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अधिग्रहण के विरोध में सड़क से सचिवालय तक किसान
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गुरुग्राम। जमीन अधिग्रहण के विरोध में मानेसर क्षेत्र के किसानों ने शहर की सड़कों से सचिवालय तक मार्च किया। इस दौरान किसान परिवारों ने रो-रोकर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इच्छा मृत्यु मांगी।
सचिवालय में किसानों ने उपायुक्त निशांत कुमार यादव को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम अपनी पीड़ा का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए लिखित में एक पत्र सौंपा। इसी पत्र के माध्यम से किसानों ने राष्ट्रपति -प्रधानमंत्री से ईच्छा मृत्यु की मांग की है। उपायुक्त ने उनकी पीड़ा से सरकार को अवगत कराने का भरोसा दिया। तय कार्यक्रम के अनुसार मानेसर क्षेत्र से सैकड़ों किसान और उनके परिजन (पत्नी-बच्चे) शांति नगर पहुंचे। यहां से किसानों का जत्था राजीव चौक, अदालत चौक से प्रदेश सरकार को कोसते हुए लघु सचिवालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए लघु सचिवालय में सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ा दिए।
लघु सचिवालय के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। लघु सचिवालय में घुसने के लिए किसानों को पुलिस के साथ नोक-झोंक करनी पड़ी। पुलिस ने किसानों को गेट पर ही रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान शांतिपूर्ण डीसी से मुलाकात के बारे में बताते रहे। बाद में पुलिस के उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लघु सचिवालय के पिछले गेट से प्रवेश दिया गया।
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एक बार माहौल बिगड़ने की नौबत आ गई, लेकिन पुलिस के उच्चाधिकारियों ने तत्काल मामला संभालते हुए डीसी को किसानों के आने की सूचना दी। इस दौरान किसान यहां धरना देकर बैठ गए। करीब 10 मिनट बाद डीसी किसानों के बीच पहुंचे और उनकी बात सुनी और सरकार तक उनकी मांगे पहुंचाने का आश्वासन दिया।
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महिलाओं ने किया विलाप
जमीन अधिग्रहण मामले में मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली से किसान इतने क्षुब्ध नजर आए कि प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और सरकार के शव का प्रतीक बनाकर उस पर विलाप करते रहे। महिलाएं चीख-चीख कर कहती रही कि उनके लिए सरकार मर गई है, क्योंकि उनकी सुनने वाला कोई नहीं। इस दौरान एक व्यक्ति को शव के रूप में सड़क पर लिटाकर विलाप किया जाता रहा।
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बड़ा होगा संघर्ष
कासन, कुकडोला और सहरावण गांव के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करीब 25 गांवों की जमीन अधिग्रहण मामले में किसानों का संघर्ष बड़ा होता दिख रहा है। करीब ढाई महीने पहले इस संघर्ष ने नया मोड़ लिया है और इस बार न तो सरकार झुकने को तैयार न ही किसान। संघर्ष के लिए जमीन बचाओ-किसान बचाओ समिति बनाई गई है। समिति के वरिष्ठ सदस्यों सरपंच रोहतास सिंह, एडवोकेट प्रदीप यादव मोकलवास, सत्यदेव सरपंच, रोशन लाल थानेदार बासलांबी, बिट्टू, रमेश प्रधान का कहना है कि सरकार की हठधर्मिता ने किसानों को लड़ाई के लिए मजबूर किया है। किसान अब अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। सड़क से संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी। कोई भी किसान मुआवजा नहीं उठाएगा। 7800 एकड़ पहले ले ली, अब 1810 एकड़ को सरकार हड़पना चाहती है।
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सचिवालय में किसानों ने उपायुक्त निशांत कुमार यादव को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम अपनी पीड़ा का ब्योरा प्रस्तुत करते हुए लिखित में एक पत्र सौंपा। इसी पत्र के माध्यम से किसानों ने राष्ट्रपति -प्रधानमंत्री से ईच्छा मृत्यु की मांग की है। उपायुक्त ने उनकी पीड़ा से सरकार को अवगत कराने का भरोसा दिया। तय कार्यक्रम के अनुसार मानेसर क्षेत्र से सैकड़ों किसान और उनके परिजन (पत्नी-बच्चे) शांति नगर पहुंचे। यहां से किसानों का जत्था राजीव चौक, अदालत चौक से प्रदेश सरकार को कोसते हुए लघु सचिवालय की ओर बढ़ा। प्रदर्शन में महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल रहीं। किसानों के प्रदर्शन को देखते हुए लघु सचिवालय में सुरक्षा बंदोबस्त बढ़ा दिए।
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लघु सचिवालय के चारों ओर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। लघु सचिवालय में घुसने के लिए किसानों को पुलिस के साथ नोक-झोंक करनी पड़ी। पुलिस ने किसानों को गेट पर ही रोकने का प्रयास किया, लेकिन किसान शांतिपूर्ण डीसी से मुलाकात के बारे में बताते रहे। बाद में पुलिस के उच्चाधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद किसानों को लघु सचिवालय के पिछले गेट से प्रवेश दिया गया।
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एक बार माहौल बिगड़ने की नौबत आ गई, लेकिन पुलिस के उच्चाधिकारियों ने तत्काल मामला संभालते हुए डीसी को किसानों के आने की सूचना दी। इस दौरान किसान यहां धरना देकर बैठ गए। करीब 10 मिनट बाद डीसी किसानों के बीच पहुंचे और उनकी बात सुनी और सरकार तक उनकी मांगे पहुंचाने का आश्वासन दिया।
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महिलाओं ने किया विलाप
जमीन अधिग्रहण मामले में मुख्यमंत्री और सरकार की कार्यशैली से किसान इतने क्षुब्ध नजर आए कि प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री और सरकार के शव का प्रतीक बनाकर उस पर विलाप करते रहे। महिलाएं चीख-चीख कर कहती रही कि उनके लिए सरकार मर गई है, क्योंकि उनकी सुनने वाला कोई नहीं। इस दौरान एक व्यक्ति को शव के रूप में सड़क पर लिटाकर विलाप किया जाता रहा।
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बड़ा होगा संघर्ष
कासन, कुकडोला और सहरावण गांव के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करीब 25 गांवों की जमीन अधिग्रहण मामले में किसानों का संघर्ष बड़ा होता दिख रहा है। करीब ढाई महीने पहले इस संघर्ष ने नया मोड़ लिया है और इस बार न तो सरकार झुकने को तैयार न ही किसान। संघर्ष के लिए जमीन बचाओ-किसान बचाओ समिति बनाई गई है। समिति के वरिष्ठ सदस्यों सरपंच रोहतास सिंह, एडवोकेट प्रदीप यादव मोकलवास, सत्यदेव सरपंच, रोशन लाल थानेदार बासलांबी, बिट्टू, रमेश प्रधान का कहना है कि सरकार की हठधर्मिता ने किसानों को लड़ाई के लिए मजबूर किया है। किसान अब अपनी एक इंच भी जमीन नहीं देंगे। सड़क से संसद और सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी। कोई भी किसान मुआवजा नहीं उठाएगा। 7800 एकड़ पहले ले ली, अब 1810 एकड़ को सरकार हड़पना चाहती है।