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‘कौन से वाले पापा?’: बेटी से महिला ने कहा- देखो पापा आ गए, शख्स का जवाब पर मामला पहुंचा कोर्ट, अब दोषी करार
Wed, 30 Sep 2026 07:14 PM IST
Rahul Kumar Tiwari
नई दिल्ली, पीटीआई
नई दिल्ली, पीटीआई
Published by: Rahul Kumar Tiwari
Updated Wed, 30 Sep 2026 07:14 PM IST
सार
दिल्ली की अदालत ने महिला से 'कौन से वाले पापा?' कहने वाले गिरधारी लाल को आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया गया है। अदालत ने टिप्पणी को महिला की मर्यादा और शालीनता का अपमान करने वाला माना।
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कोर्ट ने माना अपमानजनक टिप्पणी (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : AI/अमर उजाला GFX
विस्तार
दिल्ली की एक अदालत ने एक व्यक्ति द्वारा महिला पर की गई टिप्पणी 'कौन से वाले पापा?' को यौन रूप से अपमानजनक माना है। अदालत ने इस टिप्पणी को महिला की निष्ठा और बच्चे के पितृत्व पर सवाल उठाने वाला बताया। न्यायिक मजिस्ट्रेट मोक्ष बैंस ने आरोपी गिरधारी लाल को दोषी ठहराया है। यह मामला भारतीय दंड संहिता की धारा 509 के तहत दर्ज किया गया था।
अदालत ने कहा कि यह टिप्पणी सामान्य सवाल नहीं थी। यह महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से की गई थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि 'देखो पापा आ गए' कहने के जवाब में यह टिप्पणी की गई थी। यह संकेत देती है कि बच्चे के एक से अधिक पिता हो सकते हैं। अदालत ने शब्दों के शाब्दिक अर्थ के साथ परिस्थिति को भी महत्वपूर्ण माना। ऐसे आरोप असभ्यता से आगे बढ़कर महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। गिरधारी लाल को आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया गया है। यह धारा महिला की मर्यादा के अपमान से संबंधित है। दोषी को अभी सजा सुनाई जानी बाकी है।
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अदालत ने कहा कि यह टिप्पणी सामान्य सवाल नहीं थी। यह महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से की गई थी। न्यायिक मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट किया कि 'देखो पापा आ गए' कहने के जवाब में यह टिप्पणी की गई थी। यह संकेत देती है कि बच्चे के एक से अधिक पिता हो सकते हैं। अदालत ने शब्दों के शाब्दिक अर्थ के साथ परिस्थिति को भी महत्वपूर्ण माना। ऐसे आरोप असभ्यता से आगे बढ़कर महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं। गिरधारी लाल को आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया गया है। यह धारा महिला की मर्यादा के अपमान से संबंधित है। दोषी को अभी सजा सुनाई जानी बाकी है।
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क्या है मामला?
यह घटना 23 मार्च 2021 को हुई थी। प्रियंका गुप्ता अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ घर के बाहर गली से जा रही थीं। वह बेटी को उसके पिता के पास छोड़ने जा रही थीं। बेटी रो रही थी, तो प्रियंका ने कहा, 'देखो पापा आ गए, रोओ मत।' गिरधारी लाल गली के कोने में कपड़ों पर इस्त्री कर रहा था। उसने तुरंत टिप्पणी की, 'कौन से वाले पापा?'
यह घटना 23 मार्च 2021 को हुई थी। प्रियंका गुप्ता अपनी तीन वर्षीय बेटी के साथ घर के बाहर गली से जा रही थीं। वह बेटी को उसके पिता के पास छोड़ने जा रही थीं। बेटी रो रही थी, तो प्रियंका ने कहा, 'देखो पापा आ गए, रोओ मत।' गिरधारी लाल गली के कोने में कपड़ों पर इस्त्री कर रहा था। उसने तुरंत टिप्पणी की, 'कौन से वाले पापा?'
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ससुर ने की थी पुलिस से शिकायत
महिला ने इस टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया था। बाद में उसने अपने ससुर को इसकी जानकारी दी। ससुर ने तुरंत पुलिस को फोन किया। अदालत ने बताया कि गिरधारी लाल ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बयान दिया था। उसने खुद स्वीकार किया कि उसने ये शब्द कहे थे। हालांकि, उसका कहना था कि उसका कोई गलत इरादा नहीं था।
महिला ने इस टिप्पणी को नजरअंदाज कर दिया था। बाद में उसने अपने ससुर को इसकी जानकारी दी। ससुर ने तुरंत पुलिस को फोन किया। अदालत ने बताया कि गिरधारी लाल ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 313 के तहत बयान दिया था। उसने खुद स्वीकार किया कि उसने ये शब्द कहे थे। हालांकि, उसका कहना था कि उसका कोई गलत इरादा नहीं था।
अदालत का फैसला और तर्क
न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता की गवाही और दोषी की स्वीकारोक्ति पर विचार किया। अदालत ने टिप्पणी की मंशा को उसके स्वरूप और परिस्थिति से स्पष्ट माना। रिकॉर्ड पर इसका कोई निर्दोष अर्थ सामने नहीं आया। अदालत ने स्वतंत्र गवाह की अनुपस्थिति को संदेह का आधार नहीं माना। शिकायतकर्ता प्रत्यक्षदर्शी थी और उसकी गवाही पर कोई असर नहीं पड़ा। अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि गिरधारी लाल ने महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से टिप्पणी की थी। अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया। सजा की अवधि तय करने के लिए अलग से सुनवाई के निर्देश दिए गए।
न्यायाधीश ने शिकायतकर्ता की गवाही और दोषी की स्वीकारोक्ति पर विचार किया। अदालत ने टिप्पणी की मंशा को उसके स्वरूप और परिस्थिति से स्पष्ट माना। रिकॉर्ड पर इसका कोई निर्दोष अर्थ सामने नहीं आया। अदालत ने स्वतंत्र गवाह की अनुपस्थिति को संदेह का आधार नहीं माना। शिकायतकर्ता प्रत्यक्षदर्शी थी और उसकी गवाही पर कोई असर नहीं पड़ा। अभियोजन पक्ष ने साबित किया कि गिरधारी लाल ने महिला की मर्यादा का अपमान करने के इरादे से टिप्पणी की थी। अदालत ने उसे आईपीसी की धारा 509 के तहत दोषी ठहराया। सजा की अवधि तय करने के लिए अलग से सुनवाई के निर्देश दिए गए।