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बाल वैज्ञानिकों ने खोजा ट्रैफिक और आपदा समस्या का समाधान
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गुरुग्राम। शहर में जाम से लोगों को निजात दिलाने और आपदा से पूर्व ही समाधान के लिए जिले की बाल वैज्ञानिकों ने नायाब तरकीब खोज ली हैं। बाल वैज्ञानिक सान्वी द्वारा ‘स्मार्ट यातायात प्रणाली प्रबंधन’ और वंशिका ने ‘द सारथी’ एप बनाया गया है।
समस्या-समाधान और सतत विकास के लिए किए गए ये शोध राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के प्रदेश स्तर के लिए चयनित हो गए हैं। जिले की बाल विज्ञान शैक्षिक संयोजिका बविता ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा बाल विज्ञान कांग्रेस आयोजित कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम में बाल वैज्ञानिक समाज की समस्याओं पर शोध पेश कर रहे हैं। इस कड़ी में जिले से चयनित 6 टीमों में से दो टीमें प्रदेश स्तर में अपना स्थान बना पाई हैं।
यह 28वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस है। जिले की चयनित बाल वैज्ञानिक टीम अब अपने शोध 31 जनवरी को रोहतक के जन विज्ञान केंद्र में प्रस्तुत करेंगी। इससे पहले के सभी राउंड ऑनलाइन ही किए गए थे।
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टैफिक में फंसने पर बनाई स्मार्ट प्रणाली
जिले में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए 12 वर्षीय सान्वी ने स्मार्ट यातायात प्रणाली प्रबंधन तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली रोड पर वाहनों की भीड़ को देखते हुए रेड लाइट और ग्रीन लाइट के समय को कम और ज्यादा करेगी। साथ ही आपात वाहन के लिए भी ट्रैफिक को कम कर दिया जाएगा। सान्वी ने बताया कि दो वर्ष पहले वह एक कार्यक्रम में जा रही थी लेकिन ट्रैफिक में फंस गई और कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकी। जबकि दूसरी तरफ रोड पूरी तरह खाली होने पर भी ट्रैफिक लाइट एक नियमित प्रणाली के अनुसार ही कार्य करती रही। ऐसे में उन्होंने स्मार्ट यातायात प्रणाली प्रबंधन बनाने की योजना बनाई। इस प्रोजेक्ट में उनका सहयोग छात्रा नसीहा द्वारा किया गया है। दोनों ही एमिटी स्कूल की छात्राएं हैं।
भूकंप-बाढ़ में फंसे तो एप विभाग को बताएगा लोकेशन
भूकंप आने पर गगनचुंबी इमारतों को बड़ा खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में जिले की बाल वैज्ञानिक अंशिका ने ‘द सारथी’ एप बनाया है। यह एप आपदा की स्थिति में मददगार साबित होगा। अंशिका ने बताया कि भूकंप, बाढ़, सुनामी, तूफान में फंसने पर यह एप आपदा प्रबंधन विभाग तक लोकेशन भेज सकेगा। इस एप में सेंसर भी लगाया गया है। इस एप पर सिर्फ आपदा संबंधी खबरें देखी जा सकेंगी। आपदाओं में फंसने पर बरती जाने वाली सावधानियां बताई जाएंगी। इसमें सभी हेल्पलाइन नंबर भी जोड़े गए हैं। अंशिका ने पूर्वी, अदिति और इशिता के सहयोग से यूट्यूब ट्यूटोरियल देख कर यह एप बनाया है। सभी एमिटी स्कूल की छात्राएं हैं।
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समस्या-समाधान और सतत विकास के लिए किए गए ये शोध राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस के प्रदेश स्तर के लिए चयनित हो गए हैं। जिले की बाल विज्ञान शैक्षिक संयोजिका बविता ने बताया कि भारत सरकार के राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद द्वारा बाल विज्ञान कांग्रेस आयोजित कराया जा रहा है। इस कार्यक्रम में बाल वैज्ञानिक समाज की समस्याओं पर शोध पेश कर रहे हैं। इस कड़ी में जिले से चयनित 6 टीमों में से दो टीमें प्रदेश स्तर में अपना स्थान बना पाई हैं।
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यह 28वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस है। जिले की चयनित बाल वैज्ञानिक टीम अब अपने शोध 31 जनवरी को रोहतक के जन विज्ञान केंद्र में प्रस्तुत करेंगी। इससे पहले के सभी राउंड ऑनलाइन ही किए गए थे।
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टैफिक में फंसने पर बनाई स्मार्ट प्रणाली
जिले में ट्रैफिक की समस्या को देखते हुए 12 वर्षीय सान्वी ने स्मार्ट यातायात प्रणाली प्रबंधन तैयार किया है। उन्होंने बताया कि यह प्रणाली रोड पर वाहनों की भीड़ को देखते हुए रेड लाइट और ग्रीन लाइट के समय को कम और ज्यादा करेगी। साथ ही आपात वाहन के लिए भी ट्रैफिक को कम कर दिया जाएगा। सान्वी ने बताया कि दो वर्ष पहले वह एक कार्यक्रम में जा रही थी लेकिन ट्रैफिक में फंस गई और कार्यक्रम में नहीं पहुंच सकी। जबकि दूसरी तरफ रोड पूरी तरह खाली होने पर भी ट्रैफिक लाइट एक नियमित प्रणाली के अनुसार ही कार्य करती रही। ऐसे में उन्होंने स्मार्ट यातायात प्रणाली प्रबंधन बनाने की योजना बनाई। इस प्रोजेक्ट में उनका सहयोग छात्रा नसीहा द्वारा किया गया है। दोनों ही एमिटी स्कूल की छात्राएं हैं।
भूकंप-बाढ़ में फंसे तो एप विभाग को बताएगा लोकेशन
भूकंप आने पर गगनचुंबी इमारतों को बड़ा खतरा रहता है। ऐसी स्थिति में जिले की बाल वैज्ञानिक अंशिका ने ‘द सारथी’ एप बनाया है। यह एप आपदा की स्थिति में मददगार साबित होगा। अंशिका ने बताया कि भूकंप, बाढ़, सुनामी, तूफान में फंसने पर यह एप आपदा प्रबंधन विभाग तक लोकेशन भेज सकेगा। इस एप में सेंसर भी लगाया गया है। इस एप पर सिर्फ आपदा संबंधी खबरें देखी जा सकेंगी। आपदाओं में फंसने पर बरती जाने वाली सावधानियां बताई जाएंगी। इसमें सभी हेल्पलाइन नंबर भी जोड़े गए हैं। अंशिका ने पूर्वी, अदिति और इशिता के सहयोग से यूट्यूब ट्यूटोरियल देख कर यह एप बनाया है। सभी एमिटी स्कूल की छात्राएं हैं।