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अस्ताचलगामी सूर्यदेव का अर्घ्य, अब उगने का इंतजार

Wed, 10 Nov 2021 11:31 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 10 Nov 2021 11:31 PM IST
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Arghya of the rising sun god, now waiting to rise
सेक्टर-10ए शक्ति पार्क में अस्ताचलगामी सूर्य की पूजा-अर्चना करती व्रती महिलाएं। - फोटो : Gurgaon
गुरुग्राम। छठ पर्व के तीसरे दिन बुधवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को नमन कर पहला अर्घ्य दिया। आयोजन के तीसरे दिन व्रतधारियों ने छठ पर्व का व्रत रख आयोजन स्थलों पर धार्मिक अनुष्ठान किए। सूर्य देव की प्रतिमा की उपासना भी व्रतियों ने की। छठ पर्व के तीसरे दिन शाम को बांस की टोकरी में फल, ठेकुआ, चावल के लड्डू आदि से अर्घ्य का सूप सजाया हुआ था। बुधवार दोपहर से ही व्रती महिला-पुरुष जल में खड़े हो गए थे, वहीं काफी लोग दोपहर बाद 4 बजे भी जल में खड़े हुए।
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गुरुग्राम क्षेत्र में सूर्य 5.32 बजे सूर्यास्त हुआ और व्रतियों ने अपने परिवार के सदस्यों के साथ सूर्यदेव को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही चौथे दिन सुबह उगते हुए सूर्य को दूसरा अर्घ्य दिया जाएगा और अर्घ्य देने के बाद व्रत का पारण किया जाएगा। सूर्य षष्ठी का यह व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छी सेहत, पारिवारिक सुख-समृद्धि और मान-सम्मान हेतु किया जाता है। छठ महापर्व के तीसरे दिन बुधवार को व्रतियों ने अस्ताचलगामी सूर्य को नमन कर पहला अर्घ्य दिया।
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परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना
अर्घ्य देने के साथ भगवान से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना की। सूर्य देव को अर्घ्य देने से पूर्व कई धार्मिक अनुष्ठान भी किए। कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी पर व्रतधारी जलाशयों में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देने और परिवार की खुशहाली के लिए उगते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा चली आ रही है। मान्यता के अनुसार, मंगलवार को खरना की रस्म पूरी करने के बाद महिलाओं ने निर्जला व्रत शुरू किया था। वे पूरी रात छठ पर्व से संबंधित लोकगीत भी गुनगुनाते रहे।
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दोपहर से ही घाटों पर उमड़ने लगी भीड़
दोपहर से ही घाटों पर उपवास रखने वाली महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य घाटों का रुख करने लगे थे। छठ मइया को ठेकुआ, मालपुआ, खीर-पूड़ी, खजूर, सूजी का हलवा, चावल का बना लड्डू प्रसाद के रूप में चढ़ाया गया। छठ मइया की कथा सुनी और सायं को अर्घ्य के बाद रात को सूर्य देवता का ध्यान और छठ मइया के गीत गाए। खरना के बाद 36 घंटे व्रत रखा और बृहस्पतिवार की सुबह सप्तमी तिथि को सूर्योदय से पहले नदी के घाट पर पहुंचकर उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। इसके बाद व्रत का पारण करते हुए व्रत खोला जाता है। गुरुग्राम में छठ पर्व को लेकर लगभग 30 जगह स्थायी और अस्थायी घाटों को तैयार किया गया था, जहां पर व्रतियों ने पानी खड़ा होकर छठ पूजा की।
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