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Gurugram News: पराली और कचरा जलाया तो होगी कार्रवाई
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एचएसपीसीबी ने किसान भवन में किसानों को पराली प्रबंधन के प्रति किया जागरूक। वि
एचएसपीसीबी ने किसान भवन में चलाया जागरूकता अभियान
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने किसानों को जागरूक किया। यह अभियान पराली और खुले में कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए था। किसान भवन में अधिकारियों ने धान और गेहूं की पराली जलाना प्रतिबंधित बताया।
नियमों के उल्लंघन पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों से प्रबंधन के तरीके बताए। अभियान में किसान एसोसिएशन, हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (एचएसएएमबी) और मार्केट कमेटी के अधिकारी भी शामिल थे। पराली का धुआं वायु गुणवत्ता खराब करता है। इससे सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है। खेतों में पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं।
पराली और कचरा प्रबंधन के उपाय बताए
अधिकारियों ने हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों से पराली प्रबंधन की जानकारी दी। बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर औद्योगिक कार्यों या ईंधन में उपयोग किया जा सकता है। किसानों को इन मशीनों पर सरकारी सहायता और कस्टम हायरिंग सेंटर की उपलब्धता भी बताई गई। खुले में प्लास्टिक, पत्तियों और अन्य ठोस कचरा जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है। लोगों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा निर्धारित नियमों से निस्तारण की अपील की गई।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) ने किसानों को जागरूक किया। यह अभियान पराली और खुले में कचरा जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण को रोकने के लिए था। किसान भवन में अधिकारियों ने धान और गेहूं की पराली जलाना प्रतिबंधित बताया।
नियमों के उल्लंघन पर संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी गई। अधिकारियों ने पराली जलाने के बजाय आधुनिक मशीनों से प्रबंधन के तरीके बताए। अभियान में किसान एसोसिएशन, हरियाणा स्टेट एग्रीकल्चरल मार्केटिंग बोर्ड (एचएसएएमबी) और मार्केट कमेटी के अधिकारी भी शामिल थे। पराली का धुआं वायु गुणवत्ता खराब करता है। इससे सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं होती हैं। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ता है। खेतों में पराली जलाने से मिट्टी के पोषक तत्व और सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं।
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पराली और कचरा प्रबंधन के उपाय बताए
अधिकारियों ने हैप्पी सीडर और सुपर सीडर जैसी मशीनों से पराली प्रबंधन की जानकारी दी। बेलर मशीन से पराली की गांठें बनाकर औद्योगिक कार्यों या ईंधन में उपयोग किया जा सकता है। किसानों को इन मशीनों पर सरकारी सहायता और कस्टम हायरिंग सेंटर की उपलब्धता भी बताई गई। खुले में प्लास्टिक, पत्तियों और अन्य ठोस कचरा जलाने से भी प्रदूषण बढ़ता है। लोगों से गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने तथा निर्धारित नियमों से निस्तारण की अपील की गई।
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