी हो, ताकि आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके। अभी निचली अदालत में दो मामलों पर फैसला लंबित है और कई मामलों की अक्तूबर में सुनवाई है। सोमवार को निचली अदालत में जिन मामलों पर फैसला आना था, उनकी तारीख फिर से बढ़ा दी गई है।
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फरीदाबाद की अरावली में नगर निगम ही तोड़फोड़ की जिम्मेदारी संभाल रहा है। यही कारण है कि वन विभाग गुरुग्राम में भी तोड़फोड़ की कार्रवाई निगम के ही हवाले करना चाहता है। निगम के पास अपना तोड़फोड़ दस्ता है, एक पूरी की पूरी विंग है।
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इसी को लेकर वन विभाग के उच्चाधिकारियों ने सोमवार को देर तक गहन मंथन किया, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया। वन अधिकारी चार अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट के एक अहम निर्णय और निर्देश के बाद ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे। एक वरिष्ठ वन अधिकारी ने बताया कि चार अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट का एक अहम निर्देश आना है।
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वैसे तो पूरी योजना पर मंथन कर लिया गया, लेकिन किसी भी तरह का अंतिम फैसला बैठक में नहीं किया जा सका है। उम्मीद जताई जा रही है कि शीर्ष कोर्ट अधिकारिक तौर पर नगर निगम या संबंधित एजेंसी को अरावली में तोड़फोड़ की जिम्मेदारी का निर्देश दे सकती है। बताया जाता है कि तोड़फोड़ से पहले अवैध कब्जों को चिन्हित करने की जिम्मेदारी वन विभाग की ही रहेगी लेकिन वन विभाग पौधरोपण और वन क्षेत्र के लिए आरक्षित जमीन के अवैध कब्जे चिन्हित करेगा।
बाकी के अवैध कब्जे नगर निगम खुद चिन्हित करेगा। वन विभाग के इस योजना पर अंतिम फैसले के बाद अगले सप्ताह अरावली में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ कार्रवाई होगी।
जल्द सुनवाई का ड्राफ्ट तैयार
इस बीच निचली अदालत में लंबित मामलों की जल्द सुनवाई को लेकर वन विभाग ने ड्राफ्ट तैयार कर लिया है। बताया जाता है कि अधिकांश मामलों की सुनवाई दसवें महीने में है। वन विभाग चाहता है कि इन पर जल्द से जल्द सुनवाई पूरी हो, ताकि आगे की कार्रवाई को अंजाम दिया जा सके। अभी निचली अदालत में दो मामलों पर फैसला लंबित है और कई मामलों की अक्तूबर में सुनवाई है। सोमवार को निचली अदालत में जिन मामलों पर फैसला आना था, उनकी तारीख फिर से बढ़ा दी गई है।