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विभाग के दावों से आरोप तय नहीं हो सकते : कोर्ट
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20 सुनवाई पर पर पुख्ता दस्तावेज-गवाह पेश नहीं हुए, आरोपी बरी
190 करोड़ का जीएसटी घोटाला
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 190 करोड़ रुपये के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शमशाद सैफी को जिला अदालत ने बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने पाया कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस विभाग आरोपी के खिलाफ कोर्ट में ठोस सबूत या गवाह पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। 20 से ज्यादा मौके देने के बावजूद भी विभाग की तरफ से इस मामले में दस्तावेज और गवाह पेश नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि केवल विभाग के दावों या गिरफ्तारी के आधार पर किसी व्यक्ति पर आरोप तय नहीं किए जा सकते हैं।
डीजीजीआई गुरुग्राम जोनल यूनिट के वरिष्ठ खुफिया अधिकारी द्वारा सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 के तहत यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि मोहम्मद शमशाद सैफी ने मेसर्स टेक्नो इलेक्ट्रिकल एंड सेल्स और मेसर्स लता सेल्स जैसी फर्जी और गैर-मौजूद फर्में बनाकर बिना किसी वस्तु या सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी बिल जारी करके 190 करोड़ का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट विभाग से पास करा लिया। मोहम्मद शमशाद सैफी को इस मामले में 9 अक्तूबर 2020 को सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता विभाग केवल एक ही गवाह (वरिष्ठ खुफिया अधिकारी) को पेश कर पाया, जिसे खुद मामले की व्यक्तिगत जानकारी या तलाशी अभियान का कोई अनुभव नहीं था। इसके अलावा, विभाग द्वारा कोई भी अन्य मुख्य दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, चालान या प्राथमिक साक्ष्य अदालत में साबित नहीं किए जा सके। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि गवाही बंद होने के बाद से लगातार कई तारीखों पर शिकायतकर्ता विभाग की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ।
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अदालत ने ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि विभाग को अपने प्री-चार्ज सबूत पेश करने के लिए 29 मई 2023 से 13 अक्तूबर 2025 के बीच 20 से अधिक तारीखें दी गई थीं। इसके बावजूद विभाग सबूत पूरे नहीं कर पाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।
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190 करोड़ का जीएसटी घोटाला
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 190 करोड़ रुपये के जीएसटी इनपुट टैक्स क्रेडिट घोटाले के मुख्य आरोपी मोहम्मद शमशाद सैफी को जिला अदालत ने बरी कर दिया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट मनीष कुमार की अदालत ने पाया कि गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस विभाग आरोपी के खिलाफ कोर्ट में ठोस सबूत या गवाह पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। 20 से ज्यादा मौके देने के बावजूद भी विभाग की तरफ से इस मामले में दस्तावेज और गवाह पेश नहीं किए गए। अदालत ने कहा कि केवल विभाग के दावों या गिरफ्तारी के आधार पर किसी व्यक्ति पर आरोप तय नहीं किए जा सकते हैं।
डीजीजीआई गुरुग्राम जोनल यूनिट के वरिष्ठ खुफिया अधिकारी द्वारा सीजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 के तहत यह शिकायत दर्ज कराई गई थी। आरोप था कि मोहम्मद शमशाद सैफी ने मेसर्स टेक्नो इलेक्ट्रिकल एंड सेल्स और मेसर्स लता सेल्स जैसी फर्जी और गैर-मौजूद फर्में बनाकर बिना किसी वस्तु या सेवाओं की आपूर्ति के फर्जी बिल जारी करके 190 करोड़ का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट विभाग से पास करा लिया। मोहम्मद शमशाद सैफी को इस मामले में 9 अक्तूबर 2020 को सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 के तहत गिरफ्तार किया गया था और बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।
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अदालत ने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता विभाग केवल एक ही गवाह (वरिष्ठ खुफिया अधिकारी) को पेश कर पाया, जिसे खुद मामले की व्यक्तिगत जानकारी या तलाशी अभियान का कोई अनुभव नहीं था। इसके अलावा, विभाग द्वारा कोई भी अन्य मुख्य दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट, चालान या प्राथमिक साक्ष्य अदालत में साबित नहीं किए जा सके। अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि गवाही बंद होने के बाद से लगातार कई तारीखों पर शिकायतकर्ता विभाग की ओर से कोई भी अदालत में पेश नहीं हुआ।
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अदालत ने ने रिकॉर्ड पर दर्ज किया कि विभाग को अपने प्री-चार्ज सबूत पेश करने के लिए 29 मई 2023 से 13 अक्तूबर 2025 के बीच 20 से अधिक तारीखें दी गई थीं। इसके बावजूद विभाग सबूत पूरे नहीं कर पाया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को बरी कर दिया गया।