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Gurugram News: सितंबर तक खत्म हो जाएगा बंधवाड़ी कूड़े का पहाड़
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सितंबर तक खत्म हो जाएगा बंधवाड़ी कूड़े का पहाड़
- नगर निगम ने कूड़ा हटाने को शुरू की विकल्पों की तलाश
- मेथेनॉल प्लांट के लिए भी तलाशी जा रही 10 एकड़ जमीन
- बंधवाड़ी कूड़े के पहाड़ के संबंध में 30 को एनजीटी में सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंधवाड़ी में शहर के कचरे से बना पहाड़ इस साल सितंबर तक खत्म हो जाएगा। नगर निगम ने इस हटाने के विकल्पों की तलाश शुरू की दी है। 30 जनवरी को बंधवाड़ी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई है। निगम ने एनजीटी की कमेटी को कूड़े पहाड़ को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें यह बताया गया है कि सितंबर तक कूड़ा हटा दिया जाएगा।
निगम अधिकारियों का कहना है कि अब यहां कूड़ा डंप नहीं होगा। जो पहले डंप कूड़े को अतिरिक्त मशीन लगाकर खाद या आरडीएफ बनाकर हटा दिया जाएगा। दो साल बाद इस जगह वेस्ट टू इनर्जी प्लांट तैयार होगा। इसमें कूड़े को जलाकर 25 मेगावाट बिजली बनाने की बात है, हालांकि लोग इसका भी विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर पर्यावरण पर काम कर रहे संगठनों का कहना है कि कूड़ा हटाने के नाम पर निगम अरावली के जंगलों में कूड़ा फेंक रहा है। पिछले साल अक्तूबर में एनजीटी ने पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसके बाद ही निगम ने इसकी देखरेख के लिए नौ सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
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निगम ने नहीं बनाई बॉयो गैस के प्लांट की योजना
निगम के संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार बताते हैं कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कमेटी को रिपोर्ट सौंप दी गई है। सितंबर 2023 तक बंधवाड़ी से कूड़े का निस्तारण कर दिया जाएगा। इसके लिए और ज्यादा मशीनों का उपयोग कर उसे अलग-अलग तरीके से निष्पादित किया जाएगा। आगे बंधवाड़ी में कूड़ा नहीं डाला जाएगा। निगम ने बॉयो गैस के प्लांट की कोई योजना नहीं बनाई है।
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ईंधन और खाद की जाएगी तैयार
कूड़े का प्रबंधन करने वाली कंपनी इको ग्रीन के प्रतिनिधि का कहना है कि ट्रोमल मशीन के सहारे गीले और सूखे कूड़े को अलग करेंगे। फिर इसे सुखाकर ईंधन और खाद बनाया जाएगा। सितंबर तक यहां पड़े करीब 40 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निष्पादन कर दिया जाएगा। जब तक बिजली उत्पादन के लिए प्लांट नहीं बन जाता है। तब तक बसई और पाली में कूड़ा प्रबंधन होगा।
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जमीन न मिलने से अधर में है मेथेनॉल प्लांट की योजना
निगम में कूड़े के निष्पादन में लगी एजेंसी इको ग्रीन ने करीब 200 करोड़ के खर्च पर 500 टन प्रतिदिन कूड़े के निष्पादन के साथ मेथेनॉल गैस बनाने का प्रपोजल दिया है। कूड़े से बॉयोमेथेनॉल बनाकर इसे बॉयो डीजल की तरह प्रयोग किया जा सकता है। इस योजना को दो साल में पूरा होना है। यह कूड़े के निष्पादन का पर्यावरण सुरक्षित तरीका है। इसके लिए इको ग्रीन को 11 एकड़ भूूमि जगह चाहिए। प्लांट के लिए गुरुग्राम और फरीदाबाद में निगम कोई जगह नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। निगम के संयुक्त आयुक्त के अनुसार, अभी यह केवल प्रपोजल तक ही है। जमीन उपलब्ध नहीं होने से इस पर अभी विचार नहीं किया जा सकता है।
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एनजीटी के आदेश और कमेटी के बाद भी कार्रवाई नहीं
अरावली और बंधवाड़ी पर काम कर रही वैशाली राणा, विवेक कांबोज और रोमा विनायक ने हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के एनजीटी द्वारा पूर्व में दिए जा चुके दो आदेशों का हवाला देते पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। एनजीटी के दो आदेशों के बाद बंधवाड़ी में कूड़े के 45 मीटर पहाड़ और अरावली के गंदगी को देखने के लिए नौ सदस्यीय कमेटी बनी है।
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छह माह बाद भी हालात जस के तस
पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच अरावली के प्रदूषण पर ध्यान रखने के लिए सख्त आदेश हुए लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संगठनों ने 25 सोसाइटियों के नाम दिए थे, जहां कचरा निष्पादन नहीं हो रहा था। वहां छह महीने बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है। बंधवाड़ी से अरावली के जंगलों में भी आरडीएफ के नाम पर लाखों टन कूड़ा अरावली में फेंका गया।
