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गुरुग्राम: सरकार द्वारा खातों में भेजी गई राशि पाठ्यक्रम की पुस्तकों के लिए पर्याप्त नहीं, पीडीएफ से ही करनी पड़ेगी पढ़ाई
Mon, 27 Sep 2021 09:34 AM IST
प्राची प्रियम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Published by: प्राची प्रियम
Updated Mon, 27 Sep 2021 09:34 AM IST
सार
शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में पहली से आठवीं कक्षा तक की किताबें भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में छात्रों को राशि मिल भी जाती है तो सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चे कहां से किताबें खरीदें।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अबकी बार कोरोना महामारी के कारण किताबों की छपाई नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग ने स्कूलों तक पाठ्यक्रम की किताबें पहुंचाने में असमर्थता जताई थी, जिसके बाद प्रदेश सरकार की ओर से छात्रों के बैंक खातों में किताबों के लिए 250 से 300 रुपये डालने की घोषणा की गई थी। घोषणा जारी हुए काफी दिन होने के बाद अब यह राशि उनके खातों में डाली जा रही है, लेकिन यह राशि पाठ्यक्रम की पुस्तकें खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
वहीं, शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में पहली से आठवीं कक्षा तक की किताबें भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में छात्रों को राशि मिल भी जाती है तो सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चे कहां से किताबें खरीदें। गुरुग्राम में पहली से आठवीं कक्षा तक लगभग 85 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
पुरानी किताबों और पीडीएफ फाइलों से पढ़ रहे छात्र
नए शैक्षणिक सत्र में नई किताबें नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग ने पुरानी किताबों का आदान-प्रदान करने के निर्देश दिए थे, ताकि पुस्तकों के अभाव में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो। पुस्तकों के आदान-प्रदान करने के बाद भी सभी छात्रों को पुस्तकें नहीं मिल पाई, ऐसे में शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं के तहत व्हाट्सएप ग्रुप में पाठ्यक्रम की पीडीएफ भेजी जाती है। छात्र इन पीडीएफ से ही पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें बच्चों के अभिभावक व बहन-भाई उनको पढ़ाने का कार्य करते हैं।
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सभी बच्चों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सकेगी राशि
शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के बैंक खातों में पुस्तकों की राशि डाली जा रही है, लेकिन सभी बच्चों के बैंक खातों में राशि पहुंचने की संभावना कम ही है। नए सत्र में काफी विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों की विभिन्न कक्षाओं में दाखिला लिया है, ऐसे में एमआईएस पोर्टल पर सभी छात्रों की जानकारी अपडेट नहीं हो सकी है।
जबकि अबतक उनके बैंक खाते, आधार कार्ड नंबर, कक्षा व रोल नंबर सहित आदि जानकारी एमआईएस पोर्टल पर नहीं होगी, तो राशि डालने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। जिन बच्चों को किताबों की राशि नहीं मिलेगी, उनकी जानकारी शिक्षकों द्वारा पोर्टल पर दोबारा से अपडेट करनी पड़ेगी।
गुरुग्राम के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों के बैंक खातों में पुस्तकें खरीदने के लिए राशि डाली जा रही है, लेकिन बाजार में पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं हैं। इस संदर्भ में विभाग के आला अधिकारियों से बात की जाएगी, ताकि पता चल सके कि पाठ्यक्रम की पुस्तकें कब तक बाजार में दुकानों पर मिल सकेंगी। जिन बच्चों के बैंक खातों में राशि नहीं आएगी, उनकी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर दोबारा अपडेट कराई जाएगी।
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वहीं, शिक्षकों का कहना है कि वर्तमान में पहली से आठवीं कक्षा तक की किताबें भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में छात्रों को राशि मिल भी जाती है तो सबसे बड़ा सवाल है कि बच्चे कहां से किताबें खरीदें। गुरुग्राम में पहली से आठवीं कक्षा तक लगभग 85 हजार विद्यार्थी सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।
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पुरानी किताबों और पीडीएफ फाइलों से पढ़ रहे छात्र
नए शैक्षणिक सत्र में नई किताबें नहीं मिलने पर शिक्षा विभाग ने पुरानी किताबों का आदान-प्रदान करने के निर्देश दिए थे, ताकि पुस्तकों के अभाव में छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो। पुस्तकों के आदान-प्रदान करने के बाद भी सभी छात्रों को पुस्तकें नहीं मिल पाई, ऐसे में शिक्षकों द्वारा ऑनलाइन कक्षाओं के तहत व्हाट्सएप ग्रुप में पाठ्यक्रम की पीडीएफ भेजी जाती है। छात्र इन पीडीएफ से ही पढ़ाई कर रहे हैं, जिसमें बच्चों के अभिभावक व बहन-भाई उनको पढ़ाने का कार्य करते हैं।
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सभी बच्चों के बैंक खातों में नहीं पहुंच सकेगी राशि
शिक्षा विभाग द्वारा बच्चों के बैंक खातों में पुस्तकों की राशि डाली जा रही है, लेकिन सभी बच्चों के बैंक खातों में राशि पहुंचने की संभावना कम ही है। नए सत्र में काफी विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों की विभिन्न कक्षाओं में दाखिला लिया है, ऐसे में एमआईएस पोर्टल पर सभी छात्रों की जानकारी अपडेट नहीं हो सकी है।
जबकि अबतक उनके बैंक खाते, आधार कार्ड नंबर, कक्षा व रोल नंबर सहित आदि जानकारी एमआईएस पोर्टल पर नहीं होगी, तो राशि डालने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाएगी। जिन बच्चों को किताबों की राशि नहीं मिलेगी, उनकी जानकारी शिक्षकों द्वारा पोर्टल पर दोबारा से अपडेट करनी पड़ेगी।
गुरुग्राम के जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी शशि अहलावत ने कहा कि शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों के बैंक खातों में पुस्तकें खरीदने के लिए राशि डाली जा रही है, लेकिन बाजार में पुस्तकें उपलब्ध ही नहीं हैं। इस संदर्भ में विभाग के आला अधिकारियों से बात की जाएगी, ताकि पता चल सके कि पाठ्यक्रम की पुस्तकें कब तक बाजार में दुकानों पर मिल सकेंगी। जिन बच्चों के बैंक खातों में राशि नहीं आएगी, उनकी जानकारी एमआईएस पोर्टल पर दोबारा अपडेट कराई जाएगी।