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Gurugram News: आर्टिमिस अस्पताल प्रबंधन ने भर्ती बच्चों के अभिभावाकों को लौटाई राशि
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बस हादसे में घायल हुए बच्चों के फ्री इलाज की शासन ने की थी घोषणा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। महेंद्रगढ़ जिले में हुए बस हादसे में घायल उपचाराधीन बच्चों के अभिभावकों से ली गई राशि को अस्पताल प्रशासन ने वापस लौटा दिया है। इस बस हादसे में घायल हुए बच्चों के फ्री इलाज की घोषणा शासन ने कर दी थी। इससे पहले ही आर्टिमिस अस्पताल प्रशासन अपने यहां भर्ती दो बच्चों के परिजनों से एडमिशन राशि के नाम पर पचास-पचास हजार रुपये जमा करा चुका था। एक दिन पहले ही उन्हें दोबारा पांच लाख का बिल थमा दिया था।
बृहस्पतिवार को ही घायल बच्चों से मिलने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता ने भी यह घोषणा की थी कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार ही उठाएगी। ऐसे में शुक्रवार को जब अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से करीब पांच लाख रुपये की राशि की डिमांड और की तो परिजनों ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से कर दी। मामला संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य मंंत्री ने तत्काल ही जिला प्रशासन को निर्देशित किया। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब कर लिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए गलती से बिल जारी होने की बात कही और पूर्व में एडमिशन के दौरान जमा की गई रकम भी परिजनों को लौटा दी।
इस मामले में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र यादव व उनकी टीम तीनों बच्चों के इलाज की प्रक्रिया पर निरंतर नजर बनाए हुए है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। महेंद्रगढ़ जिले में हुए बस हादसे में घायल उपचाराधीन बच्चों के अभिभावकों से ली गई राशि को अस्पताल प्रशासन ने वापस लौटा दिया है। इस बस हादसे में घायल हुए बच्चों के फ्री इलाज की घोषणा शासन ने कर दी थी। इससे पहले ही आर्टिमिस अस्पताल प्रशासन अपने यहां भर्ती दो बच्चों के परिजनों से एडमिशन राशि के नाम पर पचास-पचास हजार रुपये जमा करा चुका था। एक दिन पहले ही उन्हें दोबारा पांच लाख का बिल थमा दिया था।
बृहस्पतिवार को ही घायल बच्चों से मिलने पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता ने भी यह घोषणा की थी कि घायलों के इलाज का पूरा खर्च सरकार ही उठाएगी। ऐसे में शुक्रवार को जब अस्पताल प्रशासन ने परिजनों से करीब पांच लाख रुपये की राशि की डिमांड और की तो परिजनों ने इसकी शिकायत स्वास्थ्य मंत्री से कर दी। मामला संज्ञान में आते ही स्वास्थ्य मंंत्री ने तत्काल ही जिला प्रशासन को निर्देशित किया। इसके बाद जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अस्पताल प्रशासन से जवाब तलब कर लिया। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने अपनी भूल स्वीकार करते हुए गलती से बिल जारी होने की बात कही और पूर्व में एडमिशन के दौरान जमा की गई रकम भी परिजनों को लौटा दी।
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इस मामले में उपायुक्त निशांत कुमार यादव ने बताया कि जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग की ओर से सिविल सर्जन डॉ. वीरेंद्र यादव व उनकी टीम तीनों बच्चों के इलाज की प्रक्रिया पर निरंतर नजर बनाए हुए है।
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