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Gurugram News: जेल गए भाई के नाम पर लिया 6.28 करोड़ रुपये का लोन

Thu, 05 Mar 2026 11:32 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 05 Mar 2026 11:32 PM IST
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A loan of Rs 6.28 crore was taken in the name of his brother who was jailed.
फर्जी दस्तावेज लगा व बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके वारदात को दिया अंजाम
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सेक्टर-14 थाने में प्राथमिकी दर्ज, आर्थिक अपराध शाखा-2 कर रही मामले की छानबीन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। सेक्टर-14 थाना क्षेत्र में जेल गए युवक के नाम पर उसके भाई ने 6,28,31,772 रुपये का लोन ले लिया है। पीड़ित युवक को इस बारे में तब चला जब उसका क्रेडिट स्कोर खराब हो गया और उसे बैंक से लोन नहीं मिल पाया।
पीड़ित युवक ने जब लोन न मिल पाने के बारे में छानबीन की तो पता चला कि उसके भाई ने फर्जी दस्तावेज लगा व बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके लोन लेने की वारदात को अंजाम दिया है। पीड़ित ने अपने भाई, भाभी व भतीजे के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा-2 में शिकायत दी। आर्थिक अपराध शाखा की जांच व शिकायत के आधार पर सेक्टर-14 थाने में धारा 420, 467, 468, 471, 120बी आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। सेक्टर-48 निवासी सुशील कुमार ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि वह किसी मामले में जुलाई 2017 से जुलाई 2018 तक न्यायिक हिरासत में जेल में बंद था। इस दौरान वह किसी भी कारोबार, दस्तावेज पर हस्ताक्षर या बैंक जाने में असमर्थ था। उसके भाई के पास उसके दस्तावेज थे। ऐसे में उसके भाई डीएलएफ फेज-3 निवासी सतीश कुमार यादव, भाभी लतेश व भतीजे लोकेश ने उसके दस्तावेजों का दुरुपयोग कर व बैंक अधिकारियों से मिलीभगत करके विभिन्न बैंकों से उसके नाम पर कुल 6,28,31,772 रुपये का संयुक्त लोन ले लिया।
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इन बैंकों से लिया गया लोन

पीड़ित सुशील कुमार ने बताया कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से 74,55,224 रुपये, 2,48,47,187 रुपये, 59,31,361 रुपये के लोन शामिल हैं। ये लोन वर्ष 2017 में खुले और वर्ष 2021 तक बंद हुए थे। इनमें सेटलमेंट और राइट ऑफ राशि दर्ज है। इसके अलावा पिरामल फाइनेंस से 1,30,98,000 रुपये, जो वर्ष 2017 में खुला व वर्ष 2023 में बंद हो गया। एडी बिरला कैपिटल से 15 लाख रुपये का लोन वर्ष 2018 में खुला व वर्ष 2022 में बंद हुआ। वहीं, कैपरी ग्लोबल से एक करोड़ रुपये का लोन वर्ष 2017 में खुला व बंद हुआ।
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लोन लेने के दौरान फर्जी हस्ताक्षर किए

पीड़ित सुशील कुमार का आरोप है कि लोन लेने के दौरान उसके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। फर्जी दस्तावेज बनाए गए व बैंक अधिकारियों ने आवश्यक जांच-परख किए बिना लोन मंजूर कर दिए। हिरासत के दौरान ही इन लोन को अवैध रूप से सेटल किया गया, जिससे उसके नाम पर गलत क्रेडिट हिस्ट्री बन गई। सुशील कुमार की रिहाई के बाद भी सतीश कुमार के परिवार ने उन्हें धोखे में रखा। वहीं, उनकी पत्नी की संपत्ति का गिफ्ट डीड उनके पक्ष में करवा लिया, जिसका मामला सिविल कोर्ट में लंबित है। पीड़ित सुशील कुमार का आरोप है कि हाल ही में उन्हें 400 करोड़ रुपये के वर्क ऑर्डर मिले थे। इन कामों को पूरा करने के लिए उन्होंने बैंक से लोन लेने का आवेदन किया तो क्रेडिट रिपोर्ट में एडवर्स एंट्री के कारण उन्हें लोन देने से मना कर दिया गया। सुशील ने जब अपनी क्रेडिट रिपोर्ट की जानकारी निकलवाई तो जालसाजी के बारे में पता चला। जांच अधिकारी एएसआई कृष्ण कुमार ने बताया कि मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा-2 कर रही है। सेक्टर-14 थाने में प्राथमिकी दर्ज करके रिपोर्ट आर्थिक अपराध शाखा-2 को भेजी गई है।
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