Who is Raj Babbar: कैप्टन की तल्खी दरकिनार, कांग्रेस ने गुरुग्राम से राज बब्बर को दिया टिकट
भाजपा प्रत्याशी के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी की राह आसान नहीं है। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने इस बार हरियाणा में आम आदमी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया है। अब सिने स्टार राज बब्बर को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने इस सीट के मुकाबले को रोचक बना दिया है।
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लंबे इंतजार के बाद आखिर कांग्रेस ने गुरुग्राम लोकसभा सीट पर अपने प्रत्याशी के रूप में फिल्म अभिनेता राज बब्बर का नाम फाइनल कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली से सटी हरियाणा की गुरुग्राम सीट पर मुकाबला अब रोचक हो गया है। इस सीट से कांग्रेस के टिकट को लेकर कैप्टन अजय यादव और राज बब्बर का ही नाम सुर्खियों में था। पिछले दिनों राज बब्बर के नाम की इस कदर चर्चा हुई कि टिकट की दौड़ में शामिल कैप्टन अजय यादव ने उन पर कई टिप्पणी तक करते हुए यहां तक कह दिया कि राज बब्बर ने गुरुग्राम के लिए क्या पांच साल पसीना बहाया है। इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि अगर किसी फिल्मी चेहरे को ही टिकट देना है तो करीना, रितिक, रणवीर कपूर या रणवीर सिंह को दे दिया जाए।
गुटबाजी के चलते रुका था चयन
कांग्रेस का प्रदेश में संगठन नहीं होने के कारण पार्टी दो गुटों में बंटी हुई है। इसमें पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा व पूर्व केंद्रीय मंत्री शैलजा गुट हैं। इसमें हुड्डा गुट ने अभिनेता राजबब्बर का नाम भेजा था। वहीं, शैलजा गुट से पूर्व मंत्री कैप्टन अजय यादव का नाम भेजा गया था। संगठन के बीच गुटबाजी कहीं भारी न पड़ जाए, इसी कशमकश में गुरुग्राम सीट से प्रत्याशी के नाम की घोषणा करने में देरी हुई।
आसान नहीं है कांग्रेस प्रत्याशी की राह, करनी होगी कड़ी मेहनत
भाजपा प्रत्याशी के मुकाबले कांग्रेस प्रत्याशी की राह आसान नहीं है। भाजपा को हराने के लिए कांग्रेस ने इस बार हरियाणा में आम आदमी पार्टी के साथ लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया है। अब सिने स्टार राज बब्बर को प्रत्याशी बनाकर कांग्रेस ने इस सीट के मुकाबले को रोचक बना दिया है। गुरुग्राम में बड़ी संख्या में पंजाबी वोट के साथ ही सिने स्टार राज बब्बर को अपने फिल्मी फैन का साथ भी मिल सकता है। इसके अलावा कांग्रेस के खांटी वोटर भी इस सीट पर अपना अलग वजूद रखते हैं। लेकिन अपनी पार्टी के ही कुछ नेताओं का भितरघात उन्हें परेशान कर सकता है। ऐसे में असंतुष्टों को मनाना भी उनके लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। 2019 के लोकसभा चुनाव में राव इंद्रजीत सिंह को 8,81,546 वोट मिले थे, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी रहे कांग्रेस प्रत्याशी कैप्टन अजय सिंह यादव के पास 4,95,290 वोट थे। यह आंकड़ा भी जिले में कांग्रेसियों के अच्छे-खासे वजूद को दर्शाता है।
राज बब्बर का राजनीतिक सफर
पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के कार्यकाल में राज बब्बर ने 1989 में जनता दल में शामिल होकर राजनीति में प्रवेश किया। बाद में वह सपा में चले गए। 1994 से 1999 तक वह राज्यसभा के सदस्य रहे। वह 2004 में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए 14वें लोकसभा चुनाव में फिर से चुने गए। 2006 में उन्हें समाजवादी पार्टी से निलंबित कर दिया गया। बाद में वह 2008 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए और 2009 में संसद सदस्य के रूप में अपने चौथे कार्यकाल के लिए चुने गए। लोकसभा उन्होंने अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव को हराया।
2014 में कांग्रेस ने उन्हें फिर से गाजियाबाद लोकसभा सीट पर उम्मीदवार बनाया था। इसमें उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी रिटायर्ड जनरल वीके सिंह से था। इसमें वीके सिंह ने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की थी। इसके बाद कांग्रेस ने उन्हें उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष मनोनीत कर दिया था। 2019 के चुनावों में भी वह अपनी सीट भी नहीं बचा सके और भारतीय जनता पार्टी के राजकुमार चाहर से हार गए।
विवादित बयानों के कारण चर्चा में रहे हैं राज बब्बर
अपने विवादित बयानों के कारण भी राज बब्बर चर्चा में रहे हैं। कांग्रेस प्रवक्ता की हैसियत से राज बब्बर ने 2013 में यह कहकर विवाद पैदा कर दिया था कि मुंबई में एक आम आदमी को भरपेट भोजन के लिए 12 रुपये पर्याप्त हैं। उनके इस बयान की कड़ी आलोचना हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में एक गरीब व्यक्ति को 28 से 32 रुपये में दिन में दो बार भरपेट भोजन मिल सकता है। विपक्षी दलों ने राज बब्बर के बयान को हास्यास्पद बताते हुए खूब उछाला था। बाद में उन्होंने अपनी टिप्पणियों पर खेद व्यक्त किया था। जुलाई 2013 में उन्होंने नरेंद्र मोदी की तुलना एडॉल्फ हिटलर से की तो उससे भी विवाद भी खड़ा हो गया था।