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बंधवाड़ी से कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यहां से कूड़ा निष्पादित किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बंधवाड़ी में अब और कूड़ा नहीं डाला जाएगा। - पीसी मीणा, नगरायुक्त, गुरुग्राम
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- नगर निगम ने कूड़ा हटाने को शुरू की विकल्पों की तलाश
- मेथेनॉल प्लांट के लिए भी तलाशी जा रही 10 एकड़ जमीन
- बंधवाड़ी कूड़े के पहाड़ के संबंध में 30 को एनजीटी में सुनवाई
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बंधवाड़ी में शहर के कचरे से बना पहाड़ इस साल सितंबर तक खत्म हो जाएगा। नगर निगम ने इस हटाने के विकल्पों की तलाश शुरू की दी है। 30 जनवरी को बंधवाड़ी के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में सुनवाई है। निगम ने एनजीटी की कमेटी को कूड़े पहाड़ को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसमें यह बताया गया है कि सितंबर तक कूड़ा हटा दिया जाएगा।
निगम अधिकारियों का कहना है कि अब यहां कूड़ा डंप नहीं होगा। जो पहले डंप कूड़े को अतिरिक्त मशीन लगाकर खाद या आरडीएफ बनाकर हटा दिया जाएगा। दो साल बाद इस जगह वेस्ट टू इनर्जी प्लांट तैयार होगा। इसमें कूड़े को जलाकर 25 मेगावाट बिजली बनाने की बात है, हालांकि लोग इसका भी विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर पर्यावरण पर काम कर रहे संगठनों का कहना है कि कूड़ा हटाने के नाम पर निगम अरावली के जंगलों में कूड़ा फेंक रहा है। पिछले साल अक्तूबर में एनजीटी ने पर्यावरणीय नुकसान को देखते हुए निगम पर 100 करोड़ का जुर्माना लगाया था। इसके बाद ही निगम ने इसकी देखरेख के लिए नौ सदस्यीय कमेटी बनाई थी।
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निगम ने नहीं बनाई बॉयो गैस के प्लांट की योजना
निगम के संयुक्त आयुक्त डॉ. नरेश कुमार बताते हैं कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की कमेटी को रिपोर्ट सौंप दी गई है। सितंबर 2023 तक बंधवाड़ी से कूड़े का निस्तारण कर दिया जाएगा। इसके लिए और ज्यादा मशीनों का उपयोग कर उसे अलग-अलग तरीके से निष्पादित किया जाएगा। आगे बंधवाड़ी में कूड़ा नहीं डाला जाएगा। निगम ने बॉयो गैस के प्लांट की कोई योजना नहीं बनाई है।
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ईंधन और खाद की जाएगी तैयार
कूड़े का प्रबंधन करने वाली कंपनी इको ग्रीन के प्रतिनिधि का कहना है कि ट्रोमल मशीन के सहारे गीले और सूखे कूड़े को अलग करेंगे। फिर इसे सुखाकर ईंधन और खाद बनाया जाएगा। सितंबर तक यहां पड़े करीब 40 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निष्पादन कर दिया जाएगा। जब तक बिजली उत्पादन के लिए प्लांट नहीं बन जाता है। तब तक बसई और पाली में कूड़ा प्रबंधन होगा।
जमीन न मिलने से अधर में है मेथेनॉल प्लांट की योजना
निगम में कूड़े के निष्पादन में लगी एजेंसी इको ग्रीन ने करीब 200 करोड़ के खर्च पर 500 टन प्रतिदिन कूड़े के निष्पादन के साथ मेथेनॉल गैस बनाने का प्रपोजल दिया है। कूड़े से बॉयोमेथेनॉल बनाकर इसे बॉयो डीजल की तरह प्रयोग किया जा सकता है। इस योजना को दो साल में पूरा होना है। यह कूड़े के निष्पादन का पर्यावरण सुरक्षित तरीका है। इसके लिए इको ग्रीन को 11 एकड़ भूूमि जगह चाहिए। प्लांट के लिए गुरुग्राम और फरीदाबाद में निगम कोई जगह नहीं उपलब्ध करा पा रहा है। निगम के संयुक्त आयुक्त के अनुसार, अभी यह केवल प्रपोजल तक ही है। जमीन उपलब्ध नहीं होने से इस पर अभी विचार नहीं किया जा सकता है।
एनजीटी के आदेश और कमेटी के बाद भी कार्रवाई नहीं
अरावली और बंधवाड़ी पर काम कर रही वैशाली राणा, विवेक कांबोज और रोमा विनायक ने हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन के एनजीटी द्वारा पूर्व में दिए जा चुके दो आदेशों का हवाला देते पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। एनजीटी के दो आदेशों के बाद बंधवाड़ी में कूड़े के 45 मीटर पहाड़ और अरावली के गंदगी को देखने के लिए नौ सदस्यीय कमेटी बनी है।
छह माह बाद भी हालात जस के तस
पिछले साल सितंबर से नवंबर के बीच अरावली के प्रदूषण पर ध्यान रखने के लिए सख्त आदेश हुए लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। संगठनों ने 25 सोसाइटियों के नाम दिए थे, जहां कचरा निष्पादन नहीं हो रहा था। वहां छह महीने बाद भी स्थिति ज्यों की त्यों है। बंधवाड़ी से अरावली के जंगलों में भी आरडीएफ के नाम पर लाखों टन कूड़ा अरावली में फेंका गया।
बंधवाड़ी से कूड़े के पहाड़ को खत्म करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। यहां से कूड़ा निष्पादित किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया गया है कि बंधवाड़ी में अब और कूड़ा नहीं डाला जाएगा। - पीसी मीणा, नगरायुक्त, गुरुग्राम