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Gurugram News: चार्जिंग होने पर 20 किमी चलता था ई-रिक्शा, कंपनी को बैटरी बदलने का आदेश
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उपभोक्ता आयोग से
महीने भर में ही बैटरी हो गई थी खराब, कंपनी ने बदलने से किया था इन्कार
नंबर गेम-30 हजार का मुआवजा भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक महीने में ही ई-रिक्शा में लगी पांच बैटरी की चार्जिंग में खराबी आने पर कंपनी को बैटरी बदलने के साथ ही 30 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सदस्य ज्योति सिवाच ने दिया है।
मोहन गुप्ता ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने 23 अक्तूबर 2023 को ईस्टमैन ऑटो एंड पावर से एक ई-रिक्शा लोडर खरीदा था। इसमें पांच बैटरी लगाई गई थीं जिनकी डेढ़ साल की गारंटी थी। नवंबर 2024 में बैटरी चार्जिंग में समस्या आने लगी। पूरी तरह चार्ज होने पर भी रिक्शा केवल 20 किलोमीटर चलता था। 7 दिसंबर 2024 को गुप्ता के ड्राइवर ने सेवा केंद्र पर बैटरी बदलने का अनुरोध किया। हालांकि, कंपनी ने गारंटी अवधि में होने के बावजूद बैटरी बदलने से इन्कार कर दिया। इस मामले में कंपनी की तरफ से आयोग के सामने कोई भी पेश नहीं हुआ है। आयोग ने शिकायतकर्ता के दस्तावेज के आधार पर कंपनी ने सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 45 दिन में शिकायतकर्ता की ई-रिक्शा की बैटरी को बदल दिया जाए। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 11 हजार रुपये दिए जाएं।
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महीने भर में ही बैटरी हो गई थी खराब, कंपनी ने बदलने से किया था इन्कार
नंबर गेम-30 हजार का मुआवजा भी देना होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक महीने में ही ई-रिक्शा में लगी पांच बैटरी की चार्जिंग में खराबी आने पर कंपनी को बैटरी बदलने के साथ ही 30 हजार रुपये का मुआवजा देना होगा। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग की सदस्य ज्योति सिवाच ने दिया है।
मोहन गुप्ता ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने 23 अक्तूबर 2023 को ईस्टमैन ऑटो एंड पावर से एक ई-रिक्शा लोडर खरीदा था। इसमें पांच बैटरी लगाई गई थीं जिनकी डेढ़ साल की गारंटी थी। नवंबर 2024 में बैटरी चार्जिंग में समस्या आने लगी। पूरी तरह चार्ज होने पर भी रिक्शा केवल 20 किलोमीटर चलता था। 7 दिसंबर 2024 को गुप्ता के ड्राइवर ने सेवा केंद्र पर बैटरी बदलने का अनुरोध किया। हालांकि, कंपनी ने गारंटी अवधि में होने के बावजूद बैटरी बदलने से इन्कार कर दिया। इस मामले में कंपनी की तरफ से आयोग के सामने कोई भी पेश नहीं हुआ है। आयोग ने शिकायतकर्ता के दस्तावेज के आधार पर कंपनी ने सेवा में कमी मानते हुए शिकायतकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 45 दिन में शिकायतकर्ता की ई-रिक्शा की बैटरी को बदल दिया जाए। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर 30 हजार रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 11 हजार रुपये दिए जाएं।
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