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आर्थिक अपराध समाज की वित्तीय संरचना को करता है प्रभावित : कोर्ट
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जिला अदालत ने मौर्य उद्योग के एमडी की जमानत याचिका की खारिज
57 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
विराट त्यागी
गुरुग्राम। आर्थिक अपराध समाज की वित्तीय संरचना को प्रभावित करता है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास आयुष गर्ग की अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए 57 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में मौर्य उद्योग के प्रबंध निदेशक (एमडी) की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला अपराध की गंभीरता, वित्तीय धोखाधड़ी के बड़े पैमाने, आपराधिक इतिहास और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए सुनाया गया। एमडी नवनीत कुमार सुरेका पर करीब 57 करोड़ रुपये से अधिक के कथित वित्तीय घोटाले और शेयर बाजार में कंपनी के शेयर में हेरफेर कर लाभ कमाने का आरोप है। एमडी के पास काम करने वाले वाले घरेलू सहायक संतोष राउत की शिकायत पर उद्योग विहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 30 जून के आदेश के बाद इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, जिसके तहत शिकायतकर्ता पर 2.09 करोड़ रुपये की देनदारी और ब्याज थोपा गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह प्राथमिकी परिवार के भीतर संपत्ति के विभाजन और व्यावसायिक विवादों के चलते हुई है। यह भी कहा गया कि आवेदक मायस्थेनिया ग्रेविस, स्लीप एपनिया और टाइप-दो मधुमेह जैसी गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित है, इसलिए उसे बीमार या कमजोर व्यक्ति की श्रेणी में जमानत मिलनी चाहिए। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें दिल्ली और हरियाणा में आर्थिक अपराधों से जुड़े 6 अन्य मामले और प्रवर्तन निदेशालय की जांच शामिल है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेज, सेबी के आदेश और चिकित्सा रिपोर्ट की बारीकी से जांच करने के बाद पाया कि आर्थिक अपराध समाज के वित्तीय ताने-बाने को प्रभावित करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि आवेदक गंभीर बीमारियों से पीड़ित है, लेकिन नियमों अनुसार एक विवेकाधीन शक्ति है, जो तभी प्रयोग की जाती है जब राज्य की चिकित्सा बुनियादी ढांचा इलाज में असमर्थ हो। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
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घरेलू सहायक से सादे कागजों पर हस्ताक्षर कर हेरफेर करने का आरोप
संतोष राउत ने शिकायत में बताया कि उन्हें करीब 14,500 रुपये सैलरी मिलती है। 2001 से 2020 के बीच मौर्य उद्योग लिमिटेड (एमयूएल) के कॉरपोरेट कार्यालय में उससे कई सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इन कागजों का दुरुपयोग करके फर्जी केवाईसी और यूसीसी रिकॉर्ड तैयार कर कई बैंक, डीमैट और ट्रेडिंग खाते खोले गए। इन खातों के जरिये एमयूएल के शेयरों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया, जिससे 57 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ कमाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया और एक अनपढ़ घरेलू सहायक को फंसाया गया।
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57 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप
विराट त्यागी
गुरुग्राम। आर्थिक अपराध समाज की वित्तीय संरचना को प्रभावित करता है। ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास आयुष गर्ग की अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए 57 करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में मौर्य उद्योग के प्रबंध निदेशक (एमडी) की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह फैसला अपराध की गंभीरता, वित्तीय धोखाधड़ी के बड़े पैमाने, आपराधिक इतिहास और गवाहों को प्रभावित करने की संभावना को देखते हुए सुनाया गया। एमडी नवनीत कुमार सुरेका पर करीब 57 करोड़ रुपये से अधिक के कथित वित्तीय घोटाले और शेयर बाजार में कंपनी के शेयर में हेरफेर कर लाभ कमाने का आरोप है। एमडी के पास काम करने वाले वाले घरेलू सहायक संतोष राउत की शिकायत पर उद्योग विहार थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया था।
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के 30 जून के आदेश के बाद इस धोखाधड़ी का खुलासा हुआ, जिसके तहत शिकायतकर्ता पर 2.09 करोड़ रुपये की देनदारी और ब्याज थोपा गया। बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि यह प्राथमिकी परिवार के भीतर संपत्ति के विभाजन और व्यावसायिक विवादों के चलते हुई है। यह भी कहा गया कि आवेदक मायस्थेनिया ग्रेविस, स्लीप एपनिया और टाइप-दो मधुमेह जैसी गंभीर पुरानी बीमारियों से पीड़ित है, इसलिए उसे बीमार या कमजोर व्यक्ति की श्रेणी में जमानत मिलनी चाहिए। अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि आरोपी का एक लंबा आपराधिक इतिहास रहा है, जिसमें दिल्ली और हरियाणा में आर्थिक अपराधों से जुड़े 6 अन्य मामले और प्रवर्तन निदेशालय की जांच शामिल है।
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अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और दस्तावेज, सेबी के आदेश और चिकित्सा रिपोर्ट की बारीकी से जांच करने के बाद पाया कि आर्थिक अपराध समाज के वित्तीय ताने-बाने को प्रभावित करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि आवेदक गंभीर बीमारियों से पीड़ित है, लेकिन नियमों अनुसार एक विवेकाधीन शक्ति है, जो तभी प्रयोग की जाती है जब राज्य की चिकित्सा बुनियादी ढांचा इलाज में असमर्थ हो। इसके बाद अदालत ने जमानत याचिका खारिज कर दी।
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घरेलू सहायक से सादे कागजों पर हस्ताक्षर कर हेरफेर करने का आरोप
संतोष राउत ने शिकायत में बताया कि उन्हें करीब 14,500 रुपये सैलरी मिलती है। 2001 से 2020 के बीच मौर्य उद्योग लिमिटेड (एमयूएल) के कॉरपोरेट कार्यालय में उससे कई सादे कागजों पर हस्ताक्षर कराए गए। इन कागजों का दुरुपयोग करके फर्जी केवाईसी और यूसीसी रिकॉर्ड तैयार कर कई बैंक, डीमैट और ट्रेडिंग खाते खोले गए। इन खातों के जरिये एमयूएल के शेयरों में बड़े पैमाने पर हेरफेर किया गया, जिससे 57 करोड़ रुपये से अधिक का लाभ कमाया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने अपनी स्थिति का दुरुपयोग किया और एक अनपढ़ घरेलू सहायक को फंसाया गया।