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Gurugram News: सड़कों पर मौत का सफर, 5 की जगह 12 सवारियां बैठा रहे ऑटो चालक
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पुलिस बूथों के सामने ही उड़ रही यातायात नियमों की धज्जियां
कम किराये के चक्कर में यात्री दांव पर लगा रहे जान
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। शहर के मुख्य मार्गों जैसे बस स्टैंड से बादशाहपुर और रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड तक चलने वाले ऑटो में सुरक्षा व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।नियमानुसार एक ऑटो में अधिकतम 5 सवारियां बैठाने की अनुमति है लेकिन हकीकत में इन ऑटो में 12 से 15 यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भरा जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि सड़क के मुख्य चौराहों पर पुलिस बूथ बने हुए हैं और यातायात कर्मियों की तैनाती रहती है, इसके बावजूद ये ऑटो चालक बिना किसी डर के इन सड़काें पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। यात्रियों से बातचीत करने के दौरान उन्होंने बताया कि इन ऑटो में सफर करना मजबूरी बन गया है। जहां इन ऑटो में 10 से 20 रुपये किराया निर्धारित है वहीं निजी ऑटो चालक उसी दूरी के लिए 150 से 200 रुपये तक वसूलते हैं। इस कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को इन ओवरलोड ऑटो में बैठकर सफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। उन्होंने ये भी बताया कि ओवरलोडिंग ऑटो के कारण इन ऑटो का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। यदि कोई छोटी सी दुर्घटना भी होती है तो अधिक सवारियां होने के कारण जान-माल का नुकसान हो सकता है।
वर्जन-
रोज सुबह काम पर जाने की जल्दी होती है। पर्सनल ऑटो 200 रुपये मांगता है। ऐसे में जान जोखिम में डालकर 20 रुपये वाले इसी ऑटो में लटक कर जाना पड़ता है। -हंसराज
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इन ऑटो में बैठना किसी सजा से कम नहीं है। चालक 12-12 लोगों को बिठा लेते हैं, हिलने तक की जगह नहीं होती है। महिलाओं के लिए तो यह और भी असुरक्षित साबित होता है। -गुरदीप
गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है लेकिन 400-500 दिहाड़ी कमाने वाले लोग हैं। यदि रोजाना 150 रुपये ऑटो वाले को दे देंगे तो घर क्या ले जाएंगे। -सतीश
ऑटो चालक पैसेंजर को सीट के बाहर तक लटका लेते हैं। मोड़ पर कई बार ऑटो पलटने जैसा महसूस होता है। -सुरेंद्र
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कम किराये के चक्कर में यात्री दांव पर लगा रहे जान
संवाद न्यूज एजेंसी
बादशाहपुर। शहर के मुख्य मार्गों जैसे बस स्टैंड से बादशाहपुर और रेलवे स्टेशन से बस स्टैंड तक चलने वाले ऑटो में सुरक्षा व्यवस्था की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।नियमानुसार एक ऑटो में अधिकतम 5 सवारियां बैठाने की अनुमति है लेकिन हकीकत में इन ऑटो में 12 से 15 यात्रियों को ठूंस-ठूंसकर भरा जा रहा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि सड़क के मुख्य चौराहों पर पुलिस बूथ बने हुए हैं और यातायात कर्मियों की तैनाती रहती है, इसके बावजूद ये ऑटो चालक बिना किसी डर के इन सड़काें पर दौड़ते नजर आ रहे हैं। यात्रियों से बातचीत करने के दौरान उन्होंने बताया कि इन ऑटो में सफर करना मजबूरी बन गया है। जहां इन ऑटो में 10 से 20 रुपये किराया निर्धारित है वहीं निजी ऑटो चालक उसी दूरी के लिए 150 से 200 रुपये तक वसूलते हैं। इस कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों को इन ओवरलोड ऑटो में बैठकर सफर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। उन्होंने ये भी बताया कि ओवरलोडिंग ऑटो के कारण इन ऑटो का संतुलन बिगड़ने का खतरा बना रहता है। यदि कोई छोटी सी दुर्घटना भी होती है तो अधिक सवारियां होने के कारण जान-माल का नुकसान हो सकता है।
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वर्जन-
रोज सुबह काम पर जाने की जल्दी होती है। पर्सनल ऑटो 200 रुपये मांगता है। ऐसे में जान जोखिम में डालकर 20 रुपये वाले इसी ऑटो में लटक कर जाना पड़ता है। -हंसराज
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इन ऑटो में बैठना किसी सजा से कम नहीं है। चालक 12-12 लोगों को बिठा लेते हैं, हिलने तक की जगह नहीं होती है। महिलाओं के लिए तो यह और भी असुरक्षित साबित होता है। -गुरदीप
गर्मी में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सांस लेना मुश्किल हो जाता है लेकिन 400-500 दिहाड़ी कमाने वाले लोग हैं। यदि रोजाना 150 रुपये ऑटो वाले को दे देंगे तो घर क्या ले जाएंगे। -सतीश
ऑटो चालक पैसेंजर को सीट के बाहर तक लटका लेते हैं। मोड़ पर कई बार ऑटो पलटने जैसा महसूस होता है। -सुरेंद्र