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लॉकडाउन में हुए कर्ज की भरपाई के लिए शुरू किया था कॉलसेंटर
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गुरुग्राम। कंप्यूटर/लैपटॉप में पॉपअप भेजकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी का आरोपी फर्जी कॉल सेंटर का संचालक विक्रम लॉकडाउन के दौरान बेरोजगार हो गया था। उसके सिर पर लाखों का कर्ज हो गया। इसे चुकाने के लिए उसने अपने साथी ऋषि कुमार के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर शुरू किया था। 13 जुलाई से ही शुरू इस कॉल सेंटर से आरोपियों ने अमेरिकी नागरिकों से करोड़ों की रकम ऐंठ ली थी। इसके बाद भी ये इस धंधे में लगे थे।
पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि दोनों अलग-अलग जगह काम करते थे। दिल्ली निवासी विक्रम वर्मा की नौकरी लॉकडाउन में चली गई थी। पैसे कमाने की चाह में विक्रम ने शेयर मार्केट और अन्य जगह हाथ आजमाया, लेकिन उसे काफी नुकसान हो गया। सिर से लाखों का कर्ज उतारने के लिए उसने अलवर निवासी अपने दोस्त ऋषि कुमार से संपर्क किया। ऋषि ने यूएस में बैठे साथी के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर की योजना बनाई और 13 जुलाई से इसे शुरू भी कर दिया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने ग्रीनरॉक एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाकर कॉल सेंटर के लिए लीज एग्रीमेंट बनवाया। इसके बाद विशेष एप्लिकेशन और सॉफ्टवेयर के जरिए अमेरिका में बैठे नागरिकों के लैपटॉप/कंप्यूटर पर पॉपअप के जरिये एंटी वायरस की वैधता खत्म होने का डर दिखाकर अपना सॉफ्टवेयर बेचना शुरू किया।
पुलिस के मुताबिक सॉफ्टवेयर को 100 यूएस डॉलर से लेकर एक हजार डॉलर तक बेचा जाता था। इस रकम को एप के जरिये ये अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते थे। दोनों आरोपियों ने अपने यूएस में बैठे साथी से लेकर कई अहम जानकारियां भी पुलिस से साझा कीं। सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने बताया कि आरोपियों को रविवार को जेल भेज दिया गया। उनसे मिले दस्तावेज की जांच चल रही है।
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पुलिस की पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि दोनों अलग-अलग जगह काम करते थे। दिल्ली निवासी विक्रम वर्मा की नौकरी लॉकडाउन में चली गई थी। पैसे कमाने की चाह में विक्रम ने शेयर मार्केट और अन्य जगह हाथ आजमाया, लेकिन उसे काफी नुकसान हो गया। सिर से लाखों का कर्ज उतारने के लिए उसने अलवर निवासी अपने दोस्त ऋषि कुमार से संपर्क किया। ऋषि ने यूएस में बैठे साथी के साथ मिलकर फर्जी कॉल सेंटर की योजना बनाई और 13 जुलाई से इसे शुरू भी कर दिया। पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने ग्रीनरॉक एंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाकर कॉल सेंटर के लिए लीज एग्रीमेंट बनवाया। इसके बाद विशेष एप्लिकेशन और सॉफ्टवेयर के जरिए अमेरिका में बैठे नागरिकों के लैपटॉप/कंप्यूटर पर पॉपअप के जरिये एंटी वायरस की वैधता खत्म होने का डर दिखाकर अपना सॉफ्टवेयर बेचना शुरू किया।
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पुलिस के मुताबिक सॉफ्टवेयर को 100 यूएस डॉलर से लेकर एक हजार डॉलर तक बेचा जाता था। इस रकम को एप के जरिये ये अपने खाते में ट्रांसफर कर लेते थे। दोनों आरोपियों ने अपने यूएस में बैठे साथी से लेकर कई अहम जानकारियां भी पुलिस से साझा कीं। सदर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर दिनेश कुमार ने बताया कि आरोपियों को रविवार को जेल भेज दिया गया। उनसे मिले दस्तावेज की जांच चल रही है।
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