{"_id":"5d752f768ebc3e012f27fe1d","slug":"court-yo-hear-rapid-metro-case-on-monday-gurgaon-news-noi460033645","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेपिड मेट्रो ::: उच्च न्यायलय पर टिकी निगाहें, फैसला आज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेपिड मेट्रो ::: उच्च न्यायलय पर टिकी निगाहें, फैसला आज
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गुरुग्राम। आईएल एंड एफएस इंफ्रास्ट्रक्चर द्वारा रैपिड मेट्रो संचालन बंद करने को लेकर दिए गए नोटिस का सोमवार को अंतिम दिन है। कंपनी द्वारा पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका पर सोमवार को सुनवाई होनी है। इसको लेकर कंपनी, हरियाणा सरकार, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) व गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) की निगाहें उच्च न्यायालय पर टिक गई हैं।
रैपिड रेल संचालन करने वाली कंपनी आईएल एंड एफएस ने 90 दिन पहले एचएसवीपी को नोटिस देकर संचालन की बागडोर संभालने का आग्रह किया था। इस पर एचएसवीपी ने इस नोटिस को हरियाणा सरकार को भेजा था। हरियाणा सरकार ने इस पर फैसला लेना था। इसके संचालन के लिए जीएमडीए से विचार विमर्श किया गया। जीएमडीए के अधिकारियों ने हरियाणा मास रेपिड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (एचएमआरटीसी) के तहत मेट्रो इसके संचालन के लिए सरकार को हामी भर दी। वहीं, जीएमडीए के अधिकारियों ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) से इसके संचालन के लिए मदद मांगी। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने 5 वर्ष तक डीएमआरसी की मदद से इसका संचालन करने की बात कही ताकि एचएमआरटीसी के अधिकारी व कर्मचारी इसमें अनुभव प्राप्त कर लें। अधिकारियों के मुताबिक, रैपिड मेट्रो की आड़ लेकर जब कंपनी ने अपना 3 हजार करोड़ रुपये का घाटा भी सरकार को देना चाहा तो सरकार ने इस नोटिस को अवैध करार दे दिया। इस पर कंपनी ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इस मामले में सोमवार को सुनवाई होनी है।
वहीं, सरकार व जीएमडीए ने उच्च न्यायालय पर नजरें जमा ली हैं। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी उमाशंकर ने बताया कि रैपिड मेट्रो सार्वजनिक परिवहन है जिसे बंद किया जाना उचित नहीं है। जनहित में इसे सुचारु रखा जाना आवश्यक है। मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। सोमवार को अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
रैपिड रेल संचालन करने वाली कंपनी आईएल एंड एफएस ने 90 दिन पहले एचएसवीपी को नोटिस देकर संचालन की बागडोर संभालने का आग्रह किया था। इस पर एचएसवीपी ने इस नोटिस को हरियाणा सरकार को भेजा था। हरियाणा सरकार ने इस पर फैसला लेना था। इसके संचालन के लिए जीएमडीए से विचार विमर्श किया गया। जीएमडीए के अधिकारियों ने हरियाणा मास रेपिड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (एचएमआरटीसी) के तहत मेट्रो इसके संचालन के लिए सरकार को हामी भर दी। वहीं, जीएमडीए के अधिकारियों ने दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (डीएमआरसी) से इसके संचालन के लिए मदद मांगी। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने 5 वर्ष तक डीएमआरसी की मदद से इसका संचालन करने की बात कही ताकि एचएमआरटीसी के अधिकारी व कर्मचारी इसमें अनुभव प्राप्त कर लें। अधिकारियों के मुताबिक, रैपिड मेट्रो की आड़ लेकर जब कंपनी ने अपना 3 हजार करोड़ रुपये का घाटा भी सरकार को देना चाहा तो सरकार ने इस नोटिस को अवैध करार दे दिया। इस पर कंपनी ने उच्च न्यायालय की शरण ली है। इस मामले में सोमवार को सुनवाई होनी है।
विज्ञापन
वहीं, सरकार व जीएमडीए ने उच्च न्यायालय पर नजरें जमा ली हैं। जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वी उमाशंकर ने बताया कि रैपिड मेट्रो सार्वजनिक परिवहन है जिसे बंद किया जाना उचित नहीं है। जनहित में इसे सुचारु रखा जाना आवश्यक है। मामला पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। सोमवार को अदालत के आदेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन