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Gurugram News: एटीएस टीम के निलंबित नौ पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू
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सात दिन के भीतर मांगा जवाब, सोहना थाने में दर्ज है आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मध्य प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की एक टीम टेरर फंडिंग की जांच के दौरान युवक की हुई मौत का मामला उलझता जा रहा है। हत्या के 9 आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से हुई लापरवाही की जांच आईजी लॉ एंड आर्डर अंशुमान सिंह को सौंप दी गई है। उन्होंने सभी निलंबित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है।
अब तक की छानबीन में पता चला है कि मध्य प्रदेश साइबर सेल की ओर से जबलपुर और सतना में छापेमारी के दौरान कुछ बैंक खाते मिले थे। जिसमें टेरर फंडिंग का संदेह था। साइबर सेल की ओर से उन्हें इनपुट था। इस मामले में विभागीय अधिकारी व साइबर सेल को संज्ञान में न लेने के बाद एटीएस की ओर से अपने स्तर पर छानबीन शुरू कर दी गई थी। यहां पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस को भी भरोसे में नहीं लिया गया था। कई मौके पर टीम की ओर से लापरवाही पाई गई है। मप्र पुलिस के आला अधिकारियों ने दावा किया है कि एटीएस की टीम पुख्ता सूचना के बाद दबिश देने पहुंची थी। चार युवकों से पूछताछ कर रही थी। संदिग्धों के पास से एक दर्जन से अधिक लैपटॉप, टैबलेट, तीन दर्जन से अधिक मोबाइल और 30 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। हिमांशु बिहार से पढ़ाई करने और पुलिस-सेना भर्ती की तैयारी करने दिल्ली आया था, लेकिन यहां वह टेरर फंडिंग में फंस गया। टेरर फंडिंग का मुख्य सूत्रधार हिमांशु को ही बताया जा रहा है, जबकि उसके साथी भी इनमें शामिल थे। हिमांशु की मौत के बाद बाकी को पुलिस ने छोड़ दिया है, लेकिन अब मामले की जांच मप्र साइबर सेल और एटीएस दोनों एजेंसियां मिलकर कर रही हैं।
डीजीपी कैलाश मकवाना के निर्देश पर आईजी लॉ एंड ऑर्डर अंशुमान सिंह को गुरुग्राम गई मप्र एटीएस की टीम की विभागीय जांच का जिम्मा सौंपा गया है। एटीएस की टीम भी अब भोपाल लौट आई है। एडीजी इंटेलिजेंस योगेश देशमुख ने गुरुग्राम गई एटीएस टीम के सभी कर्मियों को निलंबित कर दिया है। हिमांशु बिहार का रहने वाला है। उसके चाचा चंदन कुमार की शिकायत पर मप्र एटीएस के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मध्य प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वॉड (एटीएस) की एक टीम टेरर फंडिंग की जांच के दौरान युवक की हुई मौत का मामला उलझता जा रहा है। हत्या के 9 आरोपी पुलिसकर्मियों की ओर से हुई लापरवाही की जांच आईजी लॉ एंड आर्डर अंशुमान सिंह को सौंप दी गई है। उन्होंने सभी निलंबित कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। आरोपियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी किया है।
अब तक की छानबीन में पता चला है कि मध्य प्रदेश साइबर सेल की ओर से जबलपुर और सतना में छापेमारी के दौरान कुछ बैंक खाते मिले थे। जिसमें टेरर फंडिंग का संदेह था। साइबर सेल की ओर से उन्हें इनपुट था। इस मामले में विभागीय अधिकारी व साइबर सेल को संज्ञान में न लेने के बाद एटीएस की ओर से अपने स्तर पर छानबीन शुरू कर दी गई थी। यहां पहुंचने के बाद स्थानीय पुलिस को भी भरोसे में नहीं लिया गया था। कई मौके पर टीम की ओर से लापरवाही पाई गई है। मप्र पुलिस के आला अधिकारियों ने दावा किया है कि एटीएस की टीम पुख्ता सूचना के बाद दबिश देने पहुंची थी। चार युवकों से पूछताछ कर रही थी। संदिग्धों के पास से एक दर्जन से अधिक लैपटॉप, टैबलेट, तीन दर्जन से अधिक मोबाइल और 30 एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं। हिमांशु बिहार से पढ़ाई करने और पुलिस-सेना भर्ती की तैयारी करने दिल्ली आया था, लेकिन यहां वह टेरर फंडिंग में फंस गया। टेरर फंडिंग का मुख्य सूत्रधार हिमांशु को ही बताया जा रहा है, जबकि उसके साथी भी इनमें शामिल थे। हिमांशु की मौत के बाद बाकी को पुलिस ने छोड़ दिया है, लेकिन अब मामले की जांच मप्र साइबर सेल और एटीएस दोनों एजेंसियां मिलकर कर रही हैं।
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