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Gurugram News: सिमट रहा अरावली का घेरा, बढ़ रहा तेंदुओं का डेरा
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विवेक कुमार सिंह
गुरुुग्राम। वन्य जीवों के लिए संरक्षित अरावली वन क्षेत्र का दायरा सिमट रहा है, लेकिन सुखद बात यह है कि इसमें तेंदुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2000 में यहां पर तीन तेंदुए थे। 2012 में यह संख्या 8 तक पहुंची। 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई थी। अब ताजा गणना के बाद 50 से 60 की संख्या में होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के साथ वन विभाग ने गुरुग्राम सहित प्रदेश के पांच जिलों में फैली अरावली की पहाड़ियों में इस संरक्षित प्रजाति के जानवर की गणना की है। इस रिपोर्ट को जल्द ही जारी किया जाएगा।
अरावली में मौजूद जानवरों की गणना का काम इस वर्ष मई माह में पूरा कर लिया गया है। करीब एक माह के भीतर अरावली क्षेत्र में फैले तेंदुओं की गणना पूरी कर ली गई। अरावली के वन क्षेत्र में कमी आने के संकेत केंद्र सरकार द्वारा सन 2021 में जारी भारतीय वन स्थिति की रिपोर्ट में मिलते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम में 2.5 वर्ग किमी, नूूंह में 0.55 वर्ग किमी और फरीदाबाद में 0.71 वर्ग किमी वन क्षेत्र कम हुआ है।
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तेंदुए की गणना में अपनाया गया यह तरीका
वन्यजीवों की गणना के लिए सामान्यत: दो तरीके अपनाए जाते हैं। शाकाहारी जानवरों के लिए डायरेक्ट साइटिंग और मांसाहारी जानवरों कि लिए इन डायरेक्ट साइटिंग। जंगल में एक रास्ता चिह्नित कर उससे गुजरने वाले जानवरों की संख्या नोट कर ली जाती है। मांसाहारी जानवरों कि लिए रास्ते पर पड़ने वाले चिह्न जैसे पैर के निशान और मल-मू्त्र की निशानदेही का इस्तेमाल कर उनकी गणना की जाती है। पांच जिलों में 50 ऐसे रास्ते चिह्नित किए गए। हर रास्ते के लिए करीब दो लोगों की टीम बनाई गई। करीब 100 से 110 लोग पूूरी गणना प्रक्रिया में शामिल हुए। इसमें 40 से 50 लाख रुपये तक का खर्चा भी आया। इस वर्ष के अंत तक रिपोर्ट के सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।
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वर्जन
पर्यावरण प्रेमी वैशाली राणा ने बताया कि साल 2021 में जारी एफएसआई की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक जंगल क्षरण गुरुग्राम में हुआ है। इसके बाद फरीदाबाद और नूूंह का स्थान है। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। यह अच्छा संकेत है, लेकिन सरकार को हो रहे जंगल क्षरण की ओर ध्यान देना होगा, नहीं तो तेंदुओं के रिहायशी इलाकों में घुसने की घटनाएं बढेंगी।
वन्यजीव निरीक्षक राजेश चहल ने बताया कि साल 2017 में हुए सर्वे में तेंदुओं की संख्या 33 थी, जबकि इस बार हुए सर्वे में इनकी संख्या 50 से 60 तक पहुंची है। तेंदुओं के साथ ही दूसरे वन्यजीव जैसे सियार, जंगली बिल्ली, लोमड़ी और नीलगाय आदि की संख्या भी बढ़ रही है।
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साल दर साल बढ़ रहे तेंदुए
साल-तेंदुए
2000- 3
2012- 8
2017-33
2022-50-60(अनुमानित)
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गुरुुग्राम। वन्य जीवों के लिए संरक्षित अरावली वन क्षेत्र का दायरा सिमट रहा है, लेकिन सुखद बात यह है कि इसमें तेंदुओं की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2000 में यहां पर तीन तेंदुए थे। 2012 में यह संख्या 8 तक पहुंची। 2017 में इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई थी। अब ताजा गणना के बाद 50 से 60 की संख्या में होने का अनुमान व्यक्त किया जा रहा है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून के साथ वन विभाग ने गुरुग्राम सहित प्रदेश के पांच जिलों में फैली अरावली की पहाड़ियों में इस संरक्षित प्रजाति के जानवर की गणना की है। इस रिपोर्ट को जल्द ही जारी किया जाएगा।
अरावली में मौजूद जानवरों की गणना का काम इस वर्ष मई माह में पूरा कर लिया गया है। करीब एक माह के भीतर अरावली क्षेत्र में फैले तेंदुओं की गणना पूरी कर ली गई। अरावली के वन क्षेत्र में कमी आने के संकेत केंद्र सरकार द्वारा सन 2021 में जारी भारतीय वन स्थिति की रिपोर्ट में मिलते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक गुरुग्राम में 2.5 वर्ग किमी, नूूंह में 0.55 वर्ग किमी और फरीदाबाद में 0.71 वर्ग किमी वन क्षेत्र कम हुआ है।
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तेंदुए की गणना में अपनाया गया यह तरीका
वन्यजीवों की गणना के लिए सामान्यत: दो तरीके अपनाए जाते हैं। शाकाहारी जानवरों के लिए डायरेक्ट साइटिंग और मांसाहारी जानवरों कि लिए इन डायरेक्ट साइटिंग। जंगल में एक रास्ता चिह्नित कर उससे गुजरने वाले जानवरों की संख्या नोट कर ली जाती है। मांसाहारी जानवरों कि लिए रास्ते पर पड़ने वाले चिह्न जैसे पैर के निशान और मल-मू्त्र की निशानदेही का इस्तेमाल कर उनकी गणना की जाती है। पांच जिलों में 50 ऐसे रास्ते चिह्नित किए गए। हर रास्ते के लिए करीब दो लोगों की टीम बनाई गई। करीब 100 से 110 लोग पूूरी गणना प्रक्रिया में शामिल हुए। इसमें 40 से 50 लाख रुपये तक का खर्चा भी आया। इस वर्ष के अंत तक रिपोर्ट के सार्वजनिक किए जाने की संभावना है।
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वर्जन
पर्यावरण प्रेमी वैशाली राणा ने बताया कि साल 2021 में जारी एफएसआई की रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक जंगल क्षरण गुरुग्राम में हुआ है। इसके बाद फरीदाबाद और नूूंह का स्थान है। इसके बावजूद इन क्षेत्रों में तेंदुओं की संख्या बढ़ी है। यह अच्छा संकेत है, लेकिन सरकार को हो रहे जंगल क्षरण की ओर ध्यान देना होगा, नहीं तो तेंदुओं के रिहायशी इलाकों में घुसने की घटनाएं बढेंगी।
वन्यजीव निरीक्षक राजेश चहल ने बताया कि साल 2017 में हुए सर्वे में तेंदुओं की संख्या 33 थी, जबकि इस बार हुए सर्वे में इनकी संख्या 50 से 60 तक पहुंची है। तेंदुओं के साथ ही दूसरे वन्यजीव जैसे सियार, जंगली बिल्ली, लोमड़ी और नीलगाय आदि की संख्या भी बढ़ रही है।
साल दर साल बढ़ रहे तेंदुए
साल-तेंदुए
2000- 3
2012- 8
2017-33
2022-50-60(अनुमानित)