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कोविड के दौरान मनमाना पैसा वसूलने व मरीज के साथ लापरवाही बरतने का आरोप

Mon, 11 Oct 2021 11:24 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 11:24 PM IST
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Case of cheating-negligence registered on private hospital in court order
गुरुग्राम। कोविड के दौरान निजी अस्पताल पर मरीज से तय से अधिक शुल्क वसूलने और बेहतर इलाज न करने का आरोप लगाया गया है। हालत गंभीर होने पर मरीज को दूसरे निजी अस्पताल में दाखिल कराना पड़ा था। पीड़ित पक्ष की याचिका पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया। पीड़ित के परिजन के बयान पर डीएलएफ फेज-3 थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
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पुलिस के अनुसार, पालम विहार क्षेत्र में रहने वाले अमित साहनी ने डीएलएफ फेज-3 क्षेत्र के आरबीएस अस्पताल प्रबंधन और वहां के केमिस्ट शॉप संचालक पर ठगी व लापरवाही का केस दर्ज कराया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि 5 मई 2021 को अपने रिश्तेदार गौरव कुमार को कोविड के चलते इस अस्पताल में दाखिल कराया था। सरकार व स्वास्थ्य विभाग ने महामारी के चलते अस्पताल का चार्ज तय किया था। फिर भी कोविड आईसीयू में मरीज को भर्ती करने के लिए 8 हजार रुपये चार्ज लगाया गया जिसमें सिर्फ ऑक्सीजन थी। जबकि वेंटिलेटर नहीं था। मरीज का सही से इलाज नहीं किया गया और उसे लापरवाही के चलते ब्लैक फंगस भी हो गया। आईसीयू के अलावा ऑक्सीजन के लिए 6 हजार रुपये प्रतिदिन के हिसाब से चार्ज किया गया।
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दवा की दुकान ने गलत बिल बनाया
मरीज को 5 मई को दाखिल किया गया था लेकिन दवा की दुकान ने 4 मई का बिल काटकर दिया जो गलत है। 5 से 10 मई तक 85 हजार रुपये का बिल बनाया गया। लेकिन ब्लैक फंगस के चलते मरीज को पारस अस्पताल में शिफ्ट किया गया। 7 मई को मरीज को नाक से ब्लीडिंग होने लगी। इसके लिए अस्पताल में उसे कुछ इंजेक्शन दिए गए। इसके बाद एक साइड की नाक से सांस ही नहीं आया। हालत बिगड़ने पर मरीज को शिफ्ट करना पड़ा और फिर पता चला कि अस्पताल की लापरवाही से मरीज को ब्लैक फंगस हो गया।
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अस्पताल ने कहा, रेमडेसिविर नहीं है, बाहर से हो रहा इंतजाम
इतना ही नहीं अस्पताल की दवा की दुकान से कहा गया कि उनके पास रेमडेसिविर नहीं है, लेकिन वे बाहर से 70 हजार रुपये में व्यवस्था कर रहे हैं। उसके लिए नकद भुगतान मांगा। पारस अस्पताल में 13 मई को मरीज का ऑपरेशन हुआ। उसे आगे भी हर दिन इंजेक्शन लगे जिनकी कीमत करीब 70 हजार प्रतिदिन थी। आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही के चलते मरीज को ब्लैक फंगस हुआ और फिर उसे आगे के इलाज में लाखों रुपये खर्च करने पड़े। पुलिस को शिकायत दी गई लेकिन वहां से कोई कार्रवाई न होने पर याचिका कोर्ट में दायर की गई। अब डीएलएफ फेज-3 थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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