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Gurugram News: 25 करोड़ के लोन मामले में आरोपी को जमानत
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- लोन की व्यवस्था नहीं होने और 25 लाख रुपये वापस न करने का था आरोप
- 2015 में आत्महत्या के बाद सेक्टर-40 थाना पुलिस ने दर्ज किया था मामला
अदालत से-
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 25 करोड़ रुपये के लोन की व्यवस्था नहीं होने और 25 लाख रुपये वापस न करने के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी अनिल खन्ना को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक सिंगल की अदालत ने जमानत दे दी। मामले में सेक्टर-40 थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
अदालत में बताया गया कि अनिल खन्ना को स्टारेक्स होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए 25 करोड़ रुपये का लोन दिलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उसे कथित तौर पर 25 लाख रुपये दिए गए थे। 10 अक्तूबर 2014 को आरोपी और कंपनी के बीच एमओयू भी हुआ था। मृतक लोन प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका में था और एमओयू पर गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। आरोप था कि लोन की व्यवस्था नहीं हो सकी और 25 लाख रुपये वापस नहीं किए गए। शिकायत पक्ष के अनुसार, मृतक को लोन होने पर ब्रोकरेज के रूप में बड़ी रकम मिलने की उम्मीद थी। कथित उत्पीड़न के चलते उसने छह अगस्त 2015 को आत्महत्या कर ली। बचाव पक्ष ने कहा कि धारा 306 के तहत आरोपी की मंशा साबित होना जरूरी है। केवल लोन की व्यवस्था न होना या रकम वापस न करने से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता।
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- 2015 में आत्महत्या के बाद सेक्टर-40 थाना पुलिस ने दर्ज किया था मामला
अदालत से-
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। 25 करोड़ रुपये के लोन की व्यवस्था नहीं होने और 25 लाख रुपये वापस न करने के मामले में आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी अनिल खन्ना को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक सिंगल की अदालत ने जमानत दे दी। मामले में सेक्टर-40 थाना पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की थी।
अदालत में बताया गया कि अनिल खन्ना को स्टारेक्स होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड के लिए 25 करोड़ रुपये का लोन दिलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके लिए उसे कथित तौर पर 25 लाख रुपये दिए गए थे। 10 अक्तूबर 2014 को आरोपी और कंपनी के बीच एमओयू भी हुआ था। मृतक लोन प्रक्रिया में बिचौलिए की भूमिका में था और एमओयू पर गवाह के तौर पर हस्ताक्षर किए थे। आरोप था कि लोन की व्यवस्था नहीं हो सकी और 25 लाख रुपये वापस नहीं किए गए। शिकायत पक्ष के अनुसार, मृतक को लोन होने पर ब्रोकरेज के रूप में बड़ी रकम मिलने की उम्मीद थी। कथित उत्पीड़न के चलते उसने छह अगस्त 2015 को आत्महत्या कर ली। बचाव पक्ष ने कहा कि धारा 306 के तहत आरोपी की मंशा साबित होना जरूरी है। केवल लोन की व्यवस्था न होना या रकम वापस न करने से आत्महत्या के लिए उकसाने का अपराध नहीं बनता।
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