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Gurugram News: शहरों को पर्यावरण के लिहाज से किया जाए विकसित
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अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस में 14 राज्यों के विद्वानों ने विकास और पर्यावरण संतुलन पर रखे विचार
द्रोणाचार्य कॉलेज में 100 शोधपत्र किए प्रस्तुत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग, अर्थशास्त्र विभाग और रिसर्च तथा विकास प्रकोष्ठ की ओर से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। विकास, पर्यावरण, सतत विकास लक्ष्य तथा समाज विषय पर हुई कॉन्फ्रेंस में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें पर्यावरण संरक्षण और शहरों को पर्यावरण के लिहाज से विकसित करने पर जोर दिया गया।
कॉन्फ्रेंस में 14 राज्यों, 16 विश्वविद्यालयों और 60 कॉलेजों से जुड़े प्रतिभागियों ने समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, पर्यावरण विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर ऑनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत कर विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। प्राचार्या प्रो. पुष्पा अंतिल ने देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए विकास व पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। संयोजक प्रो. भूप सिंह गौर ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई जबकि प्रो. सुभाष ने संगठन सचिव के रूप में थीम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
मैक्सिको की डॉ. मैरियाना ग्रेसिया ने पर्यावरण फ्रेंडली शहरों की आवश्यकता बताई। वहीं, जेएनयू के प्रो. शक्ति सिंह ने भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की संभावना पर चर्चा की। मलेशिया के प्रो. इस्माइल जेन ने शिक्षक-छात्र की भूमिका रेखांकित की, तो श्रीलंका की डॉ. मधुरिमा दासगुप्ता ने महिला विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. चकवर्ती महाजन, नेपाल के प्रो. रामहरि ढकाल, मेरठ की प्रो. दीप्ति कौशिक और एमडीयू रोहतक की प्रो. बिमला लांग्यान सहित कई विद्वानों ने विचार रखे।
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द्रोणाचार्य कॉलेज में 100 शोधपत्र किए प्रस्तुत
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। द्रोणाचार्य राजकीय महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग, अर्थशास्त्र विभाग और रिसर्च तथा विकास प्रकोष्ठ की ओर से एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। विकास, पर्यावरण, सतत विकास लक्ष्य तथा समाज विषय पर हुई कॉन्फ्रेंस में 100 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इनमें पर्यावरण संरक्षण और शहरों को पर्यावरण के लिहाज से विकसित करने पर जोर दिया गया।
कॉन्फ्रेंस में 14 राज्यों, 16 विश्वविद्यालयों और 60 कॉलेजों से जुड़े प्रतिभागियों ने समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, इतिहास, पर्यावरण विज्ञान सहित विभिन्न विषयों पर ऑनलाइन शोध पत्र प्रस्तुत कर विकास और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन की आवश्यकता पर बल दिया। प्राचार्या प्रो. पुष्पा अंतिल ने देश-विदेश के विषय विशेषज्ञों का स्वागत करते हुए विकास व पर्यावरण संरक्षण में सामूहिक जिम्मेदारी पर जोर दिया। संयोजक प्रो. भूप सिंह गौर ने मॉडरेटर की भूमिका निभाई जबकि प्रो. सुभाष ने संगठन सचिव के रूप में थीम की प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
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मैक्सिको की डॉ. मैरियाना ग्रेसिया ने पर्यावरण फ्रेंडली शहरों की आवश्यकता बताई। वहीं, जेएनयू के प्रो. शक्ति सिंह ने भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की संभावना पर चर्चा की। मलेशिया के प्रो. इस्माइल जेन ने शिक्षक-छात्र की भूमिका रेखांकित की, तो श्रीलंका की डॉ. मधुरिमा दासगुप्ता ने महिला विकास को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. चकवर्ती महाजन, नेपाल के प्रो. रामहरि ढकाल, मेरठ की प्रो. दीप्ति कौशिक और एमडीयू रोहतक की प्रो. बिमला लांग्यान सहित कई विद्वानों ने विचार रखे।
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