{"_id":"68e40da259e399b63208f1a4","slug":"a-calm-mind-is-essential-for-better-decisions-bk-pushpa-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-69124-2025-10-07","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेहतर निर्णय के लिए शांत मन होना जरूरी : बीके पुष्पा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बेहतर निर्णय के लिए शांत मन होना जरूरी : बीके पुष्पा
विज्ञापन
न्यायविदों के लिए आयोजित 3 दिवसीय सम्मेलन का हुआ समापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। तनावग्रस्त स्थिति में लिया गया निर्णय व्यक्ति के मन में तनाव ही पैदा करता है। राजयोग चित की वृत्तियों को नियंत्रित करता है, जिससे मन तनावमुक्त होता है। संतुष्टता ही सबसे बड़ा धन है।
उक्त विचार उड़ीसा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शशिकांत मिश्रा ने धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज द्वारा जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में न्यायविदों के लिए आयोजित 3 दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि असली लीडर वो है, जिसका लोग अनुसरण करें। गीता में भी कहा गया है कि महाजन जो करते हैं, सामान्य मनुष्य उसे फॉलो करते हैं। चेतना की जागृति ही नेतृत्व क्षमता को जन्म देती है। बिना भय और पक्षपात का निर्णय तभी होता है, जब हम अंतर आत्मा की आवाज सुनते हैं। संस्था की राजयोगिनी बीके पुष्पा का कहना है कि दूसरों का न्याय करने से पहले स्वयं के साथ न्याय करना भी जरूरी है। जीवन को सुख-शांति और खुशियों से भरना ही स्वयं के साथ न्याय करना है। क्योंकि बेहतर निर्णय के लिए शांत मन होना जरूरी है। दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन कैलाश चंद्र मित्तल का कहना है कि कानून बनने के बाद भी आज अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं। जिसका मूल कारण नैतिक और चारित्रिक पतन है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। तनावग्रस्त स्थिति में लिया गया निर्णय व्यक्ति के मन में तनाव ही पैदा करता है। राजयोग चित की वृत्तियों को नियंत्रित करता है, जिससे मन तनावमुक्त होता है। संतुष्टता ही सबसे बड़ा धन है।
उक्त विचार उड़ीसा उच्च न्यायालय के न्यायाधीश शशिकांत मिश्रा ने धार्मिक संस्था ब्रह्माकुमारीज द्वारा जिले के बिलासपुर क्षेत्र स्थित ओम शांति रिट्रीट सेंटर में न्यायविदों के लिए आयोजित 3 दिवसीय सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि असली लीडर वो है, जिसका लोग अनुसरण करें। गीता में भी कहा गया है कि महाजन जो करते हैं, सामान्य मनुष्य उसे फॉलो करते हैं। चेतना की जागृति ही नेतृत्व क्षमता को जन्म देती है। बिना भय और पक्षपात का निर्णय तभी होता है, जब हम अंतर आत्मा की आवाज सुनते हैं। संस्था की राजयोगिनी बीके पुष्पा का कहना है कि दूसरों का न्याय करने से पहले स्वयं के साथ न्याय करना भी जरूरी है। जीवन को सुख-शांति और खुशियों से भरना ही स्वयं के साथ न्याय करना है। क्योंकि बेहतर निर्णय के लिए शांत मन होना जरूरी है। दिल्ली बार काउंसिल के चेयरमैन कैलाश चंद्र मित्तल का कहना है कि कानून बनने के बाद भी आज अपराध बढ़ते ही जा रहे हैं। जिसका मूल कारण नैतिक और चारित्रिक पतन है।
विज्ञापन