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दुर्गा की मूर्तियां तैयार, अब खरीदारों का इंतजार
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दुर्गा की मूर्तियां तैयार, अब खरीदारों का इंतजार
गुरुग्राम। मां दुर्गा की आराधना की तैयारियां देशभर में जोरों पर हैं। मूर्तिकार जी-जान से मां दुर्गा की मूर्तियों को भव्य रूप दे रहे हैं, लेकिन कोरोना के कारण आयोजनों पर आया संकट उन्हें चिंता में डाल रहा है। इस बार जिले में कोरोना के प्रभाव को देखते हुए दुर्गा पंडाल नहीं सजाए जाएंगे। इसका सीधा असर मूर्तियों की खरीद पर पड़ने की आशंका है। मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार उनके पास अब तक मूर्तियों की मांग केवल 5 से 10 प्रतिशत ही है। इससे पहले गणेशोत्सव के समय भी कारोना के कारण मूर्तियों की मांग काफी कम रही थी।
सेक्टर-14 रोड पर दुकान चलाने वाले मूर्तिकार बंशीलाल का कहना है कि वह पिछले 20 सालों से यही कारोबार कर रहे हैं। हर वर्ष 5 से 7 फुट की 100 मूर्तियों तक की मांग एक महीने पहले ही आ जाती थी। इस बार अब तक सिर्फ 5 मूर्तियों की मांग आई है। उनका कहना है कि इस त्यौहार से ही उन्हें पूरे वर्ष की रोजी-रोटी मिलती है। मां दुर्गा में विश्वास रखते हुए वे 50 से ज्यादा मूर्तियां बना चुके हैं। गणेशोत्सव पर भी कम खरीदारी से उन्हें भारी नुकसान हुआ था।
मूर्तिकार वंशीलाल ने बताया कि चैत्र नवरात्र में भी उन्होंने मूर्तियां बनाई थीं। वे 30 हजार में छोटी-बड़ी मूर्तियां खरीदकर भी लाए थे, लेकिन एक भी मूर्ति नहीं बिकी थी। वे मूर्तियां अब तक उनके पास रखी हैं। मूर्तिकार सीता ने कहा कि इस बार ग्राहकों के आने की उम्मीद टूट रही है। अब तक आई सारी मांग छोटी मूर्तियों की ही है। ऑर्डर आने पर ही बड़ी मूर्ति बनाई जाएगी। उनके पास 1 से 5 फुट की मूर्तियां हैं। मूर्तिकार शिवा ने कहा कि उनके लिए दुर्गा उत्सव और गणेशोत्सव मुख्य त्यौहार हैं। अब भी मूर्तियां न बिकीं तो परिवार के लिए आर्थिक मुसीबत हो जाएगी। त्यौहार में अभी 10 दिन बाकी हैं। अचानक मूर्तियों का निर्माण नहीं हो सकता। इसलिए मूर्तियां पहले से ही स्टॉक में जमा करनी होती हैं।
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आयोजनों पर दुर्गा समितियों में असमंजस
दुर्गा उत्सव इस बार 21 और 22 अक्तूबर को होना है। प्रतिवर्ष गुरुग्राम में इसे भव्य स्तर पर मनाया जाता है। इस बार दुर्गा उत्सव समितियां असमंजस में हैं। वे अब तक कार्यक्रम आयोजित नहीं करने के पक्ष में ही हैं। दुर्गा पूजा समिति और पूरवापल्ली दुर्गाबाड़ी समिति इस वर्ष उत्सव नहीं मनाने के मूड में दिख रही हैं। वे लोगों को अपने घरों में ही उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।
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गुरुग्राम। मां दुर्गा की आराधना की तैयारियां देशभर में जोरों पर हैं। मूर्तिकार जी-जान से मां दुर्गा की मूर्तियों को भव्य रूप दे रहे हैं, लेकिन कोरोना के कारण आयोजनों पर आया संकट उन्हें चिंता में डाल रहा है। इस बार जिले में कोरोना के प्रभाव को देखते हुए दुर्गा पंडाल नहीं सजाए जाएंगे। इसका सीधा असर मूर्तियों की खरीद पर पड़ने की आशंका है। मूर्तिकारों का कहना है कि इस बार उनके पास अब तक मूर्तियों की मांग केवल 5 से 10 प्रतिशत ही है। इससे पहले गणेशोत्सव के समय भी कारोना के कारण मूर्तियों की मांग काफी कम रही थी।
सेक्टर-14 रोड पर दुकान चलाने वाले मूर्तिकार बंशीलाल का कहना है कि वह पिछले 20 सालों से यही कारोबार कर रहे हैं। हर वर्ष 5 से 7 फुट की 100 मूर्तियों तक की मांग एक महीने पहले ही आ जाती थी। इस बार अब तक सिर्फ 5 मूर्तियों की मांग आई है। उनका कहना है कि इस त्यौहार से ही उन्हें पूरे वर्ष की रोजी-रोटी मिलती है। मां दुर्गा में विश्वास रखते हुए वे 50 से ज्यादा मूर्तियां बना चुके हैं। गणेशोत्सव पर भी कम खरीदारी से उन्हें भारी नुकसान हुआ था।
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मूर्तिकार वंशीलाल ने बताया कि चैत्र नवरात्र में भी उन्होंने मूर्तियां बनाई थीं। वे 30 हजार में छोटी-बड़ी मूर्तियां खरीदकर भी लाए थे, लेकिन एक भी मूर्ति नहीं बिकी थी। वे मूर्तियां अब तक उनके पास रखी हैं। मूर्तिकार सीता ने कहा कि इस बार ग्राहकों के आने की उम्मीद टूट रही है। अब तक आई सारी मांग छोटी मूर्तियों की ही है। ऑर्डर आने पर ही बड़ी मूर्ति बनाई जाएगी। उनके पास 1 से 5 फुट की मूर्तियां हैं। मूर्तिकार शिवा ने कहा कि उनके लिए दुर्गा उत्सव और गणेशोत्सव मुख्य त्यौहार हैं। अब भी मूर्तियां न बिकीं तो परिवार के लिए आर्थिक मुसीबत हो जाएगी। त्यौहार में अभी 10 दिन बाकी हैं। अचानक मूर्तियों का निर्माण नहीं हो सकता। इसलिए मूर्तियां पहले से ही स्टॉक में जमा करनी होती हैं।
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आयोजनों पर दुर्गा समितियों में असमंजस
दुर्गा उत्सव इस बार 21 और 22 अक्तूबर को होना है। प्रतिवर्ष गुरुग्राम में इसे भव्य स्तर पर मनाया जाता है। इस बार दुर्गा उत्सव समितियां असमंजस में हैं। वे अब तक कार्यक्रम आयोजित नहीं करने के पक्ष में ही हैं। दुर्गा पूजा समिति और पूरवापल्ली दुर्गाबाड़ी समिति इस वर्ष उत्सव नहीं मनाने के मूड में दिख रही हैं। वे लोगों को अपने घरों में ही उत्सव मनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं।