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Gurugram News: ईडी ने रिचा इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रमोटर व पूर्व एमडी को किया गिरफ्तार

Thu, 22 Jan 2026 08:22 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 22 Jan 2026 08:22 PM IST
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ED arrests former promoter and former MD of Richa Industries
बैंकों के साथ 236 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी के मामले में की गई कार्रवाई
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। डायरेक्टोरेट ऑफ एनफोर्समेंट (ईडी), गुरुग्राम ने एम/एस रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) के पूर्व प्रमोटर और निलंबित मैनेजिंग डायरेक्टर संदीप गुप्ता को पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया। उन्हें विशेष अदालत के सामने पेश किया गया। जहां पर अदालत ने आरोपी संदीप गुप्ता को आठ दिन की ईडी हिरासत रिमांड पर भेजा है।

ईडी ने सीबीआई की ओर से आईपीसी, 1860 और पीसी एक्ट, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की, जिसमें आरोपी व्यक्तियों द्वारा आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और आपराधिक कदाचार के अपराध किए गए थे, जिससे उन्हें गलत फायदा हुआ और 2015 से 2018 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को करीब 236 करोड़ रुपये का भारी नुकसान हुआ।
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बैंक धोखाधड़ी से संबंधित जांच के निष्कर्षों में सामने कि रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने बिना किसी वास्तविक माल की सप्लाई के व्यवस्थित रूप से फर्जी बिक्री दर्ज की थी, जिसमें 7.42 करोड़ रुपये की सूती कपड़े की बिक्री और विभिन्न एंट्री ऑपरेटरों द्वारा संचालित कई शेल कंपनियों को 8.50 करोड़ रुपये की सोलर से संबंधित फर्जी बिक्री शामिल थी।
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कंपनी में इन लेनदेन के लिए इनवॉइस और लेजर एंट्री जाली और हेरफेर वाली पाई गईं, जिसमें बकाया बैलेंस और इंटर-डिवीजन ट्रांसफर का इस्तेमाल भुगतान न मिलने को छिपाने के लिए किया गया था। ऐसे में टर्नओवर में कृत्रिम वृद्धि हुई और कंपनी की वित्तीय स्थिति को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे कि कर्जदाताओं और अन्य हितधारकों को गुमराह किया जा सके। इसके अलावा, जांच में सामने आया कि रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने एक गैर-परिचालन इकाई से 9.23 करोड़ रुपये के जेडएलडी प्लांट और मशीनों की फर्जी खरीद बुक की थी, जिसका बिजनेस प्रोफाइल, जीएसटी विवरण और एचएसएन कोड ऐसी मशीनरी सप्लाई के साथ पूरी तरह से असंगत थे। रिचा इंडस्ट्रीज लिमिटेड की किताबों की जांच से संबंधित पार्टी लेनदेन के माध्यम से धन के महत्वपूर्ण हेरफेर का पता चला।




सीआईआरपी और लिक्विडेशन प्रक्रिया से संबंधित जांच

जांच में पता चला कि संदीप गुप्ता ने सीआईआरपी शुरू होने से ठीक पहले कॉरपोरेट देनदार की कीमती संपत्तियों को डायवर्ट करने में बड़ी भूमिका निभाई थी। उन्होंने कई शेल कंपनियां भी बनाई थीं और उनका इस्तेमाल अलग-अलग समय पर कॉरपोरेट देनदार की संपत्तियों को डाइवर्ट करने के लिए किया गया था। इसके बाद, 16 अक्तूबर 2025 को आरआईएल को एक चालू कंपनी के रूप में बेचने के लिए 96 करोड़ रुपये के आरक्षित मूल्य पर एक ई-नीलामी आयोजित की गई, जिसमें कावेरी इंडस्ट्रीज और नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव के कंसोर्टियम सफल बोलीदाता के रूप में उभरे। इस प्रक्रिया में, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, यानी आईओबी और यूनियन बैंक को 696 करोड़ रुपये के स्वीकृत दावों के मुकाबले 40.29 करोड़ रुपये मिले, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 94 फीसदी का नुकसान हुआ।
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