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Gurugram News: डीटीपी कार्यालय में उड़नदस्ता का छापा, पूरा दफ्तर मिला खाली

Wed, 27 May 2026 12:53 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 27 May 2026 12:53 AM IST
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Flying Squad Raids DTP Office; Entire Office Found Empty
उड़नदस्ते के छापे के दौरान मिला खाली दफ्तर
- 11 कर्मचारी गैरहाजिर, कृषि भूमि पर मकानों की एनओसी जारी करने का खुलासा
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विभागीय धांधली और लापरवाही पर उठे बड़े सवाल

संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। जिले में अवैध निर्माण और कॉलोनियों पर कार्रवाई के दावे करने वाला जिला नगर एवं ग्राम आयोजना (डीटीपी) विभाग अब खुद गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता और प्रशासन की संयुक्त टीम द्वारा डीटीपी कार्यालय में की गई औचक छापेमारी में विभाग की कार्यप्रणाली की पोल खुल गई। निरीक्षण के दौरान कार्यालय के सभी कर्मचारी गैरहाजिर मिले, जबकि रिकॉर्ड जांच में कृषि भूमि पर बने मकानों के लिए एनओसी जारी किए जाने के मामले सामने आने से विभाग में बड़े स्तर पर धांधली और नियमों की अनदेखी की आशंका गहरा गई है।
सबसे हैरानी की बात यह रही कि जिस विभाग पर अवैध निर्माण रोकने और नियमों का पालन करवाने की जिम्मेदारी है, उसी विभाग के रिकॉर्ड में भारी गड़बड़ियां सामने आईं। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बिना मिलीभगत के कृषि भूमि पर बने निर्माणों को एनओसी कैसे जारी हो गई। मुख्यमंत्री उड़नदस्ता रेवाड़ी के उप निरीक्षक सुनील कुमार और ड्यूटी मजिस्ट्रेट जयप्रकाश मान, नायब तहसीलदार नूंह की संयुक्त टीम ने डीटीपी कार्यालय पर अचानक निरीक्षण किया। टीम के पहुंचने पर पूरा कार्यालय खाली मिला। काफी देर तक कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। बाद में मोहम्मद सलीम जेई मौके पर पहुंचे, जिसके बाद रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।
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उपस्थिति रजिस्टर ने खोली लापरवाही की पोल :
जांच टीम ने जब उपस्थिति रजिस्टर खंगाला तो उसमें कुल 11 कर्मचारियों की तैनाती दर्ज मिली, लेकिन निरीक्षण के समय कोई भी कर्मचारी ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। सरकारी कार्यालय का इस तरह पूरी तरह खाली मिलना विभागीय लापरवाही और अधिकारियों की ढीली कार्यप्रणाली को उजागर करता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डीटीपी कार्यालय में आम लोगों के काम महीनों तक लटकाए जाते हैं, जबकि रसूखदारों और पैसे वालों के काम फाइलों में तेजी से निपटा दिए जाते हैं। छापेमारी के दौरान सामने आई स्थिति ने इन आरोपों को और मजबूत कर दिया है।
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रिकॉर्ड की जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी :
संयुक्त टीम ने एनओसी से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिकॉर्ड के अनुसार 1 जनवरी 2026 से अब तक कुल 556 आवेदन प्राप्त हुए थे। इनमें से 174 एनओसी जारी की गईं, 263 आवेदन रद्द किए गए जबकि 119 आवेदन अभी प्रक्रिया में बताए गए। टीम ने 31 मई 2023 से 5 मई 2026 तक जारी 11 एनओसी को रैंडम आधार पर जांचा। दस्तावेजों में इन जमीनों को कृषि भूमि बताया गया था, लेकिन जब संबंधित खसरा, खेवट और किला नंबरों को जीओ पोर्टल और गूगल इमेज पर चेक किया गया तो वहां मकान और निर्माण खड़े मिले।
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तत्कालीन डीटीपी के कार्यकाल में जारी हुईं एनओसी :
जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित एनओसी तत्कालीन डीटीपी बिनेश कुमार के कार्यकाल के दौरान जारी की गई थीं। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिना मौके की जांच किए एनओसी जारी की गईं या फिर जानबूझकर अनियमितताओं को नजरअंदाज किया गया। संयुक्त टीम ने गैरहाजिर कर्मचारियों और संदिग्ध एनओसी मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की सिफारिश की है। मामले की विस्तृत रिपोर्ट निदेशक नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग, सेक्टर-18ए चंडीगढ़ को भेजने की अनुशंसा की गई है।


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विभाग पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप :
डीटीपी विभाग पर पहले भी अवैध कॉलोनियों, नियम विरुद्ध निर्माण और मिलीभगत के आरोप लगते रहे हैं। अक्सर कार्रवाई केवल छोटे लोगों तक सीमित रहती है, जबकि बड़े निर्माणकर्ताओं पर विभाग की नरमी चर्चा का विषय बनी रहती है। अब उड़नदस्ता की कार्रवाई के बाद विभाग की कार्यशैली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में अवैध निर्माण रोकना चाहती है तो केवल नोटिस जारी करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि विभाग के अंदर बैठे उन अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई करनी होगी, जो इसके लिए जिम्मेदार हैं।
